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स्कूलों से बच्चों की सीट ही नहीं पूरी क्लास गायब:बच्चे का इंटरव्यू लेकर कहा-'तुम क्लास में पढ़ने के लायक नहीं', एडमिशन नहीं मिलेगा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत बच्चों को प्राइवेट स्कूल में फ्री एडमिशन देने का नियम है। मगर देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में आरटीई के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्कूल आरटीई की सीटों का गलत आकंड़ा पेश कर रहे हैं। यहां तक कि स्कूल में प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला लेने से भी साफ इंकार कर रहे हैं।

असल में, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत देश में 14 साल तक के हर बच्चे को फ्री में पढ़ने का अधिकार दिया गया है। ये व्यवस्था खासकर उन बच्चों के लिए है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं। इसके तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपनी हर कक्षा में 25% सीट पर बच्चों को पढ़ाना होता है और दाखिला देना होता है।

हकीकत में बच्चों का लॉटरी में नाम आने के बाद भी पेरेंट्स स्कूल और शिक्षा विभाग के चक्कर काटते रह जा रहे हैं। तो निजी स्कूल कभी बच्चों का इंटरव्यू लेते हुए उन्हें अयोग्य बताकर वापस भेज देते हैं। कभी स्कूल से घर की दूरी ज्यादा बताकर इन बच्चों को स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। आरटीई के तहत दाखिले की रेस में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले ने टॉप जिलों में अपनी जगह बनाई है। जबकि जिले के 40 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के पोर्टल पर सीटों में गड़बड़ी की है। 16 स्कूलों ने अपने स्कूल से नर्सरी और प्राइमरी कक्षा ही गायब कर दी है।

बच्चे का इंटरव्यू लेकर कहते हैं ये कक्षा 1 में पढ़ने लायक नहीं
नोएडा के सलारपुर निवासी मोहम्मत वसीम बताते हैं कि उन्होंने बेटे मोहम्मद जियान का प्री-प्राइमरी कक्षा में दाखिला कराने के लिए आरटीई के तहत आवेदन किया। बच्चे का आरटीई की दूसरी लॉटरी में नाम भी आया। दाखिले के लिए सेक्टर-128 स्थित जेपी स्कूल अलॉट किया गया। 16 जुलाई को बच्चे का कक्षा 1 के लिए इंटरव्यू लिया गया। बाद में पेरेंट्स से कहा कि आपका बच्चा कक्षा 1 में पढ़ने योग्य नहीं है और नर्सरी कक्षा में दाखिला नहीं ले सकते।

जबकि आरटीई अधिनियम के तहत किसी भी स्कूल को बच्चे का इंटरव्यू लेने की इजाजत नहीं है और न ही उसके आधार पर बच्चे को दाखिला देने से इंकार करने का अधिकार है। बच्चे की उम्र और योग्यता के आधार पर उसे दाखिला दिया जाता है।

पांच साल के बच्चे का इंटरव्यू लेकर टीचर ने कहा कि ये कक्षा 1 में पढ़ने लायक नहीं। बच्चा पूछता है कि स्कूल कब जाउंगा।
पांच साल के बच्चे का इंटरव्यू लेकर टीचर ने कहा कि ये कक्षा 1 में पढ़ने लायक नहीं। बच्चा पूछता है कि स्कूल कब जाउंगा।

सिंगल मदर की इकलौती बच्ची को एडमिशन तो दूर एंट्री भी नहीं मिली
केंद्र सरकार ने बच्चियों को पढ़ाने के लिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं' का नारा दिया है। लेकिन सिंगल मदर की इकलौती बच्ची स्कूल में पढ़ने के लिए परेशान हो रही है। नोएडा की अनीता चौहान (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि उनकी बेटी इशिता चौहान (बदला बुआ नाम) का नाम आरटीई की दूसरी लॉटरी में आया है। प्री-प्राइमरी कक्षा में दाखिले के लिए उसे सेक्टर-135 स्थित श्रीराम मिलेनियम स्कूल अलॉट किया गया। मगर यहां पहुंचने पर बच्ची की मां को स्कूल में एंट्री भी नहीं मिली। इशिता की मां सिंगल मदर हैं, बच्ची के पिता की इसी वर्ष जनवरी में मृत्यु हो गई। इशिता किराये के मकान में रहकर बच्ची को पाल रही हैं। गुजर बसर के लिए आस-पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। बच्ची के मामा स्कूल में दाखिला कराने पहुंचे तो उन्हें ये कहकर वापस लौटा दिया गया कि बच्ची का पता स्कूल के 2 किलोमीटर के दायरे में नहीं आता, इसलिए दाखिला नहीं दिया जाएगा। अगर पेरेंट्स बीएसए से लेटर लेकर आएंगे सिर्फ तभी दाखिला मिलेगा। जून में शुरू हुई प्रोसेस में आधा जुलाई भी निकल गया, परिजन सिर्फ स्कूल और शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, मगर दाखिला नहीं मिल रहा।

