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3 लाख का चाकू, बाल भी चीर दे:480 परतों वाला जर्मन नाइफ हर शेफ की पहली पसंद, जापानी चाकू भी पॉपुलर

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: संजीव कुमार
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चाकू…है बड़े काम की चीज। किचन में चाकू न हो तो सब्जी कैसे कटेगी? खाना बनाने का काम रुक जाएगा। कई बार सेल्फ डिफेंस के लिए भी चाकू काम आता है तो कभी छोटे बच्चों को सोते समय बुरे सपने न आएं इसलिए कुछ लोग बच्चे के तकिए के नीचे चाकू रखते हैं। दुनिया की प्रतिष्ठित मैगजीन फोर्ब्स ने भी चाकू को सबसे महत्वपूर्ण औजार मानते हुए कहा है कि चाकू ने हर दौर में मानव सभ्यता पर अपनी छाप छोड़ी है।

तो आइए-’फुरसत का रविवार’ में चाय पीते हुए चाकू पर चर्चा करते हैं। चाकू वक्त के साथ और धारदार होता गया। ये कहने को हथियार है, लेकिन रसोई में औजार है। भले ही किचन में श्रेडर और पीलर या जंग के मैदान में AK-47 आ गई हों, लेकिन चाकू अपनी जगह मजबूती से बरकरार है। चाकू का इस्तेमाल पेट भरने और कभी पेट फाड़ने के लिए होता रहा है। आए दिन ये खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि किसी ने चाकू मारकर किसी की जान ले ली।

25 लाख साल से इस्तेमाल हो रहा है चाकू

करीब 25 साल पहले इथियोपिया की गोना घाटी में 25 लाख वर्ष पुराने चाकूनुमा औजारों के अवशेष मिले थे। इस तरह की खोज उस जमाने में चाकू की अहमियत को बताती है जब इंसान पत्थरों के बीच रहता, उनसे खेलता और उनके जरिए ही भोजन जुटाता था। उस दौर के छोटे पत्थर से बने ब्लेड्स (Blades) से लेकर आज स्टील से बनी छुरी, तलवार तक चाकू ने कई पड़ावों को पार किया।

पत्थर से बने छोटे क्लीवर और स्क्रेपर, कांसे और तांबे से बने चाकू की जगह अब लोहे से बने खंजर, कटार और स्टील से बने चाकू दुनिया भर में काम में लाए जाते हैं।

दुनिया का सबसे महंगा और तेज चाकू, जिसकी धार ऐसी कि बाल भी चीर दे

पुराने जमाने में सीरिया के लोहारों का चाकू और तलवार बनाने के मामले में कोई सानी नहीं था। इन्हीं के तरीके को समझते हुए एक जर्मन लोहार लार्स शाइडलर (Lars Scheidler) ने दुनिया का सबसे तेज चाकू बनाया।

शाइडलर ने अपने साथियों की मदद से चाकू बनाने के लिए कई परतों से बनी प्लेट को चपटा कर 30 सेंटीमीटर तक की लंबाई की और फिर चमकते स्टील को एक दूसरे के ऊपर चढ़ाया। इसके बाद 480 परतें बनने तक ऐसा ही किया।

इस तरह से शाइडलर ने सबसे तेज धार वाला और सबसे महंगा चाकू बनाया। शाइडलर के बनाए एक चाकू की कीमत 4 हजार यूरो यानी करीब तीन लाख रुपए है। इसकी धार 1 मिलीमीटर के हजारवें हिस्से जितनी बारीक है। इतनी पतली कि इंसान के बाल को भी दो हिस्सों में चीर सकती है।

चाकू एक औजार भी है और हथियार भी। फोर्ब्स डॉट कॉम ने कुछ साल पहले एक ऐसी लिस्ट बनाई थी जिसमें मानव सभ्यता के दौरान सदाबहार औजारों को रैंकिंग मिली। जानिए ऐसे औजारों को इस ग्राफिक के जरिए-

जापानी चाकू इतने फेमस कि 80 हजार में भी खरीदने को तैयार शेफ

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार जापानी शेफ के चाकू अपनी यूनीक डिजाइन और तेज धार की वजह से काफी लोकप्रिय हैं। यहां कई तरह के चाकू बनाए जाते हैं और शार्प ब्लेड की वजह से इन्हें पसंद किया जाता है।

