मां सब भूल चुकी थी, बेटा देखते ही पहचाना:90 साल की महिला को है डिमेंशिया, इमोशनल वीडियो वायरल

नई दिल्ली7 महीने पहले
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इंस्टाग्राम का एक वीडियो इस वक्त वायरल है। वीडियो एक 90 साल की महिला का है। महिला भूलने वाली बीमारी डिमेंशिया से पीड़ित है लेकिन इस बीमारी के बाद भी अपने बेटे को पहचान लेती हैं। दरअसल महिला का 90वां जन्मदिन था। मां का बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए बेटे ने सरप्राइज विजिट प्लान किया था। लेकिन वो खुद हैरान रह गया जब उसकी मां ने उसे पहचान लिया। इस वीडियो को गुडन्यूज कॉरेस्पोंडेंट इंस्टा हैडल से शेयर किया गया है। कैप्शन में लिखा है- 'मेरे भाई ने मां के 90वें जन्मदिन पर सरप्राइज दिया'।

बेटे को देख मां ने ऐसा क्या कहा, जो रो पड़े यूजर्स

वीडियो में दिखता है कि महिला काउच पर बैठी है, तभी दरवाजा खुलता है और एक शख्स अंदर आता है। दोनों एक-दूसरे को हाय बोलते हैं। अंदर आनेवाला शख्स महिला से पूछता है कि वो कैसी है। महिला कहती है कि वो अच्छी है। पूछने के लिए शुक्रिया। अपने अगले सवाल में वो महिला से पूछता है कि क्या वो उसे पहचान रही? जॉय, तुम मेरे जॉय हो। ये सुनते ही शख्स महिला के पास जाता है। दोनों एक-दूसरे को चूमते हैं और गले लगाते हैं। महिला कहती है- 'आई लव यू माय जॉय'। डिमेंशिया जैसी बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी मां का बेटे को पहचान लेना यूजर्स को भावुक कर गया।

दुनिया भर में पांच करोड़ लोग इस बीमारी का शिकार

डिमेंशिया अल्जाइमर का शुरुआती स्टेज होता है। इसे मेमोरी लॉस भी कहा जाता है। इस बीमारी में इंसान की याददाश्त, सोच, समझ, सीखने की क्षमता के साथ भाषा तक प्रभावित होती है। दरअसल, अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें ब्रेन सिकुड़ जाता है और उसकी कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स धीरे-धीरे मरने लगती हैं। न्यूरॉन्स के जरिए ही हम शारीरिक जरूरतों और हाव-भाव व सोच-समझ को जाहिर कर पाते हैं। बीमारी होने के बाद सोचने-समझने की क्षमता घटती जाती है। मरीज के बर्ताव में बदलाव आते हैं और आखिर में वह खुद से कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो जाता है।

अल्जाइमर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ज्यादा असर करता है। इसके पीछे कुछ रिसर्चर महिलाओं की ज्यादा उम्र को तो कुछ उनमें खास तरह के जीन को जिम्मेदार मानते हैं। दुनिया भर में डिमेंशिया की वजह से होने वाली कुल मौतों में से 65 फीसदी महिलाओं की है। वहीं, डिमेंशिया के चलते दिव्यांगता के शिकार लोगों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं 60 फीसदी ज्यादा हैं।