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सिजेरियन डिलीवरी में उछाल:4 साल में 30% का इजाफा, प्राइवेट अस्पताल 50% ऑपरेशन से बच्चे करा रहे पैदा, WHO बोला- यह ठीक नहीं

नई दिल्लीएक महीने पहले
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आमतौर पर डिलीवरी के वक्त कॉम्पि​लीकेशंस होने पर सिजेरियन-सेक्शन का सहारा लिया जाता है ताकि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। लेकिन अब भारत में सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के मुताबिक, देश में चार साल में सिजेरियन डिलीवरी में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस के मुताबिक, सिजेरियन डिलीवरी की दर 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्राइवेट हॉस्पिटल में हर दो में से एक महिला सी-सेक्शन से बच्चे को जन्म दे रही है, जबकि देश में हर पांच में से एक महिला की​ सिजेरियन डिलीवरी होती है।

​​​हर पांच में से एक महिला की होती है सिजेरियन डिलीवरी
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक, देश में साल 2014-15 के बीच सिजेरियन डिलीवरी की दर 17.2 फीसदी थी, जो साल 2019-2020 में बढ़कर 21.5 फीसदी पहुंच गई। इसका मतलब है कि प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म देने वाली प्रत्येक 5 में से 1 महिला की सिजेरियन डिलीवरी होती है।

सबसे अधिक सी-सेक्शन डिलीवरी वाले शीर्ष राज्य
देश के कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां प्राइवेट अस्पतालों में 10 में से 7 या 8 बच्चे सिजेरियन डिलीवरी से जन्म लेते हैं। ​प्राइवेट हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी से पश्चिम बंगाल में 82.7%, जम्मू-कश्मीर में 82.1 तमिलनाडु में 81.1 अंडमान निकोबार में 79.2%, असम में 70.6% बच्चों का जन्म होता है। वहीं ओडिशा 70.7%, पंजाब 55.5%, तमिलनाडु 63.8% और कर्नाटक 52.5% आदि उन राज्यों में शामिल हैं, जहां के प्राइवेट हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी की दर बढ़ी है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक, देश में सी-सेक्शन से डिलीवरी दर तेजी से बढ़ रही है। (फोटो- प्रतीकात्मक)
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक, देश में सी-सेक्शन से डिलीवरी दर तेजी से बढ़ रही है। (फोटो- प्रतीकात्मक)

कई बार बेबी लेट होने से भी करानी पड़ती है सिजेरियन डिलीवरी

गुरुग्राम में रहने वाली श्वेता दुबे दो बच्चों की मां हैं। श्वेता बताती हैं कि बेटे के वक्त हमने पूरी कोशिश की थी कि डिलीवरी नॉर्मल हो जाए, लेकिन डॉक्टर की दी हुई डेट निकल गई। पौने 10 महीने बीत गए। ​बच्चे का वजन ज्यादा था, इसलिए बाद में डॉक्टर से परामर्श लेकर सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी। बेटे के बाद दूसरे बच्चे के लिए हमने लंबा गैप लिया ताकि नॉर्मल ​डिलीवरी हो जाए। लेबर पेन शुरू होने पर अस्पताल पहुंची तो डॉक्टर ने कहा कि टांके खुलने का रिस्क रहेगा। यह सुनते ही मेरे पति ने कहा कि मैं कोई रिस्क नहीं ले सकता, आप सिजेरियन डिलीवरी ही करा दीजिए। श्वेता कहती हैं कि मैंने खूब रेस्ट किया, जिससे जल्दी रिकवरी हो गई।

डिलीवरी के बाद रहने लगा रीढ़ की हड्डी में दर्द
भोपाल की शशि नायर बताती हैं, मेरी दोनों बेटियों का जन्म सिजेरियन से हुआ है। बड़ी बेटी की गर्दन नाल में उलझ गई थी, जिसके बाद सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी। उसके बाद दूसरी बेटी का जन्म भी सी-सेक्शन से ही हुआ। ​डिलीवरी के बाद से वजन बढ़ गया। रीड़ की हड्डी में दर्द, पैरों में दर्द और झुककर काम करने में ​बहुत दिक्कत होती है।

