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फीचर आर्टिकल:एक माँ जिसने पोल्ट्री उद्योग की नींव बिछाई

9 दिन पहले
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लोगों के खान-पान की आदतें उनके स्वास्थ्य को निर्धारित करती है और उन्हें बीमारी से बचाती है। इस कोविड दौर में अधिक से अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के परिणामस्वरूप अंडे और चिकन जैसे पोषक खाद्य पदार्थों की अधिक खपत हुई है । हमारे देश में, केवल अंडा ही एक मात्र खाद्य पदार्थ है, जो विकास और स्वास्थ्य के लिए निर्धारित पोषण कम लागत में समान रूप से प्रदान करता है। एक अंडा बहुत ही सस्ते दाम पर शुद्धतम विटामिन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्रदान करता है। इसका श्रेय पद्मश्री डॉ. बंदा वासुदेव राव को जाता है, जिन्हें भारतीय पोल्ट्री उद्योग के पिता के रूप में जाना जाता है। अनेक बाधाओं का सामना करते हुए उन्होंने दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत और दृढ़ता के बल पर सफलता प्राप्त की। डॉ. बी.वी. राव की अद्भुत सफलता के पीछे उनकी पत्नी श्रीमती उत्तरा देवी का बड़ा योगदान था।

भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद के शुरुआती वर्षों में, विभिन्न कारणों से देश में गरीबी बढ़ रही थी। पौष्टिक भोजन के अभाव से लोग अनगिनत बीमारियों से पीड़ित हो रहे थे। उस समय, कुछ स्वयंसेवी संगठन और जानकार व्यक्ति ग्रामीण भारत के गाँवों में घूमकर, लोगों को अपने दैनंदिन आहार में अंडे शामिल करने की सलाह देते थे, जिससे उन्हें स्वास्थ्य के लिए आवश्यक जीवनसत्व और प्रोटीन प्रदान हो सके। उन दिनों में अंडे और चिकन बड़े ऊंचे दामों में बिकते थे। इसलिए लोगों ने अपने घरों में ही मुर्गियां पालना शुरू कर दिया और अंडों का सेवन करने लगे।

लेकिन अंडे बढ़ती लोक संख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। डॉ. बी.वी. राव द्वारा पोल्ट्री क्षेत्र में कदम रखने के बाद इस उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव आने लगे। बाजारों में मुर्गियों और अंडों की ब्रायलर किस्म बहुत कम कीमतों पर मिलने लगी, जिससे गरीब भी अंडों का सेवन करके अपने स्वास्थ्य में सुधार करने में सक्षम हुए। यह क्रांतिकारी परिवर्तन पूरी तरह से डॉ. बी.वी. राव के प्रयासों और दूर दृष्टि से प्रेरित था।

आइए हम उनकी पत्नी श्रीमती उत्तरा देवी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें जो उनकी सफलता की यात्रा में हर कदम उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी थीं।

इंजापुर से आगे का सफर

हैदराबाद स्थित डॉ. बी.वी. राव ने 1960 में अपना पशु चिकित्सा विज्ञान का कोर्स पूरा करके पुणे स्थित कंपनी आर्बर एकड़ में नौकरी कर ली। जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि वह नौकरी करने के लिए नहीं बने हैं। मुनाफा कमाने के बजाय, समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना चाहिए। व्यवसाय चलाने के लिए पर्याप्त अनुभव प्राप्त करने के लिए, वह एक अन्य पोल्ट्री ट्रेडिंग कंपनी में शामिल हो गए।

डॉ. बी.वी. राव की पत्नी श्रीमती उत्तरा देवी को दृढ़ विश्वास था कि उनके पति आगे चलकर भारतीय पोल्ट्री उद्योग के “लीडर” बन सकते है। अपने पति के मामूली वेतन में से वह हर महीने थोड़ी थोड़ी बचत करती थीं और उससे सोना खरीदती थीं, ताकि डॉ. राव के लिए उपयुक्त समय आने पर एक छोटे मुर्गी फार्म के लिए जरूरी पूंजी जुटाई जा सके। जब उन्होंनेे महसूस किया कि उनकी बचत उद्यम शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो उन्होंने अपने सभी आभूषणों को भी बेचने में कोई संकोच नहीं किया, और इस तरह पोल्ट्री उद्योग के लिए जरूरी पूंजी जुटा ली।

