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स्पर्म डोनर की जांच-पड़ताल:75% कपल डॉक्टर से पूछते हैं डोनर की जाति, धर्म, रंग और पढ़ाई को लेकर सवाल

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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विक्की डोनर फिल्म तो सबको याद होगी, जिसमें आयुष्मान खुराना ने स्पर्म डोनर की भूमिका निभा कर दंपतियों के जीवन में खुशियां लाने का काम किया था। इस काम के लिए उन्हें अच्छा खासा पैसा भी मिलता है। यह जानकर हैरानी होगी कि स्पर्म डोनेशन में भी जात-पात देखी जाती है। दिल्ली एम्स में डॉक्टर रितु शुक्ला ने बताया कि लगभग 65 से 80 फीसदी लोगों की यह डिमांड होती है कि स्पर्म डोनर पढ़ा लिखा और उसका रंग गोरा हो। कई कपल के यह भी सवाल होते हैं कि स्पर्म किस धर्म का है और किस खानदान से संबंध रखता है। कुछ लोग यह भी पूछते हैं कि यह ऊंचे जाति का है या नहीं। लोग कई तरह से स्पर्म की जाति और धर्म की जांच पड़ताल करते हैं। डॉक्टर कहती हैं कि पहले यह इसमें बड़े शहरों के ही लोग आते थे लेकिन अब हर राज्य से लोगों की डिमांड बढ़ रही है।

स्पर्म डोनेशन बिलकुल ब्लड डोनेशन की तरह होता है। स्पर्म डोनेशन से पहले व्यक्ति का पूरा मेडकिल चैकअप होता है।
स्पर्म डोनेशन बिलकुल ब्लड डोनेशन की तरह होता है। स्पर्म डोनेशन से पहले व्यक्ति का पूरा मेडकिल चैकअप होता है।

शौक पूरा करने के लिए कई युवा बन रहे स्पर्म डोनर
पहले जिस काम को लेकर झिझक थी, लोग चोरी छिपे करते थे, अब ये शौक बेपर्दा हो रहा है। बेहिचक युवा इस काम के लिए आगे आ रहे हैं। पुरुषों के बीच मानसिकता थी कि स्पर्म डोनेशन किसी तरह की कमजोरी का कारण बन सकता है। समय के साथ स्पर्म डोनर जागरूक हुआ है। इसका बढ़ता बाजार स्पर्म डोनर की किसी भी शर्त पर पहचान जाहिर न होने की गारंटी भी देता है।

स्पर्म डोनर की किसी भी शर्त पर पहचान जाहिर न होने की गारंटी भी देता है।
स्पर्म डोनर की किसी भी शर्त पर पहचान जाहिर न होने की गारंटी भी देता है।

स्पर्म डोनेशन का कोई साइड इफेक्ट नहीं
बंगलौर के फ्रोजेन सेल इनफर्टिलिटी सेंटर के डॉक्टर सौरभ कुमार ने बताया कि स्पर्म डोनेशन से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। बस कुछ समय के लिए साइकोलॉजिकली लगता है कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा या उन्हें कमजोरी महसूस हो रही है। कई केस ऐसे भी आते हैं जिसमें लगातार स्पर्म डोनेशन करने वाला इंसान इमोशनली परेशान हो जाता है। उसे लगता है कि उसका बच्चा कहीं और पल रहा होगा। कई लोगों ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चे को देखना चाहते हैं। लेकिन स्पर्म डोनेशन की यह शर्त होती है कि आपको यह नहीं बताया जाएगा कि आपका स्पर्म किस परिवार को दिया गया है, न हीं आप उस बच्चे से मिलने की मांग करेंगे। ज्यादातर युवा यह बात अपने घर में भी नहीं बता पाते हैं कि वह स्पर्म डोनेट कर रहे हैं।

स्पर्म डोनेशन की यह शर्त होती है कि आपको यह नहीं बताया जाएगा कि आपका स्पर्म किस परिवार को दिया गया है, न हीं आप उस बच्चे से मिलने की मांग करेंगे।
स्पर्म डोनेशन की यह शर्त होती है कि आपको यह नहीं बताया जाएगा कि आपका स्पर्म किस परिवार को दिया गया है, न हीं आप उस बच्चे से मिलने की मांग करेंगे।

