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एक्सपर्ट से जानें महिला स्वास्थ्य से जुड़ी खास बातें:महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए शुरू हो टीकाकरण, पीरियड्स के बाद अनियमित ब्लीडिंग हो तो पेप्समियर या वीआईए टेस्ट करवाना भी जरूरी

डॉ. श्याम अग्रवाल, ओंकोलॉजिस्ट4 दिन पहले
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सर्वाइकल कैंसर गिने चुने कैंसर में से एक है, जिसकी शुरुआत बैक्टिरिया से होती है। अन्य कैंसर कोशिकाओं की गड़बड़ी या मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी के कारण पैदा होते हैं। भोपाल में सर्वाइकल कैंसर के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2019 में 217 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए केस सामने आए हैं। नए और पुराने केस मिलाकर मरीजों की संख्या 1433 दर्ज की गई। कैंसर से पीड़ित मिलने वाले मरीजों में आयु वर्ग 35 से 80 वर्ष के अधिक हैं।

महिलाएं समय-समय पर जांच नहीं करातीं, इसलिए मामले बढ़ रहे

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के केस में इजाफा होने की प्रमुख वजह समय पर पता न चलना है। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं समय-समय पर जांच कराती रहें, ताकि यदि कैंसर के लक्षण मिलते भी हैं तो उनका फौरन इलाज शुरू हो सके। अब अस्पतालों में आने वाले कैंसर पीड़ित मरीजों का रिकार्ड एकत्रित किया जा रहा है।

धीरे-धीरे पूर्ण विकसित होता है सर्वाइकल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स की लाइनिंग, यानी यूटरस के निचले हिस्से को प्रभावित करता है। सर्विक्स की लाइनिंग में दो तरह की कोशिकाएं होती हैं- स्क्वैमस या फ्लैट कोशिकाएं और स्तंभ कोशिकाएं। गर्भाशय ग्रीवा के क्षेत्र में जहां एक सेल दूसरे प्रकार के सेल में परिवर्तित होता है, उसे स्क्वेमो-कॉलमर जंक्शन कहा जाता है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां कैंसर के विकास की सबसे अधिक संभावना रहती है। गर्भाशय-ग्रीवा का कैंसर धीरे-धीरे पूर्ण विकसित हो जाता है।

भारत में केवल दस फीसदी महिलाओं की स्क्रीनिंग

भोपाल सहित पूरे भारत में गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) कैंसर की स्क्रीनिंग केवल दस फीसदी महिलाओं की होती है। भारत की बात करें तो यहां महिलाओं में जागरूकता का अभाव है। दूसरी तरफ विदेशों में यह आंकड़ा 80 फीसदी है। ऐसे में इसके लिए मैकेनिज्म बनाने की आवश्यकता है। जिन महिलाओं के माहवारी के बाद अनियमित ब्लीडिंग होती है, उनको पेपस्मीयर या वीआईए टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल करना चाहिए

पश्चिमी देशों में सर्विक्स कैंसर के लिए लगने वाले टीके को राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया है। ऐसे में वहां पर महिलाओं में इस बीमारी का खतरा कम होता है। हमार देश में भी यह टीका 18 साल की उम्र में लगाना अनिवार्य करना चाहिए। सर्विक्स कैंसर के लिए वैक्सीन काे भारत में टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि तमिलनाडु के दो जिलों में एएनएम से महिलाओं में बीमारी जांचने के लिए शुगर, बीपी, ब्रेस्ट कैंसर विनेगर (सिरका) टेस्ट (वीआईए) के माध्यम से जांच करवाई जा रही है। इससे प्री इवेजिन स्टेज में बच्चेदानी के मुंह के इस कैंसर का पता जल्दी चल जाता है। मप्र में भी इसके लिए शिविर लगाना चाहिए, ताकि महिलाएं जागरूक हो सकें।

देश के प्रत्येक राज्य में महिलाओं को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। महिलाएं जागरूक होंगी तो वे अपने स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर करवाएंगी। इसका लाभ यह मिलेगा कि कोई भी बीमारी हो उसका प्रारंभिक स्तर पर पता चलेगा और इलाज भी जल्दी होगा।