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आंखों को पसंद है कमरे से बाहर की दुनिया:दिनभर लाइट ऑन रखते हैं, आंखों में खून के धागे दिख रहे? 10 बार पलकें झपकाएं-बीमारी भगाएं

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन का असर हमारी सेहत पर उस तरह से भी पड़ रहा है, जिस तरफ कई बार हमारा ध्यान नहीं जाता या उस पर कोई चर्चा नहीं करता। इस महामारी की वजह से बच्चे-बूढ़े और जवान सभी घर में कैद होकर रह गए। घर के बड़ों के लिए घर ही ऑफिस बन गया तो बच्चों के लिए कमरे ही स्कूल बन गए। ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्टफोन ने ले ली। घर से बाहर नहीं निकल पा रहे तो टीवी या लैपटॉप ही मन बहलाने का सहारा बन गया। सबकी नजरें स्क्रीन पर ही टिकी हैं जिसका असर हमारी आंखों पर पड़ा है।

आंखों को पसंद है बाहर की दुनिया
सिंगापुर की एक स्टडी के अनुसार, दो घंटे तक धूप में रहने वाले बच्चों में हर समय घर के अंदर रहने वाले बच्चों की तुलना में उनके आंखों की रोशनी कम पाई गई। स्टडी में कहा गया कि सूरज की रोशनी आंखों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे आंखों की उम्र बढ़ती है।

ब्लू लाइट उड़ा रही नींद
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर खराब असर पड़ रहा है। मोबाइल फोन, टैबलेट, टीवी या अन्य किसी गैजेट से निकलने वाली ब्लू लाइट से आंखों में कई समस्याएं पैदा करती है। इससे विजन धुंधला होता जाता है। कोशिश करनी चाहिए कि दिन के समय कमरे में नेचुरल लाइट यानी सूर्य की रोशनी रहे।

लोगों में इन दिनों कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मरीज बढ़े हैं। इसके अलावा ब्लड विजन की समस्या भी देखने को मिल रही है।
लोगों में इन दिनों कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मरीज बढ़े हैं। इसके अलावा ब्लड विजन की समस्या भी देखने को मिल रही है।

पलकें कम झपकने से हो सकती है समस्या
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम में आंखों में ड्राइनेस बढ़ जाती है I कंप्यूटर पर तीन घंटे या उससे अधिक काम करने वाले व्यक्ति को इसका खतरा अधिक होता है I आंखों में ड्राइनेस की मुख्य वजह कंप्यूटर और मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताना और काम के दौरान पलकें कम झपकना है। आंखों में जब ड्राइनेस बढ़ती है तो बार-बार ऐसा महसूस होता है कि है कि आंख में कुछ गिर गया है, जबकि ऐसा होता नहीं है। इस स्थिति में आंखों को तुरंत मिनरल वॉटर से या साफ ठंडे पानी से धोना चाहिए। आंखों को रगड़ने से बचें नहीं तो ज्यादा नुकसान हो सकता है।

आंखों में ड्राइनेस की मुख्य वजह कंप्यूटर और मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताना और काम के दौरान पलकें कम झपकना है।
आंखों में ड्राइनेस की मुख्य वजह कंप्यूटर और मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताना और काम के दौरान पलकें कम झपकना है।

हर मिनट में 10 बार झपकाएं पलकें
हमलोग अपनी आंखों की पलकें बहुत कम झपकाते हैं। हर एक बार पलक झपकाने से हमारी आंखों में पानी आता है। जिससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या नहीं होती। हमारी आंखें एक बंजर जमीन की तरह होती हैं जहां बैक्टीरिया बढ़ता है। बहुत अधिक स्क्रीन देखने, बहुत कम नींद लेने, तनाव और कई अन्य कारणों से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स भी हो सकते हैं। आई स्पेशलिस्ट कहते हैं कि एक मिनट में कम से कम दस बार से ज्यादा पलकें झपकाना जरूरी है।

हर एक बार पलक झपकाने से हमारी आंखों में पानी आता है। जिससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या नहीं होती।
हर एक बार पलक झपकाने से हमारी आंखों में पानी आता है। जिससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या नहीं होती।