1969 में, श्रीमती उत्तरा देवी ने शानदार शुरुआत की और “वेंकटेश्वर फार्म” नाम से हैदराबाद के समीप, इंजापुर इलाके में एक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म की स्थापना करने में सफल रहीं। उन्होंने कड़ी मेहनत के बल पर अकले ही फार्म का व्यवस्थापना संभाला। (हालांकि डॉ. राव आगे भी कुछ समय तक आर्बर एकड़ में काम करते रहे।) उनके द्वारा बोया गया यह बीज भविष्य में वेंकटेश्वर हैचरी समूह के जन्म और भविष्य के विकास के लिए वरदान साबित हुआ। इस प्रकार, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वास्तव में श्रीमती उत्तरा देवी वेंकटेश्वर हैचरी की असली संस्थापक हैं।

वर्ष 1971 में, जब अमेरिका स्थित बेबकॉक पोल्ट्री फार्म से ऑल इंडिया फ्रेंचाइजी प्राप्त करने का अवसर मिला तो डॉ. राव इस अवसर का लाभ उठाने के लिए उत्सुक थे, लेकिन वित्तीय समस्या को देखते हुए, वह इसे केवल दक्षिण भारत के लिए लेना चाहते थे। तब उनकी पत्नी ने उन्हें ऑल इंडिया फ्रैंचाइज़ी के लिए मना लिया और अपने सोने के आभूषण बेचकर ज़रूरी धनराशि की व्यवस्था की।

पुरस्कार और टाइटल - श्रीमती उत्तरा देवी का सहयोग

डॉ. बी.वी. राव ने अकेले ही अपनी मेहनत के बल पर पोल्ट्री फार्म की शुरूआत की और इस तरह लोगों को कम कीमत पर भी चिकन और अंडे उपलब्ध करवाने में सफल रहे। पोल्ट्री विश्व में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें “पद्मश्री पुरस्कार” से सम्मानित किया, जबकि काकटिआ विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी। उन्हें वर्ल्ड पोल्ट्री साइंस एसोसिएशन के इंटरनेशनल पोल्ट्री हॉल ऑफ फेम अवार्ड से सम्मानित किया गया।

डॉ. बी.वी. राव द्वारा स्थापित वेकेंटेश्वर हैचरी ने भारत में पोल्ट्री उद्योग का स्वरूप ही बदल दिया। महज मुर्गी पालन अब विशाल मुर्गी पालन उद्योग बन गया था और तेजी से विकास की ओर अग्रसर होने लगा। डॉ. राव को विश्वास था कि पोल्ट्री फार्मिंग व्यवसाय भारतीय किसानों के लिए सुनिश्चित लाभदायक आजीविका बन सकता है और साथ ही उपभोक्ताओं को कम कीमत पर पोषक आहार मिल सकता है।

व्हीएच लोगो अब पोल्ट्री उत्पादों का बेहद पसंदीदा एवं भरोसेमंद प्रतीक है, जिसमें प्रसंस्कृत खाद्य, पशु टीके, मानव और पशु दवा और स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद श्रृंखला शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में, कंपनी ने एसपीएफ अंडे, चिकन और अंडे प्रसंस्करण (फॉरवर्ड प्रोसेसिंग), ब्रायलर और लेयर ब्रीडिंग को शामिल करने के लिए अपनी गतिविधियों में विविधता लाने के प्रयास किए। इसके अलावा, समूह आनुवंशिक अनुसंधान और पोल्ट्री रोगों के निदान, पोल्ट्री वैक्सीन और फीड सप्लीमेंट्स, वैक्सीन उत्पादन, आदि के साथ भी जुड़ा हुआ है। आज, वी.एच. समूह एशिया में सबसे बड़ा पूरी तरह से एकीकृत पोल्ट्री समूह है।

डॉ. बी.वी. राव बेबकॉक पोल्ट्री फ़ार्म से भारतीय फ्रैंचाइज़ी की हैसियत से जुड़े रहे, जो बेबकॉक ब्रांड चिकन के पुरे विश्व में अव्वल स्थान पर था। 1996 में, डॉ. बी. वी. राव की मृत्यु पश्चात्, उनकी सुपुत्री डॉ. श्रीमती अनुराधा जे. देसाई वी.एच. समूह की अध्यक्षा बनीं।

