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वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे:120 साल पहले डॉक्टर ने एक महिला से उसका नाम पूछा तब दुनिया के सामने आई थी यह बीमारी, आज महिलाएं ही ज्यादा हैं इसकी शिकार

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
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  • पहले डिजीज ऑफ फॉरगेटफुलनेस के नाम से जानी जाती थी यह बीमारी
  • मनोचिकित्सक डॉ. एलोइस अल्जाइमर के नाम पर पड़ा इस बीमारी का नाम
  • बेहतर खानपान और देखभाल से थामी जा सकती है इसकी रफ्तार

तुम्हारा नाम क्या है? आगस्टे। परिवार का नाम? आगस्टे। पति का नाम? मुझे लगता है कि आगस्टे...। दरअसल, यह बातचीत एक डॉक्टर और मरीज के बीच 120 साल पहले की है। 25 नवंबर, 1901 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट के एक अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ. एलोइस अल्जाइमर के पास एक जर्मन महिला आगस्टे डिटेर इलाज के लिए पहुंची थीं। आगस्टे उन दिनों तेजी से भूलने की गिरफ्त में थीं। हर सवाल पर उनका बस एक ही जवाब था...आगस्टे। दरअसल, यह बीमारी थी अल्जाइमर, जो बरसों तक दुनिया के लिए अबूझ पहेली बनी रही। वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे के अवसर पर आज हम आपको इस बीमारी और इसकी गंभीरता से रूबरू कराएंगे। चूंकि आगस्टे के लक्षण दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला था, इसलिए डॉक्टर ने इस बातचीत का रिकॉर्ड रखा। डाॅ. अल्जाइमर ने इस नई बीमारी को नाम दिया डिजीज ऑफ फॉरगेटफुलनेस। बाद में डॉक्टर अल्जाइमर के नाम पर ही इस बीमारी का नाम अल्जाइमर रख दिया गया। कई रिसर्च में इस बीमारी को महिलाओं की भी बीमारी कहा जाता है, क्योंकि यह पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। डॉ. अल्जाइमर के बाद पहली बार इस बीमारी को बाकायदा तवज्जो दिलाई डॉ. एमिल क्रेपलिन ने। प्राचीन यूनान या आज के ग्रीस में रोमन दार्शनिकों और वैज्ञानिकों में पहले-पहल डिमेंशिया की शिकायत की जानकारी सामने आई थी।

आखिर अल्जाइमर है क्या बला, जिसका पता चलता है 20 साल बाद
दरअसल, अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें ब्रेन सिकुड़ जाता है और उसकी कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स धीरे-धीरे मरने लगते हैं। न्यूरॉन्स के जरिए ही हम शारीरिक जरूरतों और हाव-भाव व सोच-समझ को जाहिर कर पाते हैं। बीमारी होने के बाद सोचने-समझने की क्षमता घटती जाती है। मरीज के बर्ताव में बदलाव आते हैं और आखिर में वह खुद से कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति समय और जगह में तालमेल नहीं बिठा पाता। इसका अक्सर 20 साल बाद तब पता चलता है, जब मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी रहती है।

शुरुआत डिमेंशिया से, बीमारी की वजह अब भी एक रहस्य
अल्जाइमर की शुरुआत डिमेंशिया से होती है, जिसे मेमोरी लॉस कहा जाता है। इसके पीछे वजह तो अभी तक पूरी तरह नहीं मालूम चल पाई है, मगर कुछ रिसर्च में खास तरह की प्रोटीन, या फिर सिर में चोट या कोई जीन डिसऑर्डर को भी मानते हैं। अगर आप अपनों के नाम-पते और फोन डायल करने का तरीका भूल जाएं या अपने घर का रास्ता याद न रहे, तो यह बीमारी आपका भुलक्कड़पन या लापरवाही ही नहीं, बल्कि अल्जाइमर भी हो सकती है। वैसे तो यह अमूमन 65 साल की उम्र में होती है, मगर कुछ मामलों में इस उम्र से पहले भी केस सामने आए हैं।

क्यों कहते हैं इसे महिलाओं की बीमारी, दुनिया में नहीं है इलाज

अल्जाइमर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ज्यादा असर करता है। इसके पीछे कुछ रिसर्चर महिलाओं की ज्यादा उम्र को तो कुछ उनमें खास तरह के जीन को जिम्मेदार मानते हैं। दुनिया भर में डिमेंशिया की वजह से होने वाली कुल मौतों में से 65 फीसदी महिलाओं की है। वहीं, डिमेंशिया के चलते दिव्यांगता के शिकार लोगों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं 60 फीसदी ज्यादा हैं। इसके अलावा अल्जाइमर से पीड़ित महिलाओं की देखभाल भी कम ही होती है। इसीलिए इसे महिलाओं की बीमारी भी कहा जाता है। पूरी दुनिया में इस बीमारी का सही इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इस बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है, मगर बेहतर खानपान और देखभाल से इसकी रफ्तार थामी जा सकती है।

हर 5वींं महिला को हो जाती है यह बीमारी, पुुरुषों में हर 11 में से एक को ही
सेंसस के आंकड़ों के मुताबिक, 65 की उम्र में हर पांचवीं महिला को यह बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, पुरुषों में इसी उम्र में इसकी आशंका कम होती है। महिलाओं के मुकाबले हर 11वें पुरुष में यह बीमारी होने की आशंका होती है। यह बीमारी 65 से ऊपर आयु वर्ग के लोगों में तेजी से घर करती है और एक-दो साल ध्यान न देने पर बढ़कर दो या तीन गुनी हो जाती है। तब इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। डॉ. अल्जाइमर ने भी आगस्टे के बर्ताव की जांच में पाया कि वह न तो वक्त और न ही जगह के बारे में तय कर पा रही थी। कुछ सहमी, अविश्वास और चिड़चिड़ेपन के साथ वह सवालों के जवाब दे रही थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति रीगन और फिल्म ब्लैक में अमिताभ को थी यह बीमारी
अमेरिकी राष्ट्रपति रोनॉल्ड रीगन समेत अमेरिका की कई हस्तियों में अल्जाइमर की बीमारी थी। कहा तो यह भी जाता है कि मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को भी यह बीमारी थी। बॉलीवुड फिल्म ब्लैक के जरिए इस बीमारी की गंभीरता को दिखाया गया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन को यह बीमारी थी, जिसमें शुरुआत में याददाश्त में कमी होने लगती है। बाद में वह सब कुछ भूलने लगते है, यहां तक कि खुद को भी वह भूल जाते हैं। आखिर में वह अपनी याददाश्त पूरी तरह खो देते हैं।

फिल्म ब्लैक में अमिताभ बच्चन को अल्जाइमर से जूझते दिखाया गया है।
फिल्म ब्लैक में अमिताभ बच्चन को अल्जाइमर से जूझते दिखाया गया है।