क्यों बढ़ रही सिजेरियन डिलीवरी दर?
1. ज्यादा उम्र में कंसीव करना एक बड़ी वजह
मानस हॉस्पिटल की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. अपराजिता श्रीवास्तव बताती हैं, ''सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने के पीछे बदलती लाइफस्टाइल एक बड़ी वजह है। मौजूदा समय में लड़कियां देर से शादी करती हैं और देर से मां बनती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान एक्सरसाइज कम और रेस्ट ज्यादा करती हैं। इस वजह से भी उनके लिए नॉर्मल डिलीवरी के ​जरिये मां बनना मुश्किल होता है।

2. मां को ​शुगर, बीपी या फिर कोई गंभीर ​बीमारी होना
गुरुग्राम स्थित क्लाउडनाइन हॉस्पिटल की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. रितु सेठी के मुताबिक, मौजूदा वक्त में महिलाओं की फिजिकली एक्टिविटीज कम हो गई हैं। इससे वे शुगर, बीपी, वजन बढ़ जाना या फिर कंसीव करने में दिक्कत होने जैसी समस्या से जूझ रही हैं। ऐसी महिलाएं कोई रिस्क लेना नहीं चाहती है। ऐसे मामलों में मां या बच्चे की जान को खतरा हो तो सी-सेक्शन डिलीवरी कराने की परामर्श दी जाती है। जब मां बच्चे को पुश नहीं कर पा रही हो या फिर बच्चे की धड़कने अनस्टेबल हो, तब भी सिजेरियन डिलीवरी की जाती है।

3. दूसरी बार भी सिजेरियन
जिन महिलाओं का पहला बेबी सिजेरियन डिलीवरी से दुनिया में आया है, उनमें ज्यादातर मामलों में उनकी दूसरी डिलीवरी भी सी-सेक्शन से होती है।

4. खास मुहूर्त भी है एक वजह
डॉक्टर के मुताबिक, कुछ कपल चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी खास दिन या विशेष मुहूर्त में पैदा हो। इसलिए भी महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी कराती हैं।

कुछ कपल चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी खास दिन या विशेष मुहूर्त में पैदा हो, इसलिए भी कराते है सिजेरियन डिलीवरी। (फोटो- प्रतीकात्मक)
कुछ कपल चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी खास दिन या विशेष मुहूर्त में पैदा हो, इसलिए भी कराते है सिजेरियन डिलीवरी। (फोटो- प्रतीकात्मक)

कब करानी चाहिए सिजेरियन डिलीवरी

  • शिशु के दिल की धड़कन असामान्य हो।
  • गर्भ में बच्चा उल्टा या तिरछा हो गया हो।
  • बच्चे के गले में कॉर्ड यानी नाल फंस गया हो।
  • बच्चे को गर्भ में ठीक से ऑक्सीजन न मिल पा रही हो।
  • प्री-मैच्योर डिलीवरी के लिए सी-सेक्शन का सहारा लिया जा सकता है।
  • मां को ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या थायरॉयड जैसी कोई स्वास्थ्य समस्या हो।
  • बच्चे ने पेट में पॉटी कर ली हो, जिससे उसे इंफेक्शन का खतरा हो।

सी-सेक्शन के जोखिम

  • सी-सेक्शन के बाद रिकवरी में लगता है समय।
  • महिलाओं में खून की कमी हो सकती है।
  • ब्रेस्ट फीडिंग कराने की अवस्था में आने में समय लग सकता है।
  • नार्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन का खर्च बहुत अधिक होता है।
  • पहला बच्चा सिजेरियन हो तो दूसरे के भी सिजेरियन होने का खतरा रहता है।
  • सिजेरियन के बाद कई बार ​बेबी को जॉन्डिस यानी पीलिया का खतरा हो सकता है।

डॉ. अपराजिता कहती हैं कि डॉक्टर की सलाह पर ही सिजेरियन डिलीवरी करानी चाहिए। जब तक डॉक्टर ने सलाह नहीं दी है, तब तक सिजेरियन डिलीवरी कराने से बचें। सिजेरियन कराने के बाद हेल्दी डाइट लें, जिससे जल्दी रिकवरी होगी। बार-बार उठने-बैठने और ज्यादा शारीरिक श्रम वाले काम बिल्कुल ना करें। डॉक्टर की ओर से दी गईं सभी हिदायत को अच्छे से फॉलो करें।