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तुर्की के ‘नए खलीफा’ से लड़ रही ‘मुस्तफा की वारिस’:अर्दोआन की विरोधी, सेकुलरिज्म की समर्थक कफ़्तानजोलू को 5 साल की सजा, सड़क पर उतरे लोग

इस्तांबुलएक महीने पहले
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तुर्की के ताकतवर राष्ट्रपति अर्दोआन की मुखर विरोधी महिला नेता जनान ​​​​​कफ़्तानजोलू को 5 साल की सजा सुनाई गई है। जिसके बाद तुर्की के लोगों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर विपक्षी महिला नेता का समर्थन किया है। पिछले दिनों इस्तांबुल सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में कफ़्तानजोलू के समर्थन में बड़ी रैलियां की गई हैं। ऐसे ही एक रैली में कफ़्तानजोलू खुद भी नजर आई थीं।

कफ़्तानजोलू को आधुनिक तुर्की के पिता कहे जाने वाले मुस्तफा कमाल पाशा का राजनैतिक वारिस कहा जा रहा है। जबकि ख़िलाफत के समर्थक आर्दोआन मुस्तफा की नीतियों से किनारा कर रहे हैं।

10 साल पुराने ट्वीट पर 5 साल की सजा

तुर्की की विपक्षी महिला नेता जनान कफ़्तानजोलू राष्ट्रपति आर्दोआन की बड़ी राजनीतिक विरोधी मानी जाती हैं। वो उनकी नीतियों की मुखर आलोचक भी हैं। कफ़्तानजोलू को आर्दोआन के अपमान के आरोप में 5 साल की सजा सुनाई गई है। यह सजा उन्हें उनके 10 साल पुराने एक ट्वीट को लेकर सुनाई गई है। हालांकि बाद में उनके सजा को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

सेकुलरिज्म की बड़ी समर्थक हैं कफ़्तानजोलू

कफ़्तानजोलू तुर्की की धर्मनिरपेक्ष रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (CHP) की नेता हैं। दूसरी ओर राष्ट्रपति आर्दोआन तुर्की को वापस ख़िलाफत के दौर में ले जाने के हिमायती रहे हैं। बता दें कि ख़िलाफत के जमाने में तुर्की के ख़लीफ़ा दुनिया भर के मुसलमानों के शासक माने जाते थे। ख़लीफ़ा का साम्राज्य इतिहास के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक था। यह एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक फैला था।

पिछले दिनों आर्दोआन ने देश के एक पुराने चर्च हागिया सोफिया को मस्जिद में बदल दिया था। जिसके बाद उनके विरोधियों ने उन्हें ‘नया ख़लीफ़ा’ का तमगा दिया था।

आर्दोआन की पार्टी को बुरी तरह हराया था

50 साल की कफ़्तानजोलू के नेतृत्व में 2019 में इस्तांबुल के मेयर के चुनाव में CHP ने बड़ी जीत हासिल की थी यहां पर आर्दोआन की पार्टी 25 साल से सत्ता में थी। 2013 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भी कफ़्तानजोलू ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

कफ़्तानजोलू के समर्थकों को मानना है कि राष्ट्रपति आर्दोआन उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डर कर उन्हें फंसा रहे हैं। कफ़्तानजोलू खुद भी अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता चुकी हैं। बता दें कि पश्चिमी देश और मानवाधिकार संस्थाएं अक्सर आर्दोआन पर राजनैतिक विरोधियों को परेशान का आरोप लगाते रहे हैं।

ख़िलाफत है आर्दोआन का सपना, कश्मीर पर बोले थे

आर्दोआन तुर्की को ख़िलाफत के दौर जितना शक्तिशाली बनाना चाहते हैं। लंबे समय तक तुर्की पर शासन करने के बाद अब वे खुद को दुनिया भर के मुसलमानों के नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ साल पहले पाकिस्तान और मलेशिया के साथ मिल कर एक गुट भी बनाया था। ख़िलाफत का सपना संजोए आर्दोआन कश्मीर के मसले पर मुखर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच भारत के खिलाफ आवाज उठाई थी। दूसरी ओर कफ़्तानजोलू जैसी टर्किश नेता देश को सेकुलर और वैश्विक विवादित मसलों से दूर रखना चाहती हैं।