• Hindi News
  • Women
  • Are Men Responsible For The Increasing Demand For Electricity In India? Gender Difference Seen In Electricity Consumption

गहराया ब्लैकआउट का खतरा:क्या भारत में बिजली की बढ़ती मांग के पीछे पुरुष जिम्मेदार? जानिए, एक दिन में कितनी बिजली इस्तेमाल करते हैं पुरुष और महिलाएं

5 दिन पहलेलेखक: पारुल रांझा
  • कॉपी लिंक

देश एक बार फिर बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा है। कोयले का स्टॉक खत्म होने की बात हो रही है। कई राज्यों में ग्रामीण से लेकर शहरों तक में जबर्दस्त बिजली कटौती हो रही है। ऐसे में इसका असर महिलाओं से ज्यादा पुरुषों पर पड़ रहा है। आम धारणा यही है कि महिलाएं घर के काम करती हैं और पुरुष ज्यादातर बाहर का। इसलिए महिलाएं ही बिजली का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करती होंगी, लेकिन ऐसा नहीं है। भारतीय घरों में इलेक्ट्रिसिटी यूज महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा करते हैं।

साइंस मैगजीन 'नेचर' में छपी अमेरिका की कार्नेगी यूनिवर्सिटी की रिसर्च की मानें तो घरों में पुरुषों के इस्तेमाल के उपकरण ज्यादा होते हैं। गरीब से गरीब घरों में भी कई सारे पंखे और लाइट्स हैं, लेकिन बहुत कम घरों की रसोई में पंखे और लाइट्स की व्यवस्था है।

कौन ज्यादा एप्लाइंसिस यूज करता है?
इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने बिजली से लैस परिवारों की 30 से अधिक महिलाओं का इंटरव्यू लिया। इन महिलाओं ने बताया कि हर घर में किस तरह के एप्लाइंसिस का यूज किया जाता है और आमतौर पर इन्हें पुरुष यूज करते हैं। एप्लाइंसिस को तीन कैटेगरी में बांटा गया, जिसमें पुरुषों द्वारा सबसे ज्यादा यूज करने वाले उपकरण, महिलाओं द्वारा सबसे ज्यादा यूज किए जाने वाले उपकरण और पंखा, लाइट, एसी, फ्रिज, माइक्रोवेव, टीवी जैसे न्यूट्रल उपकरण शामिल किए गए।

इसमें ये बात सामने आई कि इलेक्ट्रिसिटी एप्लाइंसिस को सबसे ज्यादा पुरुषों ने यूज किया। इतना ही नहीं, पंखा और बल्ब जैसे कम लागत वाले एप्लाइंसिस के इस्तेमाल में भी जेंडर डिफरेंस देखने को मिला।

गूगल सर्च में इतनी बिजली होती है खर्च
गूगल सर्च के जरिये रोजाना छोटी-छोटी चीजों की जानकारी लेना आम बात हो गई है। ये बात जानकर हैरानी होगी कि एक गूगल सर्च पर खर्च होने वाली बिजली से 11 वॉट का एक सीएफएल बल्ब एक घंटे तक जल सकता है। ये बात जर्मनी की इंटरनेट कंपनी स्ट्राटो के शोध में सामने आई। गूगल के डेटा सेंटर्स, सर्वर्स और सर्च रिक्वेस्ट पर गौर करें तो मालूम होता है कि इंटरनेट यूज कार्बन उत्सर्जन का एक मुख्य कारण है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने भी अपनी स्टडी में इस दावे को सही माना। अगर बात गूगल की करें तो एक दिन में करीब साढ़े तीन अरब लोग कुछ न कुछ सर्च करते हैं। ये करीब 40% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।

बिजली खपत के रिकॉर्ड बना रही दिल्ली
कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन में जहां राजधानी में लोगों ने घरों में रहकर बिजली की खपत कम की। वहीं, अनलॉक होते ही दिल्ली में बिजली खपत का रिकॉर्ड बनने लगा। ताजा आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि जुलाई से सितंबर के बीच पीक अवर में इलेक्ट्रिसिटी डिमांड साल 2020 की इसी अवधि की तुलना में 53% थी। यानी इन तीन महीनों में लोगों ने पिछले साल के मुकाबले 53% ज्यादा बिजली की खपत की।

हाल ही में नॉर्थ दिल्ली में विद्युत सप्लाई कंपनी ने उपभोक्ताओं को मैसेज भेजा था कि सूझबूझ से साथ बिजली यूज करें। कोयले की कमी के चलते जनरेशन प्लांट्स में बिजली कम पैदा हो रही है। दिल्ली की रहने वाली रेखा सिंह बताती हैं कि बिजली सप्लाई बाधित होने से वर्क फ्रॉम होम भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कोयला पावर प्लांट से महिलाएं हो रही एनीमिक
भारत में बिजली उत्पादन उद्योग कोयले पर बहुत ज्यादा निर्भर है। एक शोध की मानें तो छोटे बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की वजह कोयला आधारित पावर प्लांट हैं। इन बिजली इकाइयों से होने वाले वायु प्रदूषण से एनीमिया का खतरा बढ़ रहा है। खासकर वायु प्रदूषण लेवल सर्दियों के दौरान बढ़ने लगता है। इससे कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं, जिनमें से एनीमिया भी एक है। एक्सपर्ट्स की मानें तो प्रदूषण से पुरानी सूजन रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन पर असर डाल सकता है। सूजन बढ़ने के कारण एनीमिया का खतरा बढ़ता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
नोएडा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के मुख्य अभियंता वीएन सिंह बताते हैं कि वर्तमान में सेक्टरों में बिजली 24 घंटे सप्लाई हो रही है। अगर कभी समस्या होती है तो उस प्रभावी ढंग से हल किया जाता है। हालांकि, कोयले की कमी से पैदा होने वाले बिजली संकट को लेकर बात सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि प्रदेश में मौजूदा समय में मांग के मुकाबले बिजली की आपूर्ति में 3,000 से 4,000 मेगावॉट बिजली की कमी है। कोयले की आपूर्ति में सुधार होने पर ही इस समस्या का हल निकल सकता है। इस दिशा में अगर तुरंत पहल न की गई तो सिचुएशन ज्यादा गंभीर हो जाएगी।

घरों में बिजली बचाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

  • केवल जरूरत के समय ही लाइट, पंखे, एसी और अन्य इलेक्ट्रिकल गैजेट्स को स्विच ऑन करें।
  • एलईडी बल्ब का इस्तेमाल करें।
  • नहाते समय जो लोग पानी गर्म करने के लिए गीजर यूज करते हैं वे घर की छत पर सोलर वॉटर हीटर लगवा लें।
  • सर्दियों में हीटर इस्तेमाल करने की बजाय गरम कपड़े पहनें।
  • अधिक ठंडा करने की बजाय एसी का तापमान 25 डिग्री के आसपास सेट करके रखें।
  • जब कम्प्यूटर इस्तेमाल न कर रहे हों तो उसे बंद रखें।
  • कपड़े वाशिंग मशीन में न सुखाकर धूप में सुखाएं।
  • एसी के फिल्टर को समय-समय पर क्लीन करते रहें।
  • गर्म चीजें सीधे फ्रिज में न रखें। उन्हें पहले नॉर्मल टेंपरेचर पर आने दें।
  • कमरे के कोने में बैठकर काम करते वक्त टास्क लाइट यूज करें।
खबरें और भी हैं...