अनुष्का शर्मा की बिटिया का बर्थडे कितना सही:क्रिकेटर विराट कोहली की बेटी वामिका के जन्मदिन जैसा सेलिब्रेशन आप भी चाहेंगे क्या

9 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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जनवरी 11 को एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने अपनी बेटी का पहला बर्थडे दक्षिण अफ्रीका में मनाया। क्रिकेटर पति विराट कोहली और अनुष्का ने वामिका यह जन्मदिन बायो-बबल में सेलिब्रेट किया । इसके पहले क्रिकेटर आरअश्विन की पत्नी कीर्ति ने भी पति के बायो-बबल बर्थडे पर शुभकामनाएं भेजी थी। बायो-बबल में एंजॉय करने का यह ट्रेंड कितना सही है।

किस तरह बनाया जाता है बायो-बबल
कोविड-19 के रिस्क को कम करने के लिए बायो-बबल का विचार लाया गया। उजाला सिग्निस ग्रुप ऑफ हाॅस्पिटल्स के फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. शुचिन बजाज के अनुसार, " बायो-बबल एक ऐसा अभासी घेरा होता है, जिसके अंदर कोरोना के संक्रमण की आशंका नहीं होती। इसे ‘बायो-सेक्योर-बबल’ के नाम से भी जानते हैं।
इस बबल का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उसके अंदर मौजूद सभी का कोरोना टेस्ट नेगेटिव रहा हो। इस बबल के अंदर मौजूद लोगों का आपसी व दूसरों लोगों से संपर्क न के बराबर या सीमित रखा जाता है, ताकि संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सके।"

आरअश्विन की पत्नी ने बायो-बबल बर्थडे मना रहे पति को सोशल मीडिया पर बधाई दी।
आरअश्विन की पत्नी ने बायो-बबल बर्थडे मना रहे पति को सोशल मीडिया पर बधाई दी।

आईपीएल और टोक्यो ओलिंपिक के दौरान चर्चा मे रहा यह शब्द
क्रिकेट खिलाड़ियों और उनके स्टाफ्स को कोरोना वायरस से बचाने के दौरान यह शब्द खूब पॉपुलर हुआ। साल 2020 में टोक्यो ओलिंपिक में बनाए गए बायो-बबल की पूरी विश्व में सराहना की गई। हालांकि बायो-बबल के बावजूद संक्रमण की आशंका को डॉक्टर पूरी तरह से खारिज नहीं करते हैं। डॉ. शुचिन बजाज का मानना है कि बायो-बबल में ड्रॉपलेट स्प्रेड ( बातचीत, खांसने और छींकने के दौरान निकली बूंदों से वायरस का प्रसार ) से तो बचा जा सकता है लेकिन एयरोसोल स्प्रेड (हवा में घुल चुकी अतिसूक्ष्म बूंदों में मौजूद वायरस ) से इनकार नहीं किया जा सकता।

टोक्यो ओलिंपिक के दौरान बायो-सेक्योर-बबल कंसेप्ट खूब चर्चा में रहा।
टोक्यो ओलिंपिक के दौरान बायो-सेक्योर-बबल कंसेप्ट खूब चर्चा में रहा।

स्कूल खुलने के दौरान भी शुरू हुई थी चर्चा
लॉकडाउन के बाद नवंबर महीने में केरल में स्कूल खुलने के दौरान बायो-बबल शब्द की खूब चर्चा हुई। उस समय जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार स्कूलों में इस तरह का सुरक्षित घेरा बनाने की बात की गई। हर क्लास को अपना बायो-बबल बनाने को कहा गया।
हर बबल ग्रूप में 8-10 स्टूडेंट्स तक ही सीमित रखने की बात हुई । साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि हर क्लास में ऐसे 2 से 3 समूह ही बनाए जाए। इस बात का भी ध्यान रखने को कहा गया कि एक ही क्लास के अलग-अलग बबल ग्रुप के बच्चे आपस में घुले-मिले नहीं।

बायो-बबल में भी खतरे की आशंकाा को नकारा नहीं जा सकता है।
बायो-बबल में भी खतरे की आशंकाा को नकारा नहीं जा सकता है।

बायो-सेक्योर-बबल कितना सही और सफल
इस तरह का बायो-बबल तभी सफल हो सकता है जब लोगों की संख्या सीमित हो। कोविड नेगेटिव के टेस्ट के साथ सीमित संख्या में इस तरह का बर्थडे किया जा सकता है लेकिन संक्रमण को नकारा नहीं जा सकता। दूसरा, बड़ी संख्या में बच्चों और किशोर को अभी भी टीका नहीं लगा है।
ऐसे में ये वायरस के कैरिअर हो सकते हैं। इस बार ओमिक्रोन का असर बच्चों पर भी देखा जा रहा है। इसलिए बायो-बबल के अंदर मनाए जाने वाले बर्थडे को पूरी तरह सेफ नहीं माना जा सकता।