एनईसीसी स्टोरी

एक समय ऐसा भी आया जब वित्तीय संकट के कारण पोल्ट्री उद्योग का अस्तित्व खतरे में फंस गया था। उद्योग बिचौलियों की चपेट में था। पोल्ट्री उत्पादक काफ़ी नुकसान झेल रहे थे और अपने व्यवसाय को बंद करने की कगार पर थे। तब डॉ. बी.वी. राव ने नेशनल एग कोआर्डिनेशन कमेटी (एनईसीसी) नामक एक 25,000 किसान सदस्यों का संगठन स्थापित किया और पुरे देश में नारा लगाया, ‘मेरा अंडा, मेरा मूल्य, मेरा जीवन’। एनईसीसी उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों की सुरक्षा करते हुए पोल्ट्री उत्पादों के विक्रय मूल्य घोषित करता है। पोल्ट्री बिरादरी 6 नवंबर को डॉ. बी.वी. राव की जयंती पूरे भारत में “एनईसीसी दिवस” के रूप में मनाती है।

पोल्ट्री के लिए एक उज्जवल भविष्य सुनिश्चित हुआ

डॉ. बी.वी. राव ने यह बहुत पहले जान लिया था कि पोल्ट्री उद्योग के विकास के लिए वैज्ञानिक शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिक शिक्षा प्रदान करने के लिए डॉ. बी.वी. राव इंस्टीट्यूट ऑफ पोल्ट्री मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की। उनका मानना था की पोल्ट्री उद्योग के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्याधुनिक तकनीक को अपनाना बेहद जरूरी था।

एग बास्केट ऑफ इंडिया

तेलंगाना सरकार जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए अंडे और चिकन की खपत को बढ़ावा दे रही है, जिसमें कहा गया है कि इनका सेवन करने से कोविड वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होगा। हाल ही में जब पड़ोसी राज्यों के जानवरों में बर्ड फ्लू का प्रकोप देखा गया, तो तेलंगाना सरकार ने अफवाहों पर पलटवार करते हुए एक अभियान चलाया और लोगों को चिकन और अंडे ठीक से उबालकर सेवन करने की सलाह दी। तेलंगाना राज्य को एग ‘बास्केट ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है।

अंडे मां के दूध के बाद दूसरे स्थान पर माने गए है, क्योंकि उनमे सर्वाधिक पोषक तत्व पाए जाते है। कई सर्वेक्षणों में पाया गया है कि लोगों को अंडे के समृद्ध पोषण लाभों के बारे में पता नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों में कहा गया है कि चीन में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 460 अंडे की खपत है, जबकि जापान में यह 380 अंडे और अमेरिका में 320 अंडे प्रति व्यक्ति है। इसकी तुलना में, भारत में प्रति व्यक्ति खपत सिर्फ एक वर्ष में 80 अंडे है! राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) ने सलाह दी है कि भारतीयों को एक वर्ष में कम से कम 180 अंडे खाने चाहिए।

एक महिला उद्यमी की दूरदृष्टि से निर्मित हुई पोल्ट्री उद्योग की बुनियाद

अधिकांश लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि सभी लोगों के लिए पोषक आहार प्रदान करने में और पोल्ट्री किसानों के कल्याण के लिए डॉ. बी.व्ही. राव के प्रयासों में उनकी पत्नी श्रीमती उत्तरा देवी ने हर समय अपना योगदान दिया।

वेंकटेश्वर हैचरी समूह की स्थापना में श्रीमती उत्तरा देवी का अमूल्य योगदान हर समय रहा और उन्होंने अपने पति को उद्योग की स्थापना करने में और उसमे सफलता हासिल करने के लिए प्ररेणा दी। श्रीमती उत्तरा देवी की सुपुत्री डॉ. श्रीमती अनुराधा जे. देसाई, जो वी.एच. समूह की वर्तमान अध्यक्षा हैं, कहती हैं: “यह मेरे पिता का सपना था कि मैं भारत को सभी पहलुओं - प्रोडक्टशन वॉल्यूम, क्वालिटी व टेक्नोलॉजी - में मुर्गी पालन की दुनिया में नंबर 1 देश के रूप में देखूँ। उनकी दूरदृष्टि, दूरदर्शी योजना और समर्पित प्रयासों की बदौलत, आज भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा ब्रायलर उत्पादक है। मेरे पिता को विश्वास था कि भविष्य में इस उद्योग का भविष्य बहुत ही उज्जवल है और उन्होंने एेसे समय में पूरे आत्मविश्वास के साथ व्यवसायिक स्तर पर पोल्ट्री उद्योग की स्थापना की जब देश में पोल्ट्री उद्योग प्रचलन में नहीं था। हमें उनके सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यही हमारा मिशन है”

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