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आमिर खान करते हैं किरण-रीना की रिस्पेक्ट:रणबीर कपूर की पुरानी गर्लफ्रेंड्स से आलिया की दोस्ती, 1929 में शुरू हुआ “एक्स” कहने का चलन

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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‘अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर चलो मैं हाथ बढ़ाता हूं दोस्ती के लिए।’ यह अहमद फराज की शायरी शायद एक्स के लिए ही बनी है। एक्स वाइफ या एक्स हस्बैंड के साथ दोस्ती का ख्याल ही ख्याली पुलाव जैसा लगता है। लेकिन सेलिब्रिटीज इसे हकीकत बना रहे हैं।

पिछले दिनों आमिर खान ‘कॉफी विद करण’ शो में पहुंचे। यहां उन्होंने खुलासा किया कि वह हफ्ते में एक दिन अपनी दोनों एक्स वाइफ रीना दत्ता और किरण राव से जरूर मिलते हैं। वह दोनों का बहुत सम्मान करते हैं।

लोग सेलेब्स को बहुत फॉलो करते हैं। उनके ड्रेसअप, हेयरस्टाइल समेत तमाम चीजों को कॉपी करते हैं। लेकिन जब एक्स की बात आती है तो अपने रोल मॉडल को ही भूला देते हैं। वह अपने एक्स हस्बैंड या एक्स वाइफ के लिए सिलेब्रिटीज की तरह पॉजिटिव सोच क्यों नहीं रख पाते?

हर इंसान को सम्मान का हक है

इंसान छोटा हो या बड़ा, हर कोई सम्मान पाने का हकदार है। रिलेशनशिप काउंसलर डॉक्टर गीतांजलि कहती हैं कि अगर कपल्स की नहीं बनी तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी एक्स वाइफ या हस्बैंड बुरे इंसान हैं। हर इंसान के अंदर कुछ ऐसी क्वालिटीज होती हैं जिसका सम्मान किया जा सके। नफरत से निकलने के बाद ही इंसान की अच्छाई दिखाई देती है। माफ करने के साथ-साथ एक-दूसरे का सम्मान करें।

जब आमिर खान अपनी एक्स वाइफ की रिस्पेक्ट कर सकते हैं तो आम लोग क्यों नहीं? क्या किसी को इज्जत देना बहुत मुश्किल काम है?

बच्चों की परवरिश की खातिर अच्छे संबंध

एक्सपर्ट के अनुसार सेलिब्रिटी पेरेंट्स भी हैं। वह नहीं चाहते कि उनका अलग होना उनके बच्चों पर असर डाले। इसलिए भी वह कई बार अपने बच्चों की खातिर साथ में घूमते हैं या पार्टी करते दिखते हैं। या हफ्ते में एक दिन गेट टुगेदर करते हैं। बच्चों के फैसलों में अपने एक्स की राय शामिल करते हैं। बच्चा होने की वजह से उनके बीच दोस्ती का रिश्ता बन जाता है।

अब सवाल यह है कि यह रिश्ता असल में होता है या दुनिया को दिखाने के लिए?

एक्सपर्ट के अनुसार कि यह फेक भी हो सकता है। दरअसल सेलिब्रिटी पब्लिक फिगर होते हैं। वह अपनी इमेज को लेकर हमेशा अलर्ट रहते हैं। पब्लिक में उनकी अच्छी इमेज बनी रहे और काम मिलने में दिक्कत न हो, इस वजह से वह पॉजिटिव इमेज को बरकरार रखना चाहते हैं।

एक्स पार्टनर और एक्स वाइफ/हस्बैंड में फर्क

दोनों ही शब्दों में फर्क है। लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर शब्द का इस्तेमाल होता है। जब कपल इस रिश्ते को खत्म करते हैं तो एक्स पार्टनर कहलाते हैं। जब शादीशुदा कपल तलाक लेता है तो इसके बाद एक्स वाइफ और एक्स हस्बैंड कहलाते हैं।

आम लोग भी कर सकते हैं नई शुरुआत

तलाक के बाद अपने एक्स के साथ कभी डिनर तो कभी वेकेशन करते दिखते ये सेलेब्स हमेशा खुश रहते हैं। लेकिन आम लोगों में तलाक के बाद एक्स वाइफ और एक्स हस्बैंड के बीच इतनी नफरत हो जाती है कि एक दूसरे की शक्ल देखना भी बर्दाश्त नहीं करते।

