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महिला ने पार्टनर का किया मर्डर, सूटकेस में रखी लाश:40% कपल्स खत्म करते हैं लिव-इन रिलेशनशिप, शादी का दबाव और इनकार बना सकता है क्रिमिनल

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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प्यार दिल को जोड़ता है तो नफरत दिलों को तोड़ती है। लेकिन अगर दोनों बेइंतहा हो तो इंसान सारी हदें पार कर देता है। जिससे शिद्दत से प्यार होता है, उससे नफरत भी हो सकती है। और जब मोहब्बत में इनकार सुनना बर्दाश्त न हो तो मर्डर तक हो सकता है।

हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया। उसने अपने लिव-इन पार्टनर का मर्डर कर शव को सूटकेस में रखा। मर्डर करने की वजह थी, पार्टनर का शादी से इनकार। महिला ने अपना जुर्म कबूल किया है।

4 साल से लिव-इन में रह रहे थे

प्रीति और फिरोज गाजियाबाद के एक फ्लैट में पिछले 4 साल से रह रहे थे। प्रीति लगातार उससे शादी करने का बोल रही थी लेकिन फिरोज इनकार कर रहा था। इस बात पर दोनों की लगातार लड़ाई हो रही थी। 6 अगस्त की दोपहर को उनकी फिर लड़ाई हुई तो प्रीति ने गुस्से में उस्तरे से फिरोज का गला काट दिया और उसका शव 24 घंटे तक फ्लैट में रखा।

बॉडी को बाहर फेंकने के लिए उसने शव को सूटकेट में पैक किया। वह गाजियाबाद रेलवे स्टेशन जाने के लिए अपने फ्लैट के नीचे ऑटो का इंतजार कर रही थी तभी वहां पुलिस आ गई। पुलिस को देख वह घबरा गई, इससे उन्हें महिला पर शक हुआ और इसके बाद इस घटना का खुलासा हुआ।

महिला ने बताया कि वह शादीशुदा थी लेकिन पति से नहीं बनी तो उसने छोड़ दिया। फिरोज ने महिला के कैरेक्टर पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह अपने पति की वफादार नहीं हुई तो उसकी क्या होगी।

लोग आकर्षण को समझते हैं प्यार

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉक्टर राजीव मेहता ने वुमन भास्कर को बताया कि आजकल लोग आकर्षण को प्यार समझते हैं।

इंसान का रंग-रूप देखकर कभी प्यार नहीं हो सकता है। जब इंसान को हासिल कर संतुष्टि मिल जाती है तब आकर्षण खत्म हो जाता है। ऐसा होते ही पार्टनर में कमियां नजर आने लगती हैं।

इससे रिश्ता या तो टूटता है या बदले की भावना इंसान को क्रिमिनल बना देती है।

लिव-इन रिलेशन को एक्सपेरिमेंट समझते हैं लोग

अब समाज बदल रहा है। बचपन से ही बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जाता है। लेकिन रिश्तों कैसे निभाए जाएं, यह कोई नहीं बताता। वहीं, सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटीज के रिलेशनशिप को देखकर लोग लिव-इन में रहने लगते हैं।

जैसे ही शादी या दूसरी जिम्मेदारी की बात आती हैं तो लोग बचते हैं। कुछ लोग तो शादी के नाम से ही डरते हैं। वहीं, कुछ को जिंदगी में एडवेंचर चाहिए लेकिन वह दिल से उस इंसान से नहीं जुड़ते।

जब वह उस शख्स से अपनी शारीरिक संतुष्टि पूरी कर लेते हैं तो रिश्ता खत्म करने की सोचते हैं। इसके अलावा कुछ लोग रिश्तों में एक्सपेरिमेंट करते हैं। लिव-इन रिलेशन भले ही लीगल है लेकिन लोग इसे प्रयोग की तरह देखते हैं। कपल साथ रहकर देखते हैं कि उनकी बन पाएगी या नहीं। अगर नहीं बनती तो रिश्ता खत्म भी कर देते हैं।

