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कोरोना से आफत, पॉलिसी से राहत:भारत में महिलाओं के लिए ज्यादा जानलेवा रहा कोरोना, नई गाइडलाइन पर बनेगी मुआवजे की नीति

नई दिल्ली4 महीने पहले
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जानलेवा कोरोना वायरस - Dainik Bhaskar
जानलेवा कोरोना वायरस

भारत का नाम उन देशों में शामिल है जिन्होंने कोरोना वायरस का कहर झेला। इस साल अप्रैल से लेकर जून तक दूसरी लहर के दौरान भारत में कोरोना का सबसे खराब रूप देखने को मिला। काफी लोगों को जान गंवानी पड़ी। हालात ये हो गए थे कि अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड और ऑक्सीजन तक की कमी हो गई।

महिलाएं ज्यादा प्रभावित

प्रतिष्ठित मैगजीन द लैंसेट के ग्लोबल डेटा के मुताबिक दुनिया में कोरोना से महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मौत ज्यादा हो रही है, लेकिन कुछ ऐसे भी देश हैं जहां यह आंकड़ा उलटा है। भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आने से मरने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। 30 सितंबर, 2020 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 64 लाख से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए गए। वहीं भारत में, पुरुषों में COVID-19 के मामलों में मृत्यु दर 2·9% रही जबकि महिलाओं में 3·3% दर्ज की गई है।

डेथ सर्टिफिकेट की गाइडलाइंस

इस बीच, सरकार ने कोविड डेथ सर्टिफिकेट को लेकर गाइडलाइंस जारी की है। गाइडलाइंस के मुताबिक रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 30 दिन के भीतर मरीज की मौत होती है तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। कोरोना पॉजिटिव मरीज की अगर जहर से, सुसाइड से या किसी हादसे में मौत हो जाती है तो उसे कोरोना से मृत्यु नहीं माना जाएगा। उन मामलों को कोरोना केस माना जाएगा जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान या डॉक्टर RT-PCR टेस्ट, मॉलिकुलर टेस्ट, रैपिड एंटीजन टेस्ट या क्लिनिकल टेस्ट के जरिये कोरोना पॉजिटिव घोषित करे। यह खबर उन कोरोना पीड़िता महिलाओं के परिजनों के लिए राहत भरी है जिन्होंने अपनी जान गंवा दी।

कई परिवारों के सामने संकट
कई परिवारों के सामने संकट

कोर्ट में चली बहस

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने यह गाइडलाइंस तैयार की है। मई के अंतिम सप्ताह में सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह का कहना था कि अस्पतालों में कोविड-19 से मरने वालों का कारण डेथ सर्टिफिकेट में फेफड़ा या दिल की बीमारी बताई जा रही है या किसी अन्य बीमारी का जिक्र रहता है। जो कुछ भी हो, वो डेथ सर्टिफिकेट में स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए ताकि परिजनों को भविष्य में मिलने वाला फायदा मिल सके। मृत्यु प्रमाण पत्र में कोविड का मौत के कारण के तौर पर उल्लेख किया जाना चाहिए।

जस्टिस शाह मामले की सुनवाई करने वाली जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच का हिस्सा रहे। उन्होंने COVID-19 में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह बात कही थी। जस्टिस शाह ने केंद्र सरकार से कहा था कि वो कोरोना मामले में डेथ सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर एक नीति तैयार करे। जस्टिस शाह ने कहा कि अगर मौत का वास्तविक कारण कोविड है और डेथ सर्टिफिकेट पर कुछ और दर्ज है और कोरोना पीड़ितों के परिजनों को इसके लिए दर-दर भटकना पड़े, यह उचित नहीं है।

याचिकाकर्ता की दलील

असल में, इस मामले में याचिकाकर्ता और वकील गौरव कुमार बंसल का कहना था कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 (3) के तहत पीड़ित परिवारों के लिए 4 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। कोरोना महामारी भी एक आपदा है। उनकी दलील थी कि इस वायरस ने आम नागरिकों से लेकर डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस अधिकारियों और अन्य लाखों लोगों की जान ली है। कई अपने परिवार का सहारा थे।

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