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अफगानिस्तान में महिलाओं की दो तस्वीर:महिला बॉक्सर को पुरुष कोच की वजह से देश निकाला, काबुल यूनिवर्सिटी में सिर से पांव तक ढकी लड़कियां

नई दिल्ली6 दिन पहले
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  • घर पर भेजे धमकी भरे खत, परिवार की खातिर छोड़ा वतन
  • लाइटवेट चैंपियन हैं सीमा रेजाई, बॉक्सिंग छोड़ना मंजूर नहीं
  • कतर में हैं अफगानी बॉक्सर, अब चाहती हैं अमेरिकी वीजा
  • काबुल यूनिवर्सिटी में सिर से लेकर पांव तक ढकी लड़कियां

अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद तालिबान के शासन में महिलाओं की जिंदगी नर्क हो गई है। खेल हो या फैशन या फिर स्कूल सभी जगहों पर महिलाओं पर तरह तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। ऐसी कई कहानियां हर दिन दुनिया के सामने आ रही हैं।

ऐसी ही एक कहानी अफगानिस्तान की महिला बॉक्सर सीमा रेजाई की है, जिन्हें बॉक्सिंग के अपने पैशन के लिए अपना वतन छोड़ना पड़ा। लाइटवेट बॉक्सिंग में चैंपियन सीमा ने रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी स्पुतनिक को दिए इंटरव्यू में अपनी दर्द भरी कहानी दुनिया के सामने बयां की है। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान ने उन्हें देश छोड़ने या मरने के लिए तैयार रहने की धमकी दी थी। ऐसे में उनके पास अपना वतन छोड़ने के सिवा और कोई चारा नहीं था।

पुरुष ट्रेनर बर्दाश्त नहीं कर सका तालिबान, परिवार ने भी छोड़ा साथ
सीमा रेजाई ने बताया कि तालिबान की मरने की धमकी के बाद उनके परिवार वालों ने भी साथ देना छोड़ दिया था, क्योंकि वे सभी डर गए थे। दरअसल, सीमा को पुरुष कोच ट्रेनिंग दे रहे थे। तालिबान को यह बात बेहद खराब लगी और उन्होंने सीमा को जान से मारने की धमकी दी और यह भी कहा कि या तो अपना खेल छोड़ें या फिर मरें।

पुरुष कोच के साथ बॉक्सर सीमा रेजाई।
पुरुष कोच के साथ बॉक्सर सीमा रेजाई।

घर पर भेजे धमकी भरे खत, कहा-अफगानिस्तान में रहना है तो बॉक्सिंग छोड़ो
काबुल पर कब्जे के दौरान सीमा रेजाई पुरुष कोच के साथ बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रही थीं। यह जानकर तालिबान ने पहले तो सीमा के घर धमकी भरे खत भेजने शुरू कर दिए, जिसमें तालिबान ने कहा, अगर अफगानिस्तान में रहना है तो बॉक्सिंग छोड़ी होगी। वर्ना जान गंवानी पड़ी जाएगी।

देश छोड़कर कतर आईं, अब चाहती हैं अमेरिका वीजा
16 साल की उम्र से बॉक्सिंग कर रहीं सीमा रेजाई को जब कहीं भी कोई सपोर्ट नहीं मिला तो वह प्लेन से खाड़ी देश कतर चली गईं। अब वह चाहती हैं कि अमेरिका उन्हें अपने यहां शरण दे, ताकि अपने बॉक्सिंग के पैशन को बरकरार रख सकें। इसके लिए वह अमेरिकी वीजा चाहती हैं।

महिला क्रिकेट पर भी तालीबानी साया, बाकी खेलों पर भी ग्रहण
महिला बॉक्सिंग से पहले अफगानिस्‍तान में महिला क्रिकेट पर भी तालिबानी साया पड़ चुका है। इस मामले में क्रिकेट ऑस्‍ट्रेलिया ने सख्‍त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि अगर तालिबान महिला क्रिकेट टीम को खेलने की इजाजत नहीं देता है तो पुरुष क्रिकेट टीम के साथ भी होने वाले टेस्‍ट मैच को रद्द समझे। अफगानिस्‍तान की पुरुष टीम को 27 नवंबर से ऑस्‍ट्रेलिया दौरे पर एकमात्र टेस्‍ट मैच खेलना है। बाकी खेलों को लेकर भी महिलाएं खौफ में हैं।

काबुल यूनिवर्सिटी में ऐसी है तस्वीर
काबुल यूनिवर्सिटी में ऐसी है तस्वीर

काबुल यूनिवर्सिटी में संगीनों के साए में सिर से पांव तक ढंकी लड़कियां
दूसरी कहानी यह तस्वीर कह रही है। शरिया कानून की वकालत करने वाले तालिबान के फरमान काबुल यूनिवर्सिटी में लागू हो गए हैं। बीते शनिवार को यूनिवर्सिटी में तालिबान के नेताओं ने शरिया कानून पर लेक्चर का आयोजन किया। इसमें यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 300 लड़कियां सिर से लेकर पांव तक बुर्के में ढंकी 300 लड़कियां शामिल हुईं। यूनिवर्सिटी में लेक्चर दे रही महिला भी सिर से पांव तक बुर्के से ढंकी हुई थी। उसके सामने ही तालिबानी खड़े थे।

ड्रेस कोड और अलग बैठने का जारी है फरमान, शरिया की शपथ
कार्यक्रम में हिस्सा ले रही छात्राओं को शरिया कानून मानने के लिए शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान हर युवती के हाथ में तालिबान का झंडा भी था। तालिबान ने अपने शासन में महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ड्रेस कोड जारी किया है। इससे पहले कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्लास के दौरान भी लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग बैठने का फरमान जारी किया गया है।