जापान के चाकू इतने फेमस हैं कि देश के टॉप रेस्टोरेंट्स में जापान के चाकुओं का ही इस्तेमाल होता है, जिनमें Le Bernardin भी शामिल है।

इन चाकुओं में धार के साथ चाकू की ब्लेड पर किए जाने वाला डिजाइन भी काफी लोकप्रिय है और इसे बनाने में काफी टाइम भी लगता है।

इसीलिए जब भी चाकू की बात होती है तो जापान के चाकुओं का जिक्र जरूर होता है। वीडियो प्लेटफॉर्म पर जापान के चाकुओं के वीडियो भी काफी वायरल होते हैं, जिसमें वहां के शेफ उनका इस्तेमाल करते नज़र आते हैं।

वैसे जापान के शेफ जिन चाकुओं का इस्तेमाल करते हैं, वो काफी अलग और तेज धार वाले चाकू होते हैं, जिनसे काफी महीन चीजें आसानी से काटी जा सकती हैं।

वैसे तो जापानी चाकू की कीमत हर प्रोडक्ट के आधार पर तय की जाती है। यह उसके डिजाइन और ड्यूरेबिलिटी पर भी निर्भर करता है। ऐसे चाकू के लिए लोग 80 हजार रुपए भी आसानी से चुकाते हैं।

जब शेफ की बात चल ही गई है तो जानते हैं किचन और खाने की टेबल में किस तरह के चाकुओं का इस्तेमाल आजकल किया जाता है-

चाकू बनाने की कारीगरी

मेटल को गर्म करने और हथौड़े से मार मारकर उसे चाकू बनाकर उसमें धार लगाने और यूनीक डिजाइन देने का प्रोसेस काफी लंबा होता है। यह खास टैलेंट है, जो जापान का हर कारीगर जीवन भर सीखता है। कई कारीगर तो कई साल से चाकू बना रहे हैं। ये चाकू एक दो साल नहीं बल्कि कई पीढ़ियों तक काम में लिए जाते हैं और लोग बस इसमें धार लगवाकर इस्तेमाल करते रहते हैं।

अगर यूरोप के शेफ के चाकू से जापानी चाकू की तुलना करें तो जारावी ब्लेड हल्के और तेज होते हैं, जिससे कोई भी चीज अच्छे से काटी जा सकती है।

इनके ब्लेड्स भी काफी महंगे होते हैं और डिजाइन के साथ बना होने पर इनकी कीमत और बढ़ जाती है। इसमें मटेरियल, हैमरिंग और ग्रांइंडिंग का खास काम होता है, जिसकी वजह से इन चाकुओं की डिमांड रहती है।

जापानी चाकुओं को टक्कर देते हैं जर्मन चाकू, यूरोप में यही पॉपुलर

रसाेई के लिए जापान और जर्मनी में बने चाकू दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि शेफ की पहली पसंद जापानी चाकू ही रहे हैं। आमतौर पर जापानी चाकुओं की लोकप्रियता पूरे एशिया में है। जबकि जर्मन चाकू पश्चिमी तौर तरीकों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने की वजह से यूरोप और अमेरिका में ज्यादा पॉपुलर हैं।

घरेलू रसोई में उपयोग किए जाने वाले कई चाकू हैं जैसे- ऑल-पर्पज यूटिलिटी नाइफ, शेफ नाइफ, पैरिंग नाइफ आदि। जरूरी नहीं है कि ये सब चाकू आपके किचन में हों, लेकिन आपके पास कम से कम एक ऐसा चाकू होना चाहिए जिसका उपयोग आप बिना किसी जोखिम के कर सकें।

प्रोफेशन हो या फिर ट्रैवलिंग, कुछ खास कामों के लिए चाकू भी खास होते हैं जिनका इस्तेमाल करने वाले विशेष नाम से जाने जाते हैं, जानिए इस ग्राफिक से-

