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आलिया भट्ट का सोशल मीडिया पर बायकॉट:पति को पीटती दिखाई दीं, असल में हर तीसरी महिला होती है टॉर्चर

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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क्या आपने आलिया भट्ट की फिल्म 'डार्लिंग्स' देखी है? रिलीज से पहले ही फिल्म पर विवाद खड़ा हो गया। लोगों ने फिल्म का ट्रेलर देख आलिया पर पुरुषों के प्रति घरेलू हिंसा का आरोप लगाया और सोशल मीडिया पर #BoycottAliaBhatt की मुहिम शुरू हो गई।

महिलाएं रोज घरेलू हिंसा झेलती हैं फिर क्यों हो रहा है फिल्म 'डार्लिंग्स' का बायकॉट? पति से पिट रही पत्नी की चीख और उसके शरीर पर पड़े निशान देखकर भी लोग चुप क्यों रहते हैं?

इमोशनल वायलेंस के साथ मर्द की ब्लैकमेलिंग

''प्यार नहीं करता तो मैं मारता क्यों? तुम प्यार न करती तो सहती क्यों?'' फिल्म 'डार्लिंग्स' का यह डायलॉग हर उस पत्नी पर सटीक बैठता है जो घरेलू हिंसा का शिकार है। यही नहीं एक और डायलॉग जहन में बस जाता है। "जोरू कौन?, शौहर (पति) की परछाई।'' यह बात तो हमारे समाज में बचपन से लड़की को समझा दी जाती है। पति को परमेश्वर कह दिया जाता है। रिलेशनशिप और लाइफ कोच दामिनी ग्रोवर ने वुमन भास्कर को बताया कि सोसायटी में हमेशा पुरुषों को ऊंचा दर्जा दिया गया।

जब कोई किसी का शोषण करे तो इसका मतलब होता है कि वह अपनी ताकत दिखा रहा है। हमारे घरों में यह नहीं सिखाया जाता कि अपने गुस्से, चिड़चिड़ेपन या बाकी इमोशन को कैसे मैनेज करें। कुछ मर्द अपने निगेटिव इमोशन पत्नी पर निकालने में माहिर होते हैं क्योंकि पत्नी से आसान कोई पंचिंग बैग नहीं होता।

पुरुषों का रौब तभी तक चलता है जब औरतें सहने को तैयार रहती हैं। औरतें इसलिए सहती हैं क्योंकि उनके पास सोशल सपोर्ट नहीं होता। जिस दिन महिला सहना बंद कर देती है तो पुरुष डर जाते हैं। वह अपनी छवि नहीं बिगाड़ना चाहते इसलिए महिलाओं को यह बोल कर कंफ्यूज कर देते हैं कि वह उनसे प्यार करते हैं।

फाइनेंशियल वायलेंस भी कम नहीं

रिलेशनशिप काउंसलर डॉक्टर गीतांजलि शर्मा के अनुसार आजकल कई महिलाएं वर्किंग हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हैं। लेकिन इसके बावजूद वह पार्टनर से फाइनेंशियल अब्यूज तक सहती हैं। हसबैंड कहते हैं कि उनके पैसों का हिसाब वह रखेंगे। पत्नी की सैलरी अपने अकाउंट में ट्रांसफर होने के बाद उसे सिर्फ पॉकेट मनी देंगे।

कुछ लड़कियां शादी के बाद अपने पेरेंट्स की मदद करना चाहती हैं। ऐसे में उनके पति या सास-ससुर ऐसा करने की आजादी नहीं देते। लड़की की ज्वेलरी, बैंक की चेक बुक और डेबिट कार्ड तक रख लेते हैं।

महीने में लाखों कमाने वाली महिला ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उनका पति तब तक प्यार से बात करता है, जब तक वह उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न कर दें। रुपये मिलते ही पति का अंदाज बदल जाता है।

जब वर्किंग महिला का यह हाल है तो सोचिए घर-घर में काम करने वाली औरत का क्या हाल होता होगा। कमला घरों में झाड़ू-पोछा करती है। पति कोई काम नहीं करता, बस शराब पीता है। महीने की शुरुआत में जब उसे पैसे मिलते हैं पति उसे लेने आता है और पैसे लेकर गायब हो जाता है।

बिना गाली दिए होती है मेंटल वायलेंस

कई बार हसबैंड अपनी पत्नी पर न तो हाथ उठाते हैं और न गाली देते, लेकिन सबके सामने नीचा दिखाने लगते हैं। वहीं, पत्नी का दूसरों के सामने मजाक उड़ाते हैं, उसकी बेइज्जती करते हैं। यह मेंटल वॉयलेंस होती है।