मनोचिकित्सक अवनि ने वुमन भास्कर को बताया कि सेलिब्रिटी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंट हैं। तलाकशुदा का टैग लगना उनके लिए शर्म की बात नहीं है। आम लोगों को यह बात समझने की जरूरत है कि अगर कपल के बीच में अच्छी अंडरस्टैंडिंग नहीं है तो जरूरी नहीं कि सामने वाला इंसान गलत ही हो। इसका मतलब है कि आप एक-दूसरे से अलग हैं। अगर रिश्ते की शुरुआत या अंत कड़वाहट से हो तो जिंदगीभर मन से इसे दूर करना मुश्किल है।

बेहतर है कि एक्स के लिए मन से सारी नेगेटिव बातें निकालें और नई शुरुआत करें। दोस्ती के इस नए रिश्ते में आगे बढे़ें और लोगों को माफ करना सीखें।

तलाक की वजह पर भविष्य निर्भर

डॉक्टर गीतांजलि शर्मा कहती हैं कि एक्स वाइफ या एक्स हस्बैंड से कैसा रिश्ता रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिवोर्स हुआ क्यों? वजह कोई भी हो, लेकिन अगर इंसान इस बात को स्वीकार कर लें कि वह एक-दूसरे के लिए नहीं बने हैं, इसमें किसी की गलती नहीं रही और मन में गिले-शिकवे न हों तो अलगाव को सुंदर मोड़ पर छोड़ना आसान होता है क्योंकि आप अजनबी नहीं हैं एक-दूसरे के लिए।

वहीं, अगर मन में नफरत, बदले की भावना, पैसों का लालच हो या बच्चों की कस्टडी को लेकर इश्यू हो तो अलग होने के बाद भी चीजें खराब ही रहती हैं।

रिश्ते में सारी उम्मीदें दूसरों से ही क्यों?

रिश्ते टूटने की कई वजह हो सकती हैं। जैसे इनफर्टिलिटी, पैसा, घरेलू हिंसा, गुस्सा, सब्र नहीं होना, सिर्फ लेने की भावना रखना या सास-ससुर का बीच में आना।

हमारी सोसायटी में ससुराल में बहू से सब उम्मीद रखते हैं जबकि लड़की को सबको समझने का समय देना चाहिए। इसके अलावा आज की लड़कियां वर्किंग हैं, पढ़ी-लिखी हैं, वह अपने हस्बैंड से बराबरी का रिश्ता रखना चाहती हैं लेकिन लड़के आज भी अपने पुरुष वर्चस्व में जी रहे हैं।

आजकल एक्स से दोस्ती क्यों होती है?

जिस तरह से रिश्ते की खूबसूरत शुरुआत की जाती है, अंत भी वैसा किया जा सकता है। अगर आप मैच्योर हैं और एक-दूसरे को माफ कर दिया हो तो जिंदगीभर आप अपने एक्स के दोस्त बन सकते हैं। आजकल एक्स से दोस्ती आम बात हो गई है। दरअसल कपल्स अब मूवऑन करना सीख गए हैं। बॉलीवुड ही नहीं, बिजनेस और कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले कई लोग अपने एक्स के अच्छे दोस्त हैं।

कई इवेंट्स पर आलिया भट्ट दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ के साथ दिखीं।
कई इवेंट्स पर आलिया भट्ट दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ के साथ दिखीं।

जिंदगी में आगे बढ़ने के बाद नहीं होती जलन

‘कॉफी विद करण’ शो में ही आलिया भट्ट ने कहा कि उनकी रणबीर कपूर की एक्स गर्लफ्रेंड्स दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ से अच्छी दोस्ती है। ऐसा आम लोगों की जिंदगी में कम ही देखने को मिलता है। इस पर रिलेशनशिप एक्सपर्ट का कहना कि जब इंसान आगे बढ़ जाए तो वह पुरानी चीजों के बारे में नहीं सोचता और न ही जलन की भावना रखता।

रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ अब अपनी-अपनी जिंदगी में शादी करके आगे बढ़ गए है।

वैसे भी फिल्म इंडस्ट्री बहुत छोटी है। ऐसे में आलिया या बाकी सेलेब्स का यह सोचना सही भी है क्योंकि गले-शिकवे रखने से कोई फायदा नहीं। एक-साथ काम करना है तो इस बातों को भूलना पड़ता है। हर इंसान को यह समझना चाहिए कि हर रिश्ता एक सीख देता है। बेहतर है इससे सबक लेकर वर्तमान रिश्ते में वह गलती न दोहराएं।

अगर आम महिला ब्लेम गेम करने की बजाय आलिया भट्ट जैसी वाइफ से सीख लेकर अपने हस्बैंड की एक्स गर्लफ्रेंड्स की दोस्त बनें तो क्या रिश्ते के लिए बेहतर नहीं होगा? वह अपने पति को और अच्छे से समझ पाएंगी।

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