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बच्चा च्यूइंग गम से बबल बनाए तो खुश न हों:मुंह में फट कर श्वास नली को कर सकता है डैमेज, जान का भी खतरा

4 महीने पहले
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  • कभी सोचा है कि बलून भी किसी बच्चे की मौत की वजह बन सकता है। या च्यूइंग गम खाने से भी जान जा सकती है।

अक्सर बच्चे पेरेंट्स से कुछ ऐसी डिमांड कर बैठते हैं जो उनके साथ किसी अनहोनी का कारण बन जाती है। उनमें से एक है बैलून और बबल गम। ऐसी खबरें अखबारों, टीवी में दिख जाती हैं कि बलून फुलाते समय फट गया। इसका टुकड़ा बच्चे की सांस की नली में फंसने के कारण उसकी मौत हो गई। कई बार बच्चे बबल गम चबाते-चबाते उसे निगल जाते हैं।

पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. मेजर मनीष मन्नान बताते हैं कि मेडिकल टर्म में इसे फॉरेन बॉडी एस्पिरेशन कहते हैं। मतलब जो चीज सांस की नली में नहीं जानी चाहिए वो चली गई। ऐसे केसे बहुत आते हैं।

बैलून और बबल गम से बच्चों को रखें दूर
बैलून और बबल गम से बच्चों को रखें दूर

सांस की नली बहुत छोटी होती है। इसमें कुछ चला जाये तो गला घोंटने जैसी फीलिंग आती है जिसके कारण बच्चे की तुरंत मौत भी हो सकती है। कभी-कभी ऐसे केस में थोड़ा समय मिल जाता है जिसका इलाज ब्रोंकोस्कोपी के जरिये किया जा सकता है।

ब्रोंकोस्कोपी क्या है

सांस की नली को देखने के लिए ब्रोंकोस्कोपी किया जाता है। इसमें नाक या मुंह के जरिए एक ब्रोंकोस्कोप डालते हैं जिसमें माइक्रो कैमरा लगा होता है। इससे ट्यूमर्स, इंफेकशन, सांस की नली या फेफड़ों की स्थिति का पता लगाया जा सता है।

ब्रोंकोस्कोपी टेस्ट का खर्च

AIIMS की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक ब्रोंकोस्कोपी की फीस 500 रुपये है, जबकि प्राइवेट हॉस्पिटल में 6000 रुपए से शुरू होता है।

डॉ मनीष कहते हैं कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसी चीजें न दें जिसके कारण किसी अनहोनी का खतरा हो। बच्चे को अगर बलून के साथ खेलते देखें तो उन पर नजर रखें। साथ ही उसे मुंह में न डालने दें। बच्चे को मूंगफली का दाना, बादाम, अखरोट, टॉफी जैसी चीजें सॉलिड फॉर्म में कभी न दें।

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