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खिलाड़ी बनने के लिए टॉर्चर सहती हैं लड़कियां:हड्डियां टूटी मगर ट्रेनिंग की, टॉयलेट जाने पर मिली सजा, वजन न बढ़े इसलिए खाना खाकर करती हैं उलटी

नई दिल्ली2 महीने पहले
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ब्रिटेन में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते समय हद से ज्यादा टॉर्चर किया जाता है। महिला खिलाड़ी यौन शोषण का सामना तो करती ही हैं इसके साथ ही उन्हें मानिसक स्तर पर इतना परेशान किया जाता है कि वह कई बीमारियां पाल लेती हैं। इस बात का खुलासा हाल ही में ब्रिटेन की व्हाइट रिव्यू की रिपोर्ट में किया गया है।

टॉयलेट जाने पर मिली सजा, हड्डियां टूटने पर भी करवाई प्रैक्टिस
306 पेज की रिपोर्ट में हजारों खिलाड़ियों की शिकायतों से भरे लेटर लगाए गए हैं। इसमें खिलाड़ियों का नाम तो नहीं लिखा गया है मगर यह साफ बताया गया है कि कैसे एक खिलाड़ी को परफैक्ट जिम्नास्ट बनाने के लिए कोच उनका कई स्तर पर शोषण करते हैं। कुछ खिलाड़ियों की तो हड्डियां टूटने पर भी उनसे प्रैक्टिस कराई जाती। किसी को बार-बार टॉयलेट जाने के लिए सजा दी जाती।

खिलाड़ी को सबसे ज्यादा इस बात की टेंशन रहती कि उसे अपना वजन एक जैसा रखना है ताकि उसका खेल प्रभावित न हो। कोच उनके ऊपर इस चीज का सबसे ज्यादा दबाव बनाते हैं। इस कारण ज्यादातर लड़कियों को इटिंग डिसऑर्डर की बीमारी होती है।

क्या है व्हाइट रिव्यू ?
द व्हाइट रिव्यू एक कमिशन है जिसे ब्रिटेन सरकार के स्पोर्ट्स विभाग ने साल 2020 में गठित किया था। जब ब्रिटेन में बड़ी संख्या में जिम्नास्ट ने ट्रेनिंग के दौरान शोषण, भेदभाव और छेड़खानी की शिकायत की। इन मुद्दों की जांच करने और संज्ञान लेने की मांग उठाई तब यह कमिशन बनाई गई।

इस रिपोर्ट में खिलाड़ियों की पहचान बताए बिना उनकी शिकायत को शामिल किया गया है। न ही इस रिपोर्ट में कोच की पहचान बताई गई है।
इस रिपोर्ट में खिलाड़ियों की पहचान बताए बिना उनकी शिकायत को शामिल किया गया है। न ही इस रिपोर्ट में कोच की पहचान बताई गई है।

रात को खूब सारा खाना खाती, सुबह टॉयलेट में उलट आती
खिलाड़ियों के साथ होने वाले टॉर्चर की दास्तां बताते हुए एथलीट निकोल पेवियर ने बीबीसई स्पोर्ट्स से इंटरव्यू में कहती हैं कि यह किसी डरावने सपने जैसा है। वह मात्र 14 साल की थी जब उन्हें ब्लूमिया नाम की बीमारी हो गई थी। वह अपने वजन को लेकर इतनी परेशान रहती थी कि उन्हें इटिंग डिसऑर्डर की बीमारी लग गई। वह रात को बहुत सारा खाना खा लेती थीं और फिर उसे पचा नहीं पाती थी और वजन को कम करने की चिंता में टॉयलेट जाकर उस खाने को उलट आती थीं।

इस तरह तीन साल तक मानसिक शोषण झेलने के बाद आखिर में निकोल ने स्पोर्ट्स से ही संन्यास ले लिया। उन्हीं की तरह ब्रिटेन की ज्यादातर लड़कियों का हाल है।

कोच हमें मारते थे, चोट लगने पर भी जबरदस्ती प्रैक्टिस करवाते
वह बताती हैं कि कई बार गलती करने पर कोच हमें मारते। यहां तक की अगर हमें चोट लग जाए तो वह उसे अनसुना कर देते। जबरदस्ती प्रैक्टिस करने को कहते। निकोल बताती हैं कि एक बार उनके बैक में दिक्कत हो गई थी। मैं जैसे ही फ्लोर पर लेटी तो मेरी बैक में बहुत तेज दर्द होने लगा और मैं दर्द से चिल्ला रही थी। मगर मेरे कोच ने मुझे पहले अपनी रूटीन प्रैक्टिस करने के लिए कहा। यहां तक की कोच ने मेरी मां को फोन कर शिकायत कर दी। कहां ये ट्रेनिंग में वो काम नहीं कर रही जो इसे कहा जा रहा है।

जब निकोल डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने मेरे लोअर बैक पर स्ट्रेस फ्रैक्चर बताया। मगर कोच का यही रवैया था कि हमें जो हुआ है वह हमारी ही गलती की वजह से हुआ है।

जरा भी वजन बढ़ा तो पेरेंट्स से कहा डाइट शुरू करें
जिम्नास्ट्स का हफ्ते में दो दिन वजन नापा जाता है। इस बीच अगर किसी का भी वजन 1 किलोग्राम भी बढ़ा हुआ मिलता तो उसके पेरेंट्स को फोन कर खिलाड़ी को डाइट पर रखने को कहा जाता।

निकोल कहती हैं कि उन्हें वजन नापने की मशीन से ही डर लगने लगा था। वह घर में तो यह मशीन रखती ही नहीं है यहां तक की डॉक्टर के पास जाने पर भी वजन लेने से आज भी डरती हैं। यह मशीन उन्हें ट्रेनिंग के उन काले दिनों की याद दिलाते हैं, जिनसे वह बचना चाहती हैं।