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प्यार का पोस्टमॉर्टम-3:पंचायत अधिकारी की ट्रेनिंग के दौरान पनपा प्यार, सात फेरे लिए, बीच चौराहे अपनों ने ही पति का गला काट डाला

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: दीक्षा प्रियादर्शी
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प्यार के पोस्टमॉर्टम-3 में आज पढ़िए गोरखपुर में रहने वाली दीप्ति मिश्रा और अनीश की दर्दनाक कहानी.. जिनका प्यार पूरा होकर भी अधूरा रह गया।

दीप्ति कहती हैं, अनीश से जब भी मिलती थी, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहता था। कम समय के लिए ही सही, मैं एक अलग दुनिया में होती थी। वो कई बार मुझे जताते नहीं थे, लेकिन मैं जानती थी कि इस जनम में कोई दूसरा मुझे अनीश जितना प्यार नहीं कर सकता। दबाव में ही सही जब शादी को झूठा बताते हुए मुझसे उन पर केस करवाया गया। एक पल के लिए मुझे लगा था कि शायद प्रेशर या परेशान होकर वो मुझे छोड़ देंगे लेकिन उन्होंने कहा ‘किसी भी कीमत पर न तो वे तलाक देंगे और न ही शादी को फॉल्स प्रूव होने देंगे।’ हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। साथ जीवन बिताना चाहते थे, साथ घर सजाना चाहते थे। हर प्यार करने वाले की एक ही चाहत होती है कि उनकी शादी हो सके, वो जीवन भर साथ रह सकें। अनीश और मैंने आने वाले बच्चे के लिए भी ना जाने कितने सपने देखे थे। मुझे क्या पता था कि मैं जीवन भर उन सपनों को अकेली ही पूरा करूंगी। मुझे क्या पता था कि मुझे आशीर्वाद देने वाले हाथ ही एक दिन मेरा सिंदूर पोछ डालेंगे।

मैंने सोचा मैं और अनीश दोनों बालिग हैं और नौकरी-पेशा भी। इसलिए हमें लगा था कि हमारी शादी का घरवाले ज्यादा विरोध नहीं करेंगे और अगर करेंगे भी तो उन्हें किसी तरह मना लेंगे। मैंने परिवार वालों को समझाने-बुझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने। परिवार वालों ने दोनों को अलग करने की कई कोशिशें कीं। हमने दोनों परिवार से छिप कर शादी कर ली। घरवालों की नजर में हम दोनों गुनहगार थे, हमारी गलती ये थी कि हमने ब्राहम्ण और दलित के बीच खींची लकीरों को मिटा दिया।

दूसरे कपल की तरह हम भी नॉर्मल लाइफ जी रहे थे

अनीश और दीप्ति मिश्रा की नॉर्मल लाइफ चल रही थी। अनीश रोज अपनी ड्यूटी के लिए उरुवा आना-जाना किया करते थे। शादी के बाद दीप्ति और अनीश रिलैक्स हो चुके थे कि अब तो दुनिया के सामने शादी कर ली तो कोई उन्हें अलग नहीं कर सकता। हालांकि, इधर-उधर से दीप्ति को पता चल जाता था कि उनके परिवार वाले यहां-वहां धमकी देते फिरते रहते हैं कि वो हमें बर्बाद कर के गई है तो उसे भी बर्बाद कर देंगे। और जो हुआ उसकी कल्पना न तो दीप्ति ने की थी और न ही अनीश को इसका अंदाजा था।

28 मई 2021 को दीप्ति और अनीश ने मंदिर में शादी की थी।
28 मई 2021 को दीप्ति और अनीश ने मंदिर में शादी की थी।

पहली बार यूनिवर्सिटी में मिले, साथ में पंचायत अधिकारी की ट्रेनिंग ली

दीप्ति वुमन भास्कर से बताती हैं, हम दोनों पहली बार 21 जनवरी 2017 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर में मिले थे। अनीश पॉलिटिकल साइंस में एमए कर रहे थे, जबकि मैं ग्रेजुएशन में थी। पहले हमारी दोस्ती हुई। कैंपस में हुई मुलाकातों के बीच हम दोनों का सिलेक्शन ग्राम पंचायत अधिकारी पद पर हो गया। हम दोनों ने साथ में ट्रेनिंग ली। इस दौरान दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और दोस्ती का रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में तब्दील होता गया।