कोरोना के समय बेरोजगारी के दौर में किया स्पर्म डोनेट
अमेरिकी कंपनी में काम कर चुके संजय बताते हैं , “ मैं कोरोना काल में इंडिया लौट आया। अचानक जॉब जाने की वजह से घर चलाना मुश्किल हो गया था। फेसबुक सर्फिंग करते समय स्पर्म डोनेशन की मांग को लेकर पोस्ट पढ़ी, उसमें दिए गए कॉन्टेक्ट नंबर पर कॉल किया। पत्नी को बिना बताए उस पते पर गया। वहां जाकर मुझे अपने आप में बुरा महसूस हो रहा था, लेकिन मेरे पास स्पर्म डोनेशन के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। मैंने आजतक अपने घर वालों को इस बारे में नहीं बताया है। मेरे रिश्तेदारों को अगर ये बात पता लगे तो शायद मुझे घर से ही निकाल दें। मैं अपनी पत्नी को भी आजतक ये बात नहीं बता पाया हूं। वैसे मेरी अपनी आठ साल की बेटी है। "

पॉकेट मनी के लिए बना स्पर्म डोनर
दिल्ली के एक यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने बताया कि ओडिशा के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। स्कॉलरशिप की वजह से इतने बड़े शहर में पढ़ना मुमकिन हो पाया। यहां के लोगों का लाइफस्टाइल बिल्कुल अलग और एडवांस था। एक दिन हॉस्टल में किसी दोस्त ने बताया कि कुछ दोस्त स्पर्म डोनेट कर पैसे कमा रहे हैं। जिनसे उनका खर्चा आसानी से निकल रहा है। जब मैंने यह सुना तो मेरे लिए यह बेहद चौंका देने वाला था। बाद में मेरे दोस्तों ने काफी समझाया कि यह कोई गलत काम नहीं है।

खुद को काफी समझाने के बाद मैं अपने एक दोस्त के साथ हॉस्पिटल गया। जून की दोपहरी में मैं डर से कांप रहा था। सबसे पहले डॉक्टर ने मेरे ब्लड सैंपल लिए और मेरा स्पर्म काउंट चेक किया। इसके बाद मुझे बताया गया कि मैं स्पर्म डोनेशन के लिए फिट हूं। उस दिन मैंने पहली बार स्पर्म डोनेट किया और मैं इतना डर गया था कि बिना किसी को बताए सैंपल काउंटर पर छोड़ बिना पैसे लिए भाग आया। बाद में मैं यह काम लगातार करने लगा और अब मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता और अच्छी इनकम भी होती है।

6 महीने तक फ्रीज़ किया जाता है सीमेन
अगर कोई सीमेन डोनेट करना चाहे तो सबसे पहले उसकी शारीरिक जांच की जाती है कि कहीं उसे कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। आप विवाहित हैं या अविवाहित इसका स्पर्म डोनेशन से कोई संबंध नहीं। आप 18 से 40 साल की उम्र तक स्पर्म डोनेट कर सकते हैं। फिर उस सीमेन 6 महीने तक क्रायो क्रेन में फ्रिज किया जाता है। उसके बाद उस स्पर्म की क्वालिटी चेक की जाती है। फिर उसे फीमेल बॉडी में इंजेक्ट किया जाता है।

सीमेन 6 महीने तक क्रायो क्रेन में फ्रिज किया जाता है। उसके बाद उस स्पर्म की क्वालिटी चेक की जाती है। फिर उसे फीमेल बॉडी में इंजेक्ट किया जाता है।
सीमेन 6 महीने तक क्रायो क्रेन में फ्रिज किया जाता है। उसके बाद उस स्पर्म की क्वालिटी चेक की जाती है। फिर उसे फीमेल बॉडी में इंजेक्ट किया जाता है।

कॉम्प्लेक्शन, कद-काठी और ब्लड ग्रुप की भी दी जाती है जानकारी
सीमेन का वर्गीकरण रंग, कद-काठी और ब्लड ग्रुप के आधार पर ही किया जाता है। यानी डोनेट करने वाले का रंग कैसा है, वह लंबा कितना है और उसका ब्लड ग्रुप कौन सा है।

21 से 35 वर्ष के लोग होते हैं डोनर्स
सीमेन डोनेट करने वालों में 21 से 35 वर्ष के उम्र के युवाओं की गिनती ज्यादा है। इनमें से ज्यादातर युवा कॉलेज स्टूडेंट्स और वर्किंग हैं। इनको सीमेन डोनेट करने के लिए सीमेन के क्वालिटी के अनुसार रुपये मिलते हैं।

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