लोगों में न सुनने की आदत नहीं

आज के युवाओं को हर चीज अपने मन मुताबिक चाहिए। इसमें पेरेंटिग का भी रोल होता है। बचपन से ही बच्चे के रोने पर माता-पिता उसकी सारी बातें मानते हैं। ऐसे में बच्चे को असफलता, रिजेक्शन और ना सुनने की आदत नहीं होती।

जब लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर शादी करने से इनकार कर देता है तब कुछ लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर पाते और गुस्से में कोई भी कदम उठा सकते हैं।

महिला ही नहीं पुरुषों के कैरेक्टर पर भी उठते हैं सवाल

डॉ.राजीव ने बताया कि जो कपल्स लिव-इन रिलेशन में रहे होते हैं उनके मन में एक-दूसरे के कैरेक्टर को लेकर पहले ही सवाल होते हैं। यानी अंगुली सिर्फ महिलाओं पर ही नहीं पुरुषों के कैरेक्टर पर भी उठाई जाती है। दरअसल कानून इस रिश्ते को लीगल मानता है लेकिन समाज ने इसे अभी भी नहीं अपनाया है। जो लोग लिव-इन रिलेशन में रहते हैं, वह भी इस समाज का हिस्सा हैं। वह चोरी-छुपे ऐसा कर रहे हैं। इसलिए उनके दिमाग में भी पार्टनर का कैरेक्टर अच्छा नहीं होता है।

वह सोचते हैं कि जब दूसरा इंसान उनके साथ बिना रिश्ते के भावनात्मक और शारीरिक संबंध बना सकता है तो वह ऐसा किसी के साथ भी कर सकता है। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं।

1- अगर पार्टनर डिलूजन ऑफ इंफेडिलिटी का शिकार है तो वह कैरेक्टर पर शक कर सकता है। यह एक मानसिक रोग है। इसमें व्यक्ति भ्रम में जीता है। उसे लगता है कि उनके पार्टनर का किसी और के साथ अफेयर है।

2- जब पार्टनर से मन भर जाता है तो अक्सर लोग उससे पीछा छुड़वाने के लिए या नए पार्टनर की तलाश में दूसरे के कैरेक्टर पर अंगुली उठाने लगते हैं।

प्यार और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू

प्यार और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। लेकिन दोनों एक ही हार्मोन के कारण होती है। रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. गीतांजलि शर्मा के अनुसार यह हार्मोन ऑक्सीटोसिन होता है।

जब इंसान को प्यार, हमदर्दी और पार्टनर का स्पर्श मिलता है तो यह लव हार्मोन बनता है। वहीं, जब आप किसी को नापसंद करते हैं तो ऑक्सीटोसिन ‘हेट’ हार्मोन में बदल जाता है। प्यार को खोने का डर और नफरत इंसान से कुछ भी करा सकती है।

80% लोगों ने किया लिव-इन रिलेशन को सपोर्ट

साल 2018 में इनशॉट्स नाम की ऐप ने लिव-इन रिलेशनशिप पर सर्वे किया था। इसमें 80% लोगों ने इसे रिश्ते को सपोर्ट किया।

लेकिन 26% ने ही लिव-इन में रहने की बात को कबूल किया। 47% लोगों ने शादी को बेहतर बताया। 45% ने कहा कि लिव-इन एक तरह का कम्पैटिबिलिटी टेस्ट बताया।

10 में से 1 कपल ने 4-6 महीने में रिश्ता तोड़ा

16 देशों में एक स्टडी हुई। इसमें सामने आया कि सबसे ज्यादा 70% स्वीडन के लोग लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। 40% कपल्स इस रिश्ते को एक टाइम के बाद तोड़ देते हैं। वहीं , 10% लोग सारी जिंदगी बिना शादी के पार्टनर के साथ रहना पसंद करते हैं।

गुड मूव की स्टडी के अनुसार हर 10 में से 1 कपल ने 4-6 महीने साथ रहने के बाद रिश्ता तोड़ा। 8% कपल ने 3 महीने से भी कम समय में लिव-इन रिलेशन को खत्म किया।