अनीश और दीप्ति अपने दोस्तों के साथ।
अनीश और दीप्ति अपने दोस्तों के साथ।

मैंने अनीश से शादी की है..हम कानूनी तौर पर पति-पत्नी हैं

नवंबर 2019 में दीप्ति के घरवालों को इस बात की भनक लग गई थी कि दीप्ति और अनीश एक दूसरे को प्यार करते हैं। यहां तक बात सामान्य थी। लेकिन जैसे ही पता चला कि लड़का दलित है तो दीप्ति के घर वाले उन्हें परेशान करने लगे। घर से बाहर निकलने पर सवाल किए जाते। फोन पर बात कर रही होंती, तो उन्हें सफाई देनी पड़ती।

दीप्ति बताती हैं, हम दोनों को लगने लगा कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, परिवार वालों की रजामंदी से हमारी शादी कभी नहीं हो सकती। इसलिए दिसंबर 2019 में हम दोनों ने अपनी शादी को कोर्ट में रजिस्टर्ड करवा लिया। हालांकि, शादी के बाद भी हमने घरवालों को इस बात की जानकारी नहीं दी और फैसला किया कि हम दोनों फिलहाल अपने-अपने घर में ही रहेंगे। फरवरी 2020 को मेरे घरवालों को शादी के बारे में पता चल गया। पता ऐसे चल गया कि मेरे लिए रिश्ता आया, जिसके लिए मैंने साफ मना कर दिया। जब घरवालों ने कारण पूछा तो मैंने सब सच बता दिया कि अनीश और मैंने शादी कर ली है और हम दोनों अब कानूनी तौर पर पति-पत्नी हैं।

इसके बाद मुझे घर में कैद कर दिया गया, मेरा मोबाइल छीन लिया गया। यहां तक कि ऑफिस जाने से रोक दिया गया, पापा ने कई बार इमोशनली ब्लैकमेल किया कि उसे छोड़ दो नहीं तो मैं मर जाऊंगा, तुम्हारी वजह से मुझे हार्ट अटैक आ जाएगा। कई दिनों तक मैं कमरे में बंद रोती रही। यहां तक कि पापा ने मुझपर दबाव डालकर फॉल्स मैरिज का केस दर्ज करवा दिया ताकि शादी को झूठा करार दे दिया जाए, लेकिन अनीश ने मेरे परिवार वालों से कहा, ‘किसी भी कीमत पर न तो वे तलाक देंगे और न ही शादी को फॉल्स प्रूव करने देंगे।’

अनीश पर लगाया अपहरण का आरोप

अगस्त 2020 में दवाब डालकर दीप्ति के पिता ने अनीश पर आईपीसी धारा 376 (किसी महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने) और धारा 420 (छल या बेईमानी करने) जैसी धाराओं के तहत एफआईआर करवा दिया। अनीश को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेनी पड़ी। दीप्ति बताती हैं कि इन सब घटनाक्रमों के बावजूद बीच-बीच में मेरी और अनीश की बात हो जाया करती थी।

केस होने के बाद भी अनीश ने दीप्ति से रिश्ता नहीं तोड़ा।
केस होने के बाद भी अनीश ने दीप्ति से रिश्ता नहीं तोड़ा।

केस चलता रहा और 17 फरवरी 2021 को मुझे पता चला कि 22 फरवरी को अनीश को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जब मैंने अनीश से बात की तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की। इसके बाद हम दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया। हालांकि 20 फरवरी को शहर से निकलने के बाद हम पहले इलाहाबाद कोर्ट पहुंचे ताकि ये केस क्लियर हो सके और अनीश के पक्ष में मेरा बयान रिकॉर्ड हो सके। मगर, कोर्ट में स्ट्राइक के चलते हम दोनों को लगभग एक महीने तक स्ट्रगल करना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि घर छोड़ने के बाद मेरे घरवालों ने अनीश पर अपहरण का भी केस करवा दिया था, अगर सामने आते तो अनीश को गिरफ्तार कर लिया जाता।

ससुराल वालों ने कर लिया था शादी को स्वीकार

27 मार्च 2021 को अनीश को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जिसके बाद से दोनों गोरखपुर सिटी में रहने लगे। अनीश के घरवालों ने दीप्ति को स्वीकार कर लिया। दीप्ति का अपने ससुराल आना-जाना होता रहता था। लाइफ नॉर्मल लगने लगी तब जाकर अनीश और दीप्ति ने 28 मई को सामूहिक तौर पर मंदिर में शादी की। जिस सपने को इतने दिनों से संजोया था वो आखिरकार सच हुआ तो सेलिब्रेट करने के लिए दोनों ने रिसेप्शन दिया। रिसेप्शन के बाद दीप्ति अपने पति अनीश के परिवार के साथ रहने लगीं।

अनीश के परिवार वालों की मौजूदगी में हुई दीप्ति और अनीश की शादी।
अनीश के परिवार वालों की मौजूदगी में हुई दीप्ति और अनीश की शादी।

उस दिन क्या हुआ था ?