स्कूल कर रहे मनमानी, पहले सीट गायब की अब क्लास भी हुई लापता
गौतमबुद्धन नगर में आरटीई दाखिले में हो रही गड़बड़ियों को उजागर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील रुद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि जिले में कई प्राइवेट स्कूल काफी तरीके से आरटीई एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं। जिले के 16 स्कूलों ने उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के पोर्टल पर प्रवेश कक्षा की गलत जानकारी दी है। इन स्कूलों में प्राइमरी और प्री-प्राइमरी प्रवेश कक्षा होने के बाद भी इन स्कूलों ने सिर्फ कक्षा 1 की जानकारी विभाग को दी है। कक्षा 1 में कम दाखिले होते हैं इसलिए ये स्कूल उन्हीं स्टूडेंट्स की जानकारी देकर आरटीई में कम प्रवेश लेते हैं। जबकि आरटीई एक्ट में इस तरह का प्रावधान नहीं है, इसके अनुसार स्कूलों को प्रवेश कक्षा में बच्चों को दाखिला देना होता है।

रुद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि आरटीई का उल्लंघन करने वालों में स्टेप बाय स्टेप स्कूल, सरला चोपड़ा डीएवी स्कूल, कोठारी इंटरनेशनल स्कूल, रामाज्ञ स्कूल, डीपीएस स्कूल और एपीजे स्कूल जैसे जिले के बड़े नामी प्राइवेट स्कूल शामिल हैं।

गौतमबुद्ध नगर जिले में 39 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अपने स्कूल में आरटीई सीटों की गलत जानकारी दी है। स्कूलों ने प्राइमरी में कुल 40 सीटें ही दिखाई हैं ताकि आरटीई में 25% यानी सिर्फ 10 दाखिले लेने पड़े। जबकि हकीकत में इन स्कूलों में हर साल नर्सरी व प्राइमरी कक्षा में 200-250 एडमिशन होते हैं। RTE में गड़बड़ी करने वाले इन स्कूलों की जानकारी खुद उत्तर प्रदेश के आरटीई पोर्टल पर अपलोड है। रुद्र आरटीई में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिकायत करते हुए उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा के महानिदेशक को लेटर लिखा है। गौतमबुद्धनगर की बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कोई जवाब नहीं दिया।

एक ही साल में कैसे हो गए रिकॉर्ड एडमिशन, उठा सवाल
गौतमबुद्धनगर में आरटीई के तहत 1140 निजी स्कूल पंजीकृत हैं। इन सभी निजी स्कूलों में कुल 18 हजार 29 सीटें हैं। वर्ष 2021-22 में लगभग चार हजार छात्रों का चयन हुआ था। इसमें निजी स्कूलों ने आधे से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला तक नहीं दिया गया। 30 से ज्यादा स्कूलों ने 2020 के मुकाबले अपनी सीटें कम दिखाई थी। इन स्कूलों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किया था।

इस वर्ष 2022-23 सत्र की तीन लॉटरी की लिस्ट में पांच हजार छात्रों का चयन हुआ है। इस बार स्कूलों ने मनमानी की है, सीटें भी कम दिखाई हैं, कक्षा भी गायब कर दी है। मगर शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में चार हजार से ज्यादा बच्चों का दाखिला हो चुका है।

RTE में दाखिले की प्रक्रिया और नियम

  • जिले के सभी निजी स्कूल अपनी प्रवेश कक्षा की सीटों की जानकारी प्रदेश के आरटीई पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
  • सीटों के डेटा के हिसाब से हर कक्षा में 25% सीट आरटीई के लिए आरक्षित की जाती हैं।
  • बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों द्वारा की गई जानकारी का सत्यापन यानी वेरिफिकेशन करता है।
  • पेरेंट्स आरटीई के पोर्टल पर आवेदन करते हैं।
  • पेरेंट्स अपने घर के आस-पास के 3 किलोमीटर तक के दायरे में आने वाले स्कूलों को सिलेक्ट करते हैं।
  • बेसिक शिक्षा विभाग सभी आवेदकों के दस्तावेजों का सत्यापन करता है।
  • शिक्षा विभाग की तरफ से तीन बार ऑनलाइन लॉटरी निकाली जाती है, जिसमें चयनित हुए बच्चों की लिस्ट बनाकर स्कूलों में दाखिले के लिए भेजते हैं।
  • पेरेंट्स स्कूल में जाकर बच्चे के दस्तावेज जमा कर दाखिला कराते हैं।

प्रवेश देने के नियम :-

  • आरटीई में दाखिले के लिए पेरेंट्स की आय सालाना 3.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। अभिभावक पिछड़े समुदाय से भी हो सकते हैं।
  • जो बच्चे अनाथ हैं, ट्रांसजेंडर हैं, एचआईवी या किसी अन्य खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, वे आवेदन करते हैं।
  • अगर चयनित छात्र अपनी उम्र के अनुसार चयनित कक्षा में प्रवेश योग्य नहीं है तो स्कूल को उनकी योग्यता के आधार पर दूसरी कक्षा में दाखिला देना होगा।