चाकू खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

चाकू के हत्थे की ग्रिप यानी पकड़ की है बहुत अहमियत

चाकू में दो खास चीजें रहती हैं- ब्लेड और हैंडल। जब आप चाकू सेट खरीद रहे हों तो इसकी पकड़ (ग्रिप) को परखना न भूलें। हर चाकू की ग्रिप अलग-अलग होती है और उसका उपयोग सही ढंग से हो पाएगा या नहीं, इसकी रोजमर्रा के खाना बनाने के काम में बड़ी अहमियत है।

अगर आपको चाकू का हत्था (मूंठ) पसंद नहीं है तो आपके पास इसे वापस करने का ऑप्शन होता है। यह भी जांचना चाहिए कि जो महंगा चाकू आप खरीद रहे हैं, वो लंबे समय तक काम कर पाएगा या नहीं।

चाकू के ब्लेड को चेक करें पर कैसे?

चाकू में इस्तेमाल किए गए ब्लेड पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे अच्छा चाकू ब्लेड सिरेमिक है, क्योंकि आप इसे बार-बार तेज कर सकते हैं और इसमें जंग भी नहीं लगता। अधिकांश सस्ते आधुनिक चाकू स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं, क्योंकि सिरेमिक काफी नाजुक होता है।

चाकू रखने के लिए लकड़ी का ब्लॉक फायदेमंद

चाकू को सेफ रखने के लिए और उसकी धार खराब नहीं हो इसके लिए उसे लकड़ी के ब्लॉक में रखें। इससे चाकू का बैलेंस बना रहता है और ब्लेड टेढ़ा नहीं होता। इनमें रखे जाने वाले चाकू थोड़ा वजनी होते हैं, ताकि उसे अच्छे से पकड़ा जा सके और उसका बैलेंस भी सही रहे।

चाकू सेट वुडन ब्लॉक उन लोगों के लिए अधिक उपयुक्त है जो खाना बनाने का शौक रखते हैं।
चाकू सेट वुडन ब्लॉक उन लोगों के लिए अधिक उपयुक्त है जो खाना बनाने का शौक रखते हैं।

अगर आप कभी-कभी खाना बनाते हैं तो आप केवल 8 इंच वाले फ्लेयर शेफ नाइफ से काम चला सकते हैं। यह चौड़े ब्लेड का शेफ नाइफ होता है। इसका ब्लेड स्टेनलेस स्टील का होता है और गाढ़े हरे रंग का हैंडल लगा रहता है। शेफ नाइफ के ब्लेड की धार को तेज बनाए रखने के लिए शार्पनर नाइफ भी लिया जा सकता है।

चाकू-छुरी की बात हो और फिल्मों का जिक्र न किया जाए यह तो हो ही नहीं सकता। हिंदी सिनेमा में चाकू को लेकर फिल्में और गाने बने तो हॉलीवुड में तमाम फिल्मी टाइटल ही नाइफ से रखे गए हैं, देखिए इस ग्राफिक में

अब बात करते हैं किचन में इस्तेमाल होने वाले कई खास चाकुओं के बारे में

शेफ नाइफ या बावर्ची चाकू

शेफ नाइफ या बावर्ची चाकू निश्चित रूप से सबसे पॉपुलर हैं। इस चाकू में एक चौड़ी ब्लेड होती है जो ऊपर की ओर चलती है।

इनका अलग-अलग आकार सब्जी को तेजी से काटने में मदद करता है। एक बावर्ची चाकू लगभग 6-12 इंच लंबा होता है और इसे सही चॉपिंग और स्पीड के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे मल्टीपर्पज चाकू कहते हैं, क्योंकि, इससे आप गाजर, हरी मिर्च या प्याज-लहसुन कुछ भी बारीक काट सकते हैं।

यूटिलिटी चाकू

यूटिलिटी चाकू लगभग 4 से 7 इंच लंबा होता है। आप इसे मिनी शेफ नाइफ भी कह सकते हैं। इस तरह के चाकुओं में ऊपर की ओर एक पतला ब्लेड होता है और वे सब्जियों को काटने के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। ये चाकू लचीले होते हैं और कुछ भी काटने के लिए सटीक होते हैं।

