40 डिग्री तापमान में बेटी को छत पर लिटाया:बिटिया के जिस्म का सौदा किया, तो किसी ने दूधमुंहे को मारे थप्पड़, ये टॉक्सिक पेरेंटिंग

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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मां ने छोटी सी बेटी के हाथ-पैर बांधकर तपते हुए छत पर लिटा दिया। दिल्ली की इस तेज गर्मी में छटपटाती बच्ची मां को अवाज लगाती रही लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। बच्ची को हाेमवर्क न करने के लिए यह सजा दी गई थी। यह घटना और इससे जुड़ा वीडियो सुर्खियों में है। ऐसी कुछ घटनाओं को देखें और टॉक्सिक पेरेंटिंग के कारणों को समझें।

जून 2022 : दिल्ली में जब तापमान 40 डिगी को पार कर चुका है। लोग कमरों में एयर कंडीशनर चला कर बैठे हैं, ऐसे में स्लीवलेस गंजी और छोटी पैंट पहने छोटी-सी बेटी को एक मां ने गर्मी से जलते छत पर लिटा दिया। बेटी रोती रही और आवाज लगाती रही लेकिन मां का दिल नहीं पिघला… हाय!

मई 2022 : तामिलनाडु के सलेम जिले में एक मामला सामने आया। इसमें मां ने नाबालिग लड़की को एग डोनर बना दिया। उसके एग को बेचकर कीमत वसूलती रही। मां का प्रेमी बेटी का रेप करता रहा और मां चुप रही, ओह…।

अप्रैल 2022 : जम्मू-कश्मीर की एक घटना में मां अपनी 9 महीने की बच्ची को एक के बाद एक कई थप्पड़ मारती है। फिर उसके पेट में भी मारती है। उसका गला दबाने की कोशिश भी की, फिर उसे बेड पर पटक दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पति की शिकायत पर मां को गिरफ्तार किया गया, दर्दनाक…।

समझें टॉक्सिक पेरेंटिंग को
पेरेंट्स का बच्चों को बेल्ट से मारना, उनको बातों से नीचा दिखाने की कोशिश करना, उनके काम की आलोचना करना, खाना पकाने की चीजों से मारना, टॉक्सिंग पेरेंटिंग कहलाता है। केन्या में टॉक्सिक पेरेंटिंग पर हुई एक स्टडी के अनुसार, टॉक्सिक पेरेंट्स अपने बच्चों को भय दिखाकर, उनको अपराध बोध महसूस कराकर काबू में रखना चाहते हैं। ऐसे में बच्चे खुद में शर्म महसूस करते हैं। इसकी वजह से जिंदगी भर उनके परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ता है।
उड़ीसा स्थित द ब्रेन फाउंडेशन के फाउंडर और साइकेट्रिस्ट डॉ. सम्राट कार के अनुसार, पेरेंटिंग चार तरह के होते हैं। नेगलेक्ट पेरेंटिंग में माता-पिता को बच्चों की परवाह नहीं हाेती है। स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग में पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ बेहद सख्त होते हैं। फॉरमेटिव पेरेंटिंग करने वाले अभिभावक अपने बच्चों की हर तरह की डिमांड को पूरी करने में लगे रहते हैं। बैलेंस्ड पेरेंटिंग में पेरेंट्स, बच्चों के बिहेवियर को देखते हुए कभी नरम तो कभी सख्त रवैया रखते हैं। आजकल टॉक्सिक पेरेंटिंग चर्चा में है। इसमें माता-पिता अपनी जरूरतों और इच्छाओं को बच्चों के ऊपर धोपते हैं। इस कारण कई बार उनका व्यवहार काफी रुखा हो जाता है।

मेंटल हेल्थ को हो सकता है खतरा
हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन के अनुसार बच्चों के ऊपर हाथ उठाने, मारने-पीटने से मेंटल हेल्थ की समस्या बढ़ती है।यह उनके विकास की राह में रोड़ा अटकाता है। प्री-स्कूल या स्कूल के बच्चों यहां तक कि बड़े बच्चों को मारने-पीटने से उनमें एंग्जाइटी और डिप्रेशन डिसऑर्डर होने की आशंका रहती है। इसका असर उनकी एकेडमिक पर्फार्मेंस पर भी पड़ता है। कई बार ऐसी घटनाओं का बोझ लंबे समय तक बना रहता है, जो स्थायी रूप ले सकता है।

साइकेट्रिस्ट डॉ. सम्राट कार के अनुसार, मां स्वभाव से ही ममतामयी होती है। बेशक, कुछ मामलों ने उनके व्यवहार पर प्रश्नचिह्न उठाया है लेकिन इसकी कई वजहें हो सकती है। पहले जॉइंट फैमिली में पूरा परिवार मिलकर बच्चों की जिम्मेदारियां उठाता था, अब न्यूक्लियर फैमिली में पिता काम के सिलसिले में बाहर होते हैं और मां के ऊपर बच्चों की सारी जिम्मेदारियां आ जाती है। उनकी मानसिक परेशानियों की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। ऐसे में उनकी खीझ बच्चों पर निकलती है जो कई बार कठोर वाकये के रूप में नजर आता है।

हिंसा नहीं कर सकते बच्चों के साथ
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में साइकोलॉजी की प्रोफेसर सैंड्रा ग्राह्म के अनुसार, निराशा में लाेग अपने बच्चे को ‘हिट’ करते हैं, ये निराशा दूर करने के लिए दूसरे विकल्प नहीं तलाशते”। बाल अधिकारों पर यूनाइटेड नेशन्स कमिटी ने साल 2006 में एक निर्देश जारी कर कहा कि शारीरिक दंड को बच्चों के खिलाफ कानूनी हिंसा माना जाए। इसमें यह कहा गया कि बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा को सभी तरह की सेटिंग्स में खत्म किया जाना चाहिए।
यहां सेटिंग्स से मतलब है घरेलू, सामाजिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक जैसी संस्था। इस प्रस्ताव का 192 देशों की ओर से स्वागत किया गया। विश्व के करीब 30 देशों में घर सहित सभी सेटिंग्स में बच्चों की शारीरिक सजा पर रोक लगी है।

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