करीना, बिपाशा सबका ब्रेकअप यादगार:सुष्मिता सेन ने किया शत-प्रतिशत क्लोजर, दिल और शरीर की चोट का दिमाग पर एक जैसा असर

नई दिल्ली16 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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वेबसीरीज ‘आर्या’ की स्टार सुष्मिता ने हाल ही में अपने बॉयफ्रेंड रोहमन शाॅल के साथ ब्रेकअप के बाद कहा, “ रिश्ते का क्लोजर दोनों लोगों के लिए जरूरी होता है ताकि वे अपने-अपने रास्ते में आसानी से आगे बढ़ सकें। मैंने अपने प्यार को 100% दिया और अब अलगाव भी 100% होना चाहिए। साइकोलॉजिस्ट भी इस बात को स्वीकारते हैं।

क्यों दर्द है इतना
क्यों दर्द है इतना

ब्रेकअप की क्लोजर रिपोर्ट तैयार करें
‘ब्रेकअप बूटकैंप’ के लेखक एमी चैन कहते हैं कि जो लोग अपने एक्स पर आरोप मढ़ने और उसे कोसने में लगे हैं, रिश्ते से पूरी तरह नहीं निकल पा रहे हैं, तो यह नेगेटिव इमोशन आपको उस रिश्ते से जोड़े रखेगा। रिश्ते के खत्म होने पर दर्द ही उसकी निशानी के रूप में साथ रह जाता है। इसे ‘ट्रॉब्लम बॉडिंग’ या दर्द का रिश्ता कहते हैं। बेहतर होगा कि पुरानी यादों को टुकड़े-टुकड़े में जोड़ कर कलपने की बजाय उसका ‘क्लोजर’ कर दिया जाए।

पुराने बोझ का एक प्रतिशत भी साथ न रखें
मनस्थली वेलनेस क्लीनिक की फाउंडर और सीनियर साकेट्रिस्ट डॉ. ज्योति कपूर बताती हैं कि लिव-इन या किसी भी रिश्ते में अलगाव के बाद पुरानी अच्छी-बुरी यादें जख्म की तरह होती है जो हमेशा दर्द को हरा रखती हैं पुरानी बातों को पूरी तरह भूलना जरूरी है। नए रिश्ते में जुड़ने से पहले पुराने रिश्ते का एक प्रतिशत भी बोझ नहीं रखना चाहिए। दोनों पक्ष कम से कम तकलीफ को लेकर अलग हों, तो यह उनकी मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा होता है।

बिपाशा ने माना माफ करना नहीं होती
बिपाशा बसु और जॉन अब्राहम 10 साल तक साथ लिव-इन में रहने के बाद अलग हुए। वैसे तो इन्हें कभी एक-दूसरे पर ऊंगली उठाते नहीं देखा गया लेकिन एक इंटरव्यू में जब बिपाशा से पूछा गया कि उनका ब्रेकअप कैसा था, तो उन्होंने बेबाकी से जबाव दिया -' जाहर है शानदार नहीं रहा होगा" ।

हालांकि जॉन से जब किसी ने उनके ब्रेकअप पर सवाल किया, तो उनका जबाव था, बहुत ही शानदार, कोई बुरा अनुभव नहीं" बिपाशा ने यह भी माना कि कोई भी ब्रेकअप अच्छा नहीं होता लेकिन समय का मरहम हर घाव को भर देता है। पार्टनर की चीटिंग, बेवफाई, धोखेबाजी को माफ करना आसान नहीं होता। ऐसे में एक्स के साथ दोस्ती कैसे संभव हो सकती है।

हीनभावना को रखें खुद से दूर
स्टडी में पाया गया कि किसी भी पार्टनर के मन में यह नहीं होना चाहिए कि उसकी किसी कमी की वजह से दूसरे ने उसे छोड़ है। ठुकराए जाने का गम बहुत गहरा होता है। यह व्यक्ति को स्थायी रूप से हीन भावना का शिकार बना देता है। डॉ. ज्योति कपूर स्वीकारती हैं कि रिश्ते के टूटने के बाद एक्स के साथ दोस्ताना संबंध हो यह जरूरी नहीं। यह पूरी तरह से रिश्ते की गहराई और व्यक्ति की मानसिक मजबूती पर निर्भर करता है। लेकिन अलगाव ऐसा होना चाहिए कि जब कभी मुलाकात हो, ताे मुंह फेरने के बजाय एक सामान्य मुस्कराहट के साथ मिला जाए।

साइंस भी समझती है ब्रेकअप का दर्द
न्यूरोइमेजिंग तकनीक की मदद से यह पता चल चुका है कि शरीर में चोट लगने पर ब्रेन में मौजूद जो न्यूरोसर्किट एक्टिव होता है वही भावनात्मक तकलीफ के समय भी काम करता है। कहने का मतलब यह है कि ब्रेकअप और शारीरक चोट की तकलीफ एक जैसी ही होती है।
अगर आपके हाथ में चोट लगती है, तो वह कितनी तकलीफदेह होगा, इसका निर्णय ब्रेन लेता है। दिल के मामले में भी दिमाग कुछ इसी तरह काम करता है।

भूल-भूलाकर आगे निकलने का नाम ही जिंदगी
एक्ट्रेस करीना से ब्रेकअप के बाद एक बार ‘जब वी मीट’ स्टार शाहिद कपूर ने कहा था, “मेरे पास दो चाॅइस थे, एक की मैं अपना काम करूं और खामोश रहूं। इससे मैं दर्दभरे सवालों का जबाव देने से बच जाता। दूसरा, अपनी रिलीज होने वाली फिल्म को प्रमोट करने के लिए बाहर निकलूं और बातें करूं। मैं दूसरे को चुना क्योंकि इसी का नाम जिंदगी है।”

ब्रेकअप को 100% फुल एंड फाइनल मानकर मन को समझाना और कड़वाहट को भूलकर आगे बढ़ने में ही समझदारी है।

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