संतोकू चाकू

सबसे अच्छे रसोई के चाकू में से एक है संतोकू चाकू जो बावर्ची चाकू का जापानी रूप है। यह खाना बनाने में तीन तरह से काम करता है-सब्जी काटना, उसके टुकड़े करना और या फिर उनमें फिलिंग के लिए जगह बनाना। यह भी मल्टीपर्पज नाइफ है, जो बावर्ची चाकुओं से छोटे और पतले हैं। आप इन्हें सब्जी और मीट को काटने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

किचन क्लीवर

बहुत कम लोग हैं जो घरेलू रसोई में क्लीवर इस्तेेमाल करते हैं। ये रसोई में सबसे वजनी चाकू हैं, लेकिन ये चाकू एक प्रोफेशनल किचन में ज्यादा इस्तेमाल होता है। इस चाकू की ब्लेड मजबूत और उसका ऊपरी हिस्सा चौड़ा होता है। आप इन चाकुओं को मीट की चॉपिंग में इस्तेमाल किया जाता है।

यह तो रही चाकू के किचन में शहंशाह बनने की बात, अब चाकू के खतरनाक पहलू पर भी एक नजर डाल लेते हैं।

दुनिया के 22 फीसदी क्राइम में चाकू का इस्तेमाल

यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑफ ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC) की 2019 में होमिसाइड यानी मानव हत्या पर जारी एक ग्लोबल स्टडी में पाया गया है कि साल 2017 में 97,183 मानव हत्या में अपराधियों की पहली पसंद चाकू था।

यह आंकड़ा विश्व में हुए कुल मानव हत्या का 22 फीसदी है।इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका में कुल मानव हत्याओं का 76 फीसदी फायर आर्म से हुआ तो 20 फीसदी से थोड़ा कम मानव हत्याओं में किसी न किसी तरह के चाकू का इस्तेमाल किया गया। जबकि यूरोप में इसका उल्टा देखने को मिला है।

यहां 20 फीसदी मानव हत्याओं में बंदूकों का इस्तेमाल हुआ तो वहीं करीब 40 फीसदी इंसानी जानें चाकू के जरिए ली गईं। इस रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि चाकू से होने वाले क्राइम दुनिया के हर देश में किए जाते हैं भले ही वह कितना भी सुरक्षित क्यों न माना जाता हो। हालांकि, चाकू से किए जाने वाले अपराधों की संख्या में क्षेत्र के अनुसार कमी बेशी हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र ने 16 ऐसे देशों की लिस्ट तैयार की है जहां चाकू या फिर धारदार हथियार से सबसे ज्यादा क्राइम किए जाते हैं। (ये आंकड़े 2013-16 के बीच के हैं।)

खेल में भी चाकू की अहमियत, 68 साल की रूसी महिला बन चुकी हैं कई बार वर्ल्ड चैंपियन

दुनिया में चाकू जितना पुराना होता गया उसके साथ-साथ कई तरह की चीजें भी जुड़ती चली गईं। चाकू का खेल भी कई समाजों में प्रचलित हो गया। चाकू से जुड़े खेल में चाकू फेंक कर निशाना लगाना और नाइफ फिंगर्स गेम ज्यादा लोकप्रिय होता चला गया। चाकू फेंककर निशाना लगाना ऐसा गेम रहा है जिममें हाथ से चाकू उसी तरह फेंककर निशाना लगाया जाता है जिस तरह से बंदूक का बटन दबाकर गोली निशाने पर लगाई जाती है।

दो साल पहले की बात है जब इसी खेल के जरिए 68 साल की एक रूसी महिला गेलिना चूविना वर्ल्ड चैंपियन बनी थी।

2013 में गेलिना ने यूरोपियन नाइफ एंड एक्स थ्रोइंग चैम्पियनशिप जीती। वह अब तक 50 मेडल जीत चुकी हैं।
2013 में गेलिना ने यूरोपियन नाइफ एंड एक्स थ्रोइंग चैम्पियनशिप जीती। वह अब तक 50 मेडल जीत चुकी हैं।

