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मुकुल रोहतगी की मजबूती पत्नी वसुधा:देश के नामी वकील की बेटी, कभी पति और घर के लिए छोड़ा था करियर

नई दिल्ली3 महीने पहले
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सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी जल्द भारत के 16वें अटॉर्नी जनरल बनने वाले हैं। अटॉर्नी जनरल के तौर पर उनका यह दूसरा कार्यकाल होगा। मौजूदा अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल का 30 सितंबर को कार्यकाल पूरा हो रहा है। बता दें कि इस साल जून के अंत में अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ाया गया था।

अटॉर्नी जनरल केंद्र सरकार और देश के सबसे शीर्ष कानून अधिकारी होने के साथ-साथ मुख्य कानूनी सलाहकार होते हैं। ये सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण मामलों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। एडवोकेट मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट के कामयाब वकीलों में से एक हैं। वो एक सुनवाई के लिए अपने क्लाइंट से कम से कम 10 लाख रुपए चार्ज करते हैं। रोहतगी की इस कामयाबी के पीछे उनकी पत्नी वसुधा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। वे हर मुश्किल में अपने पति के साथ खड़ी रहीं और उनका साथ दिया। आइए, जानते हैं, कौन हैं रोहतगी की पत्नी वसुधा रोहतगी-

घर संभालने के लिए छोड़ी थी वकालत

वसुधा रोहतगी एक सीनियर का‌उंसिल रह चुकी हैं। मगर, उन्होंने वकालत को अपने पेशे के तौर पर नहीं चुना था। शादी के बाद उन्होंने करियर से ज्यादा अपने घर को अहमियत दी। पति मुकुल रोहतगी की व्यस्तताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए वकालत छोड़ दी और अपने घर- परिवार की जिम्मेदारी संभाली। मुकुल और वसुधा के बेटे का नाम समीर रोहतगी है। वे फिलहाल दिल्ली फैमिली कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में जाने-माने वकील जी.एल. सांघी की बेटी हैं वसुधा रोहतगी।
सुप्रीम कोर्ट में जाने-माने वकील जी.एल. सांघी की बेटी हैं वसुधा रोहतगी।

देश के नामी वकील की बेटी हैं वसुधा

वसुधा ऐसे परिवार से आती हैं, जो वकालत की दुनिया में बड़ा और चर्चित नाम है। उनके पिता जी.एल. सांघी बेहद नामी वकील रह चुके हैं। उन्होंने देश के सबसे चर्चित केशवानंद भारती केस में अहम भूमिका निभाई थी। केशवानंद भारती वही केस है जिसमें सुप्रीम कोर्ट की आज तक की सबसे बड़ी बेंच बनी थी। इस बेंच ने कहा था कि संविधान के मूल ढांचे से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। जी.एल. सांघी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई चर्चित मुकदमे लड़ चुके हैं, जिनके लिए उनका नाम आज भी लिया जाता है।

भारत के 14वें अटॉर्नी जनरल रहे मुकुल रोहतगी

मुकुल रोहतगी 2014 से 2017 तक भारत के 14वें अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं। 66 वर्षीय रोहतगी ने 2017 में इस पद से इस्तीफा दे दिया था। अधिवक्ता के तौर पर मुकुल रोहतगी कई अहम मामलों में पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने 2002 के गुजरात दंगे में गुजरात सरकार की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा। इसके अलावा मुकुल रोहतगी ने बेस्ट बेकरी केस, जाहिरा शेख मामला, योगेश गौड़ा मर्डर केस में भी पैरवी की थी। रोहतगी महाराष्ट्र सरकार की ओर से सीबीआई स्पेशल जज लोया की मौत के मामले की जांच को लेकर स्पेशल प्रॉसिक्यूटर भी बनाए गए थे।

रोहतगी और अरुण जेटली अच्छे दोस्त रहे हैं

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुकुल रोहतगी और मोदी सरकार में कानून मंत्री रहें अरुण जेटली अच्छे दोस्त थे। रोहतगी ने कई बार अपनी दोस्ती की चर्चा की है। वे अक्सर लोधी गार्डन के चक्कर काटने की घटनाओं का जिक्र किया करते हैं। कई बार ऐसे मुद्दे रहे जिनकी वजह से दोनों के बीच तीखी बहस हो जाया करती थीं, लेकिन दोनों की दोस्ती पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

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