आंखों में खून के धागे जैसे दिखना खतरनाक संकेत
इस लाइफस्टाइल की वजह से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मरीज बढ़े हैं। इसके अलावा ब्लड विजन की समस्या देखने को मिल रही है, जिसमें आंखों में खून के लाल धागे से नजर आने लगते हैं। गुरुग्राम मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर आदित्य के मुताबिक यह समस्या गंभीर हो सकती है। यह आंखों की धमनियों में होने वाले इन्फेक्शन की ओर इशारा करता है। इसके अलावा लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखों पर बुरा असर डालती है। अक्सर जो लोग सारा दिन कंप्यूटर पर काम करते हैं, उनमें ये दिक्कत देखने को मिल रही है।

कोरोना ने आंखों को बनाया कमजोर
कोरोना के बाद बड़ी संख्या में लोगों की आंखों में मायोपिया की शिकायत मिली है। वहीं अब बच्चों को भी मायोपिया अपनी चपेट में ले रहा हैं। भारत के लोगों में कोरोना से पहले के समय के मुकाबले अब मायोपिया की शिकायत बढ़ी है। इसकी एक वजह कोरोना आने के बाद लोगों का घरों में रहना और डिजिटल डिवाइस के साथ ज्यादा समय बिताना है। लगातार और लंबे समय तक एक ही चीज पर फोकस करके देखते रहने से आंखों में मायोपिया की शिकायत पैदा हो जाती है।

लगातार सिरदर्द को न करें नजरअंदाज
आंखों में तनाव महसूस होना, लगातार सिर में दर्द रहना, धुंधला दिखाई देना, आंखों में पानी का सूख जाना, गर्दन, पीठ और कंधे में दर्द, आंखों में जलन थकान और आंखे लाल होना कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण हैं।

महिलाएं पहले होती हैं शिकार
स्क्रीन टाइम अधिक होने के साथ ही कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल, कॉन्टेक्ट लेंस के प्रॉपर मॉइश्चराइज ना करना, किसी सर्जरी के कारण, थायराइड के कारण आंखों में ड्राइनेस की समस्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक और कम उम्र में देखने को मिलती है। इसकी वजह हार्मोनल चेंजेस भी होते हैं। अगर आंखों में ड्राइनेस की समस्या को लम्बे समय तक अनदेखा किया जाए तो व्यक्ति अपना विजन खो सकता है। इस स्थिति का जितनी जल्दी पता लग जाएगा जाएगा, उतनी ही आसानी से इसका इलाज संभव है। डिजिटल आई स्ट्रेन के पहचान की देरी करने का मतलब है कि आप एक बड़े खतरे को न्योता दे रहे हैं। आंखों में ड्राइनेस की समस्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक और कम उम्र में देखने को मिलती है। इसकी वजह हार्मोनल चेंजेस भी होते हैं।

कैसे करें बच्चों की आंखों की देखभाल
डॉक्टर खंडेलिया के अनुसार, इस तरह के केस देखने को मिल रहे हैं जहां बच्चे दिन में कई घंटे कंप्यूटर या स्मार्टफोन के सामने बिताते हैं। जिससे, बच्चों की आंखों में तकलीफ होने लगी है। इसलिए माता-पिता को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चों की आंखों को आराम दिलाने के लिए कुछ इस तरह के उपाय अपनाए जा सकते हैं।

बच्चों की आंखों की देखभाल के लिए टिप्स

  • ठंडे पानी से आंखों की सिकाई करें
  • आंखों की मसाज करें।
  • आंखों की एक्सरसाइज करें
  • स्क्रीन टाइम से थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लें
  • ठंडे पानी से आंखों को छींटे मारें

हरी सब्जियों से दूर होगी आंखों की दिक्कत
आहार में सभी पोषक तत्वों को शामिल करें खासतौर पर विटामिन-ए जो कि आंखों के लिए बेहद जरूरी है। ताजा फल, सब्जियां, साबुत अनाज, आंवला, मछली हमारी आंखों के लिए काफी फायदेमंद है। आंखों की रोशनी के लिए मछली को अपनी डायट में शामिल करें। मछली डीएचए का प्राकृतिक स्रोत हैं जो रेटिना में पाया जाने वाला फैटी एसिड है।इसके अलावा बादाम खाना चाहिए। इसमें विटामिन ई होता है जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है।

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