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कोरोना से निपटने में महिलाएं हैं आगे:कोरोना ने औसत इंसानी जिंदगी कम की, महिलाओं पर कम पड़ा इस महामारी का असर

वॉशिंगटन2 महीने पहले
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जीने की उम्मीद - Dainik Bhaskar
जीने की उम्मीद

जानलेवा कोरोना वायरस ने दुनियाभर में जीवन जीने की उम्मीदों के ग्राफ पर भी कैंची चला दी है। कोविड-19 के चलते लोगों की उम्र की औसत अवधि में कमी दर्ज की जा रही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च में बताया गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जिंदगी जीने की उम्मीद में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।

इंटरनेशनल जर्नल एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च की सह प्रमुख लेखक डॉ. रिद्धि कश्यप ने बताया कि शोध के मुताबिक अधिकांश देशों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में अधिक गिरावट दर्ज की जा रही है। दुनिया के 15 देशों में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में एक साल से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, इसके मुकाबले 11 देशों की महिलाओं की जीवन प्रत्याशा में कमी देखी गई है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद कोरोना बना जिंदगी के लिए खतरनाक

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा 2.2 वर्ष की कमी अमेरिकी पुरुषों की औसत उम्र में आई है। जिंदगी जीने की उम्मीद में सबसे ज्यादा कमी दूसरे विश्व युद्ध के बाद कोरोना की वजह से आई है। रिसर्च में 29 देशों में से 27 में 2019 की तुलना में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। इनमें यूरोपीय देश, अमेरिका, और चिली भी शामिल हैं।

दुनिया भर पर पड़ी कोरोना की मार

जॉन हॉपकिन्सन यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में कोरोना वायरस की चपेट में आने से अब तक करीब पौने पांच करोड़ दम तोड़ चुके हैं। कोरोना वायरस के चलते अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों की जान गई है। इसके बाद ब्राजील और भारत में इस वायरस के चलते सबसे ज्यादा लोगों की जान गई है।

मिडिल इनकम वाले देशों को शोध के दायरे में लाने की अपील

रिसर्च के सह लेखक डॉ. रिद्धि कश्यप ने अपील की कि शोध के दायरे में और देशों को लाया जाना चाहिए। खासकर मध्य इनकम ग्रुप वाले देशों के नागरिकों को इस तरह के शोध में शामिल किया जाना चाहिए।

WHO ने फिर की कोरोना के पैदा होने की जांच की मांग

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की फिर से जांच का फैसला किया है। इसके लिए 20 वैज्ञानिकों की टीम गठित की गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएचओ नए सुबूतों की तलाश के लिए वैज्ञानिकों की एक नई टीम बना रहा है।

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