गेलिना रशिया के छोटे से कस्बे सासोवो में रहती हैं और चाकू-छूरी चलाना इनकी हॉबी है। चाकू-छूरी से खेलना और निशाना लगाना इन्हें इतना पसंद है कि आठ बार चैम्पियन रह चुकी हैं। वह नेशनल, यूरोपियन और वर्ल्ड लेवल की चैम्पियनशिप जीत चुकी हैं। वह अब तक 50 मेडल जीत चुकी हैं। उन्हें कई देशों में नेशनल प्लेयर के तौर पर देखा जाता है।

चाकू का ही दूसरा गेम ‘द नाइफ गेम’, पिनफिंगर, नर्व, बिशप, नाइफ फिंगर्स, फाइव फिंगर फिलेट (एफएफएफ), या "फिंगर गेम के बीच छुरा",जैसे नामों से जाना जाता है। यह एक ऐसा गेम है जिसमें व्यक्ति अपनी हथेली को टेबल पर फैलाकर रखता है और फिर उंगलियों के बीच में तेजी से चाकू चलाता है। इस खेल में हल्की सी भी चूक अंगुलियों और हाथ को नुकसान पहुंचा सकती है। यह खेल देखने में खतरनाक तो लगता ही है साथ ही देख रहे दर्शकों को चौंका भी देता है। मम्बल्टी-पेग या मम्बल द पेग नामक इसी तरह का खेल 17वीं सदी में इंग्लैंड में शुरू हुआ था।

भारत में चाकू से किए जाते हैं कई टोटके, नहीं आते डरावने सपने

भारतीयों में चाकू का इस्तेमाल कर टोटके भी किए जाते हैं। कई लोग मानते हैं कि किचन में चाकू को उल्टा यानी इसकी नोक नीचे करके रखनी चाहिए। इससे घर में बेवजह कलह नहीं होती और शांति बनी रहती है। इसके अलावा घर या प्लॉट नहीं बिकता है तो उसमें भी चाकू का टोटका करने को ज्योतिषाचर्य बोलते हैं। इसके लिए एक लोहे के चाकू में काला धागा बांधकर गेट पर लटकाया जाता है या फिर प्लॉट के एक कोने में दबाया जाता है।

छोटे बच्चे अक्सर नींद में चौंक कर उठ जाते हैं और तेजी से रोने लगते हैं। इसके समाधान के लिए वैदिक गुरु आचार्य अजय द्विवेदी बताते हैं कि बच्चों को सोते समय बुरे सपने आते हैं तो उनके तकिए के नीचे चाकू रखने पर इस तरह की दिक्कत से बचने में मदद मिलती है।

बुजुर्ग ये भी कहते हैं कि लाल कपड़े में बिना धार का छोटा चाकू लपेटकर बच्चे को गले में ताबीज की तरह पहना दिया जाए तो ये नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है। बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए उसकी कमर में काले धागे के साथ चाकू लटकाने का टोटका है।

घर में चाकू का इस तरह से नहीं करना चाहिए इस्तेमाल

वास्तु एक्सपर्ट आचार्य अजय द्विवेदी कहते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक बनाए रखने के लिए कभी भी बहुत ज्यादा और जंग लगे हुए चाकू का इस्तेमाल न करें। दो चाकुओं को आपस में ना टकराएं। ऐसा करने से घर में लड़ाई होती है। ये वास्तु दोष है।

रामपुरी चाकू के लिए लेना पड़ता है लाइसेंस

रामपुरी चाकू मैग्नेटिक फील्ड तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया जाता है। जैसे ही बटन दबा चाकू का धार वाला हिस्सा खटाक से बाहर निकल आता है। नाम से ही जाहिर है कि इस चाकू का ईजाद यूपी के रामपुर में हुआ। रामपुर नवाबों के दरबारी लोहारों ने रामपुरी चाकू बनाना शुरू किया था। 9 –12 इंच लंबे इस चाकू के हत्थे पर कारीगरी इसकी खासियत है। 1970-1990 के दौर की बॉलीवुड फिल्मों में भी विलेन के पास रामपुरी चाक़ू देखने को मिलता था।

