• Hindi News
  • Women
  • Daughter Of Vegetable Seller Became Judge, Never Had Money For Fees, Now 5th Rank In Judicial Service

मुकाम पर महिलाएं:सब्जी बेचने वाली मां की बेटी बनी जज, कानून की पढ़ाई करते वक्त देखा था न्यायधीश बनने का सपना

2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

अंकिता नागर ने अभावों में रहकर भी मुकाम पर पहुंचने का ऐसा जज्बा दिखाया है कि उससे कई युवक-युवतियों की उम्मीदों को भी पंख लगना लाजमी है। हाल ही में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के तहत आयोजित सिविल जज की परीक्षा के परिणाम सामने आए हैं। इसमें इंदौर से अंकिता नागर ने 5वां स्थान हासिल किया है।

अंकिता ने एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि उन्हें एक दिन जज बनना है।
अंकिता ने एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि उन्हें एक दिन जज बनना है।

खास बात यह है कि इंदौर की इस बेटी के माता-पिता सब्जी बेचकर अपना गुजारा करते आ रहे हैं। पर अंकिता ने आर्थिक तंगी को अपनी पढ़ाई पर हावी नहीं होने दिया। वे अपने लगातार अध्ययन के जरिए खुद को ताराशती रहीं और आखिरकार न्यायिक सेवा में शानदार पद पर पहुंचने में कामयाब रहीं।

बचपन में डॉक्टर बनने का देखा था सपना

स्कूल की पढ़ाई के दौरान डॉक्टर बनने का सपना मन में रखने वाली अंकिता नागर कहती हैं कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मैंने डॉक्टरी की पढ़ाई करने की इच्छा छोड़ दी थी। मगर, मेरे लिए इसके अलावा भी कई विकल्प मौजूद थे। मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखा और लगातार प्रयास करती रही।

बाद में कानून की पढ़ाई की तरफ हुआ रुझान

एलएलएम की डिग्री हासिल करने वाली 29 साल की अंकिता नागर ने बताया कि उन्हें कानून की पढ़ाई करने का शुरुआत से शौक रहा है। सिविल जज की परीक्षा को लेकर यह उनका चौथा प्रयास था। इससे पहले वह तीन बार इस परीक्षा में असफल हो चुकी थीं।

29 साल की अंकिता के सामने लक्ष्य पूरा करने के साथ ही समाज के लोगों के सवालों का सामना करने की भी चुनौती रही।
29 साल की अंकिता के सामने लक्ष्य पूरा करने के साथ ही समाज के लोगों के सवालों का सामना करने की भी चुनौती रही।

सब्जी की दुकान पर मां-बाप की मदद करती रहीं अंकिता

अंकिता नागर का परिवार सब्जी ठेला से हुई कमाई से ही पलता है। दुकान पर मां-पिता के साथ अंकिता भी बैठती है। पिता बाहर से सामान लाने में लगे रहते हैं। मां के पास घर और दुकान दोनों की जिम्मेदारी है। पढ़ाई से फुर्सत मिलते ही अंकिता भी यहां मदद के लिए पहुंच जाती है।

शादी के मुद्दे को दिमाग पर हावी नहीं होने दिया

एक इंटरव्यू में अपने मन की बात बताते हुए कहा, पढ़ाई करते-करते शादी की उम्र होने लगी तो लोग मुझसे कहते थे कि पढ़ती रहती हो, कब तक पढ़ोगी? शादी कर लो। पर अंकिता इस तरह की बातों से डिगी नहीं, उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए शादी जैसे विषय को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने दिया। वह लगातार 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। बता दें कि अंकिता के एक भाई और बहन हैं जिनकी शादी हो चुकी है।

माता-पिता का सपना हकीकत में बदला

बेटी की इस उपलब्धि पर मां और पिता दोनों खुश हैं। अंकिता की मां कहती हैं कि हमें अपने समय में पढ़ने का मौका नहीं मिल पाया। पर हमने बेटे बेटियों को पढ़ाने का सपना देखा था जो आज सच हो गया है। 28 साल से सब्जी का ठेला लगा रहे अंकिता के पिता अशोक कुमार नागर ने कहा कि हमारी बेटी एक मिसाल है क्योंकि उसने जीवन में कड़े संघर्ष के बावजूद हिम्मत नहीं हारी।