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करिअर दिशा:'पुष्पा' जैसी स्मगलिंग को रोकना​​​​​​​-IAS-IPS जैसी दमदार जॉब, साइंस में ग्रेजुएशन के बाद 3 टेस्ट और 21 की उम्र से करें नौकरी

नई दिल्ली3 महीने पहले
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हाल ही में आई फिल्म 'पुष्पा' के बारे में तो आपने जरूर देखा, पढ़ा और सुना होगा। जंगल की लकड़ी की तस्करी का खेल और वन अधिकारियों की कोशिश काफी कुछ इसमें दिखाया गया है। मगर फिल्म में जिस तरह से पुष्पाराज के खिलाफ IPS अधिकारियों को एक्शन लेते दिखाया है, असल में ऐसा नहीं होता। स्मगलिंग को रोकने का पहला काम IFS का होता है, आज हम इसी नौकरी के बारे में बता रहे हैं

वन और वन्य जीवों के संरक्षण और उनके संवर्धन के लिए ऑफिस में बैठकर प्लानिंग करने से लेकर फील्ड ड्यूटी दोनों जिम्मेदारियां एक आईएफएस को निभानी होती है।

अखिल भारतीय स्तर की सेवाओं में से एक आईएफएस की परीक्षा में देशभर के कैंडिडेट भाग लेते हैं। आइए जानते हैं इस परीक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में-

अखिल भारतीय स्तर की सेवाओं में से एक आईएफएस की शुरुआत 1966 में भारतीय वन के संरक्षण को ध्यान में रखकर हुई थी। परीक्षा अमूमन सिविल सेवा परीक्षा के साथ ही होती है जो कि जून 2022 में संभावित है। इसके लिए प्रतियोगिता परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी आयोजित करता है।

इसी के अनुरूप विभिन्न राज्यों में आईएफएस की तैनाती होती है। पूरे देश में जिस तरह से वन प्रदेशों और वन्य जीवों का खतरा बढ़ा है, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि आने वाले वर्षों में संख्या बढ़ेगी।

योग्यता एवं आयु सीमा

आईएफएस की परीक्षा के लिए विज्ञान के एक विषय के साथ कैंडिडेट का स्नातक (विज्ञान वर्ग) होना जरूरी है। जहां तक आयु सीमा की बात है तो 21 वर्ष से लेकर 32 साल के कैंडिडेट (सामान्य वर्ग) यह परीक्षा दे सकते हैं।

तीन फेज में पूरी होती है परीक्षा

आईएफएस की परीक्षा के तीन फेज हैं। लिखित परीक्षा से शुरू होकर यह साक्षात्कार, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पर जाकर खत्म होती है। प्रश्न पत्र का पैटर्न संघ लोकसेवा आयोग की अन्य परीक्षाओं की तरह होता है।

प्रारंभिक परीक्षा बहुविकल्पीय होती है। इसमें क्वालिफाई करने के बाद लिखित परीक्षा होती है। लिखित परीक्षा में सात प्रश्न पत्र होते हैं सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी अनिवार्य विषय है, इसके अलावा चार प्रश्नपत्र दो वैकल्पिक विषयों से होते हैं। वैकल्पिक विषय के रूप में किसी भी अन्य दो विषयों को लिया जा सकता है। प्रश्न प्रायः समसामयिक विषयों पर केंद्रित होते हैं।

लिखित परीक्षा में सफल कैंडिडेट के लिए दूसरा द्वार होता है, साक्षात्कार। विभागीय उच्चाधिकारियों के पैनल के सामने उसके व्यक्तित्व और शैक्षणिक क्षमताओं से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल होती है।

फिजिकल एग्जाम और ट्रेनिंग

चार घंटे में 26 किलोमीटर का सफर दौड़ या पैदल चलकर पूरा करना इस परीक्षा को अन्य सभी परीक्षाओं से अलग करता है। लंबाई, छाती की माप, वजन आदि की जांच अन्य परीक्षाओं की तरह ही है, जिसमें महिलाओं और पर्वतीय क्षेत्र के कैंडिडेट के लिए अलग मानक तय हैं। दौड़ या पैदल चलने के तुरंत बाद कैंडिडेट का मेडिकल टेस्ट होता है।

अन्य सेवाओं की तुलना में आईएफएस के प्रशिक्षण की अवधि सबसे ज्यादा तीन साल होती है। यह प्रशिक्षण लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन और इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी, देहरादून में दिया जाता है। इस दौरान प्रशिक्षु आईएफएस को करीब 42 पेपर पास करने होते हैं। प्रशिक्षु आईएफएस को अंतिम वर्ष में विभाग के कार्यालयों में नौकरी करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है।

ऐसे पहुंचिए कामयाबी की दहलीज पर

  • ये न सोचें कि फॉरेस्ट से जुड़ी परीक्षा है, तो इससे जुड़े सवालों की अधिकता होगी। प्रश्नपत्रों में समसामयिक विषयों को संतुलित रूप से शामिल किया जाता है। पत्र-पत्रिकाओं, ऑनलाइन सूचनाओं का नियमित अध्ययन करें।
  • ध्यान रहे परीक्षा के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक है, पर प्रश्न स्नातकोत्तर स्तर तक के भी पूछ लिए जाते हैं।
  • शारीरिक परीक्षा में 26 किलोमीटर चलने/दौड़ने के लिए पूरी तैयारी करें। कई बार कैंडिडेट निर्धारित चार घंटे की समय सीमा में इसे पूरा नहीं कर पाते हैं और पीछे रह जाते हैं।
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