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उत्तर प्रदेश / पावनी का स्टार्टअप 'आत्मनिर्भर' महिलाओं को रोजगार भी दे रहा और दो-पहिया वाहन की ट्रेनिंग भी

Pavani Khandelwal Aatm Nirbhar | UP Entrepreneur Pawani Khandelwal Speaks to Bhaskar Over Women Empowerment
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Pavani Khandelwal Aatm Nirbhar | UP Entrepreneur Pawani Khandelwal Speaks to Bhaskar Over Women Empowerment

  • 2017 में हुई थी शुरुआत, मां को महिला ट्रेनर न मिलने पर स्टार्टअप शुरु करने का आया ख्याल
  • स्टार्टअप में ऐसी महिलाओं को जोड़ा जिन्हें रोजगार की तलाश हैं और स्कूटी चलानी आती है

दैनिक भास्कर

Feb 05, 2020, 07:03 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. मध्यम वर्ग की ऐसी महिलाएं भी हैं जो गाड़ी चलाना सीखना चाहती हैं लेकिन महिला ट्रेनर न होने की वजह से सीख नहीं पाती हैं, उत्तर प्रदेश की पावनी खंडेलवाल ऐसे ही तबके के लिए काम कर रही हैं। पावनी महिलाओं को ट्रेनिंग भी दे रही हैं और रोजगार भी। मथुरा की रहने वाली पावनी के स्टार्टअप 'आत्मनिर्भर' में सभी ट्रेनर महिलाएं हैं। इसकी शुरुआत पावनी की मां से जुड़े एक वाक्ये से हुई थी जो जीवन का लक्ष्य दे गया और महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का जरिया भी। दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में पावनी ने बताई सफर की कहानी...

कैसे आया इसकी शुरुआत का ख्याल
तीन पहले पावनी की मां ने टू व्हीलर ड्राइविंग सीखने की इच्छी जताई तो शहर में एक भी प्रोफेशनल महिला ड्राइविंग ट्रेनर नहीं थी। बहुत मुश्किलों के बाद पावनी को एक महिला ड्राइविंग ट्रेनर मिलीं। जब उनकी मां ने ड्राइविंग सीखी तो कई और ऐसी महिलाएं सामने आईं जो सिर्फ महिला से ही ट्रेनिंग लेकर सीखना चाहती थीं। टू व्हीलर सीखने के बाद पावनी की मां का कहना है कि जब भी वो ड्राइव करती हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है मानों पंख लग गए हों। इस घटना से पावनी को एहसास हुआ कि सिर्फ गाड़ी चलाना सीख कर महिलाएं अपनी रोज़ाना जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव ला सकती हैं। यही वो समय था जब 25 साल की पावनी खंडेलवाल ने साल 2017 में 'आत्मनिर्भर' स्टार्टअप की शुरुआत की।

पावनी खंडेलवाल और उनकी मां, जिनसे मिली स्टार्टअप की प्रेरणा।


20 हज़ार रुपए महीना कमाती है एक महिला
पावनी ने बताया, आत्मनिर्भर में काम करने के लिए ऐसे वर्ग की महिलाओं को ढूंढा गया जो रोजगार की तलाश में हैं और उन्हें स्कूटी चलानी आती है। इनमें से कुछ महिलाओं को ड्राइविंग तो आती थी मगर उनके पास खुद की गाड़ी नहीं थीं। पावनी ने उन्हें स्कूटी दी और बाद में प्रोफेशनल ट्रेनिंग के ज़रिए उन्हें नौकरी के काबिल भी बनाया। अब तक आत्मनिर्भर के सहारे 150 महिलाओं को रोजगार मिल चुका है जो हर महीने 15 से 20 ट्रेनिंग देकर 20 हज़ार रुपए प्रति महीना कमा लेती हैं।

आत्म निर्भर की ट्रेनर और साथ में ट्रेनिंग लेती महिला।


सिर्फ महिलाओं के लिए ही क्यों है आत्म निर्भर
पावनी कहती हैं, अक्सर देखा गया है कि पुरुष के मुकाबले महिलाएं गाड़ी चलाने में पीछे रहती हैं। ऐसे पुरुष जिन्हें गाड़ी चलानी नहीं आती है वो चाहें तो साधारण ड्राइविंग स्कूल में भी ट्रेनिंग ले सकते हैं। महिला ट्रेनर न होने के कारण महिलाएं पुरुषों से टू-व्हीलर की ड्राइविंग सीखने में झिझक महसूस करती हैं। इसलिए केवल महिलाओं को महिलाओं द्वारा ही ट्रेनिंग देने के लिए स्टार्टअप की शुरुआत की।

पावनी खंडेलवाल के साथ आत्म निर्भर की ट्रेनर्स।


देश के हर शहर में आत्मनिर्भर शुरू करने का लक्ष्य
पावनी ने बताया है कि अब तब आगरा, अहमदाबाद, अलीगढ़, लखनऊ, जोधपुर और भरतपुर में आत्मनिर्भर की शुरुआत हो चुकी है। अब लक्ष्य है कि साल 2021 तक पूरे देश में इसका दायरा बढ़ाना है। आत्मनिर्भर की फ्रेंचाइज़ी केवल ऐसी महिलाओं को ही दी जाएगी जो अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छुक हैं।

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