1990 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्म्स एक्ट 1959 के तहत रामपुरी चाकू के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी। साथ ही उसकी लंबाई भी 4.5 इंच तय कर दी। अब रामपुरी चाकू बनाने और रखने के लिए लाइसेंस लगता है। आज रामपुर में ये चाकू बनाने वाले मात्र दो या तीन कारीगर ही बचे हैं।

6 फीसदी की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ से बढ़ रहा दुनिया में चाकू का बाजार

ग्रैंड व्यू रिसर्च के मुताबिक, वर्ष 2021 में ग्लोबल नाइफ मार्केट 312 अरब रुपए के करीब था जिसके 2030 तक 6 फीसदी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ के साथ बढ़ने का अनुमान है।

देश में 9 इंच से बड़ा चाकू रखना अपराध, फिर भी खरीद-बिक्री पर रोक नहीं

ऑनलाइन (ई-कॉमर्स) वेबसाइटों पर चाकू धड़ल्ले से बिक रहे हैं। हाल ही में राजधानी दिल्ली में युवकों ने ऑनलाइन चाकू मंगवाकर एक बड़े अपराध को अंजाम दिया था। ऐसे में इन वेबसाइटों पर हो रही बिक्री पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। बिना किसी लाइसेंस के प्रतिबंधित चाकू और तलवारें कई बड़ी-छोटी वेबसाइट होम डिलीवरी कर रही हैं।

बटन चाकू, ट्रेकिंग और कैंपिंग चाकू, शिकार चाकू, जीवन रक्षा चाकू, सेल्फ डिफेंस चाकू, चाकू शार्पनर, स्प्रिंग चाकू सहित अन्य नामों से चाकू बिक रहे हैं। जिनकी कीमत 500 से लेकर 10 हजार तक है। साइज के लिए भी कोई पाबंदी नहीं है। पांच इंच से लेकर 20 इंच तक के चाकू की बिक्री हो रही।

कुछ साल पहले छोटी दुकानों में अपराधियों को चाकू मिल जाता था, लेकिन पुलिस की छापामार कार्रवाई ने दुकानों पर ताला लगा दिया। लेकिन ऑनलाइन बाजार पूरी तरह से खुला मंच है। जिस साइज की डिमांड की जाती है उसे बाकायदा घर तक पहुंचाया जा रहा। कंपनियां इससे बचने के पैंतरे भी अपना रही हैं। पैकिंग बॉक्स के ऊपर किचन का सामान या खिलौना लिख कर बेच रही है।

जानिए चाकू रखने को लेकर क्या कहता है भारत का कानून

आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 4,7 व 25 के तहत खतरनाक हथियार रखना वर्जित है। पिस्तौल, गोला-बारूद, चाकू, तलवार, कटार, भाला, कृपाण, खुखरी तथा अन्य धारदार हथियार जिसके ब्लड की लंबाई 9 इंच से अधिक हो और चौड़ाई 2 इंच से अधिक हो, बिना किसी सरकारी अनुमति के रखना एक गंभीर अपराध है। इस प्रकार के हथियार जिला अधिकारी की अनुमति से ही रखे जा सकते हैं। या अनुमति पत्र लाइसेंस कहलाता है।

इन हथियारों को रखना धारण करना बनाना बेचना या इन हथियारों की मरम्मत तथा जांच करना इस अपराध के अंतर्गत आता है और दंडनीय किए हैं।

घरेलू इस्तेमाल का चाकू इन हथियारों में नहीं आता। खेती के उपकरण वैज्ञानिक तथा औद्योगिक उद्देश्य के लिए उपकरण भी इस अपराध की परिधि में नहीं आते हैं।

आर्म्स एक्ट के तहत सब्जी काटने वाला चाकू ही रखा जा सकता है, लेकिन वह बटन चाकू नहीं होना चाहिए। नौ इंच से अगर ज्यादा साइज का है तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध का दंड कम से कम 5 वर्ष और अधिक से अधिक 10 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि आज चाकू का इंसानी जिंदगी में किस तरह से दखल है। जिस तरह से इंसानों ने अपनी उत्पत्ति के बाद से अब तक का सफर तय किया है उसी तरह चाकू के रूप, रंग, आकार और इस्तेमाल में भी कई पड़ाव आए हैं।

ग्राफिक्स: सत्यम परिडा

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