एक गलतफहमी-बच्चा होने पर सुधर जाएगा

यह उम्मीद कभी न रखें कि हाथ उठाने वाला पति बच्चा होने के बाद सुधर जाएगा। अक्सर परिवार सलाह देता है कि बच्चा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन दामिनी कहती हैं कि यह सिर्फ एक झूठी उम्मीद है। जो पुरुष पत्नी पर पहले से ही हाथ उठा रहा हो वह भविष्य में बच्चे पर भी हाथ उठाने लगता है। ऐसे में बच्चा भी पेरेंट्स के बीच पिसता है और टॉर्चर होने लगता है। यह उसके दिमाग पर बुरा असर डालता है। 95% मामलों में इस सोच से कोई बदलाव नहीं आता।

पेरेंट्स क्यों सिखाते हैं लड़कियों को चुप रहना?

मनोचिकित्सक बिंदा सिंह कहती हैं कि लड़कियों को उनके पेरेंट्स ही सब कुछ चुपचाप सहने की सीख देते हैं।

सोशल मीडिया के खिलाड़ी जो खुद को इतना मॉडर्न दिखाते हैं, क्या उनकी सोच भी इतनी बैकवर्ड है कि उन्हें ‘डार्लिंग्स’ हजम नहीं हो रही?

हमारी सोसायटी में कहा जाता है कि बेटी की डोली पिता के घर से और अर्थी पति के घर से उठती है। यह बात बचपन से ही लड़की को समझाई जाती है कि पति जो कहे सब मानो। वह घर में खुद अपनी मां को ऐसा करते हुए देख पली-बड़ी हुई होती है। अगर पति हाथ उठाता है तो वह उनके खिलाफ कदम नहीं उठा पातीं क्योंकि उन्हें लगता है कि पति ने छोड़ दिया तो उनका क्या होगा। बिना पिता के बच्चे कैसे बड़े होंगे। वहीं, कुछ महिलाएं पति पर आर्थिक रूप से निर्भर होती हैं इसलिए भी वह जुल्म सहती रहती हैं।

क्या महिलाएं इतनी मजबूर हैं कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठा न पाएं?

शादी को चांस जरूर दें

रिलेशनशिप एक्सपर्ट मानते हैं कि इंसान में सुधार तभी होता है जब वह सुधरना चाहे। रिश्ते को तोड़ना आसान है लेकिन निभाना मुश्किल। शादी या रिलेशनशिप को दूसरा या तीसरा चांस जरूर देना चाहिए लेकिन उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। पार्टनर को एक टाइम लाइन देनी चाहिए। इंसान का बर्ताव ही बता देता है कि वह सुधर रहा है या नहीं। अगर 6 महीने में भी कोई बदलाव न दिखे तो वह इंसान जिंदगी भर भी नहीं बदल सकता है। ऐसे में बेहतर है कि तलाक ले लिया जाए।

मर्द जल्लाद इसलिए बनता है क्योंकि औरत बनने देती है

पुलिस स्टेशन का सीन है। बदरुनिसा उर्फ बदरू (आलिया भट्ट) और शमशूनिस (शेफाली शाह) इंस्पेक्टर के सामने बैठे हैं। शमशूनिस अपने दामाद हमजा (विजय वर्मा) के खिलाफ घरेलू हिंसा के खिलाफ की रिपोर्ट लिख रही है। वह कहती है- ''मर्द दारू पीकर जल्लाद क्यों बन जाते हैं?’’ इस पर पुलिस इंस्पेक्टर का जवाब होता है- ''क्योंकि औरत बनने देती है।’’ इस डायलॉग की गहराई ही घरेलू हिंसा को रोकने का समाधान है। लेकिन भारत समेत पूरी दुनिया में महिला खुद पर पुरुष को हावी होने देती है। इसी का नतीजा है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में 52% महिलाओं ने माना कि पति से पिटना उचित है। वहीं, 42 फीसदी पुरुषों ने इसे ठीक बताया।

सोशल मीडिया पर फिल्म ‘डार्लिंग’ का बायकॉट का हाहाकार मचाने वाले शायद इसी तबके से तो नहीं आते?

दुनिया में हर 3 में से 1 महिला के साथ घरेलू हिंसा

दुनिया में हर 3 में से 1 महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2021 में जारी किया। इसके अनुसार 73 करोड़ महिलाएं हर रोज अपने पार्टनर के हाथों शारीरिक या सेक्शुअल तरीके से हिंसा का शिकार होती हैं लेकिन शिकायत की बात की जाए तो वह न के बराबर है।

तो क्या आपको लगता है कि औरतों को चुप रहना चाहिए और सहना चाहिए?