दीप्ति उस दर्दनाक दिन को याद करते हुए कहती हैं, ‘24 जुलाई 2021 को अनीश रोज की तरह सुबह करीब 10:30 बजे ड्यूटी के लिए निकले थे। मैने उन्हें रोज की तरह बाय कहा, उन्होंने भी मुझे मुस्कुराते हुए जवाब दिया, लेकिन मुझे क्या पता था कि मैं उन्हें फिर कभी इस तरह ऑफिस नहीं भेज पाऊंगी, फिर कभी हमारी नजरें नहीं मिलेंगी, फिर कभी हम साथ मुस्कुराएंगे नहीं। वो खौफनाक दिन वो पल मुझे आज भी याद है।

उस दिन उनके साथ चाचा जी भी थे, जो उरुवा ब्लॉक में ही ग्राम विकास अधिकारी के तौर पर तैनात थे, वो और अनीश कई बार साथ ही जाते थे। गांव से थोड़ी ही दूर एक चौराहे के पास दोनों गोपालपुर बाजार में स्थित हार्डवेयर की दुकान पर कुछ काम से रुके थे। वो लोग जैसे ही दुकान से निकले इससे पहले कि वो कुछ समझ पाते, चार लोगों ने धारदार हथियारों के साथ आएं, मेरे पति घेर लिया और गला रेत कर हत्या कर दी। जब चाचा जी बचाने के लिए दौड़े तो उन पर भी धारदार हथियार से सीने पर वार किया गया और वो बेहोश होकर गिर पड़े। बीच चौराहे मेरे पति को मार डाला और देखने वाले देखते रह गए।”

अनीश की जब मौत हुई तब दीप्ति प्रेगनेंट थीं।
अनीश की जब मौत हुई तब दीप्ति प्रेगनेंट थीं।

घटना के बाद आया मां का बयान

मां ने बेटी को अपनी कोख का कलंक बताया था बीबीसी से बातचीत में दीप्ति की मां जानकी मिश्रा ने कहा था, इस मामले से उनके परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। उनके परिवार और रिश्तेदारों को फंसाया जा रहा है। दीप्ति की दलित लड़के से शादी के सवाल पर उनकी मां ने कहा था, 'ऐसी लड़कियों को पढ़ाना-लिखाना तो दूर जन्म देना भी बेकार है। उसने मेरी कोख पर कालिख पोत दिया। पूरे परिवार और रिश्तेदारों को बदनाम और बर्बाद कर दिया ।'

अब ये जान लीजिए..केस कहां तक पहुंचा

घटना के बाद अनीश के भाई अनिल चौधरी की शिकायत पर 17 नामजद और 4 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। एफआईआर में दीप्ति के पिता नलिन मिश्र और भाई अभिनव मिश्र के अलावा मणिकांत, विनय मिश्र, उपेंद्र, अजय मिश्र, अनुपम मिश्र, प्रियंकर, अतुल्य, प्रियांशु, राजेश, राकेश, त्रियोगी नारायण, संजीव और चार अज्ञात लोगों के नाम शामिल थे। सीसीटीवी फुटेज से कुछ लोगों की पहचान की गई, वहीं पुलिस ने सबूतों के अभाव में 4 लोगों का नाम निकाल दिया। जिन लोगों का नाम केस में से हटाया गया वो सीबीआई, पीएससी और सीआईएसएफ में कार्यरत हैं। नवंबर 2021 तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था, वहीं एक को जनवरी में गिरफ्तार किया गया जबकि बचे हुए दो लोगों ने फरवरी में खुद को सरेंडर किया था। दीप्ति के पिता और भाई सहित 7 लोगों को जमानत मिल चुकी है।

अबतक ट्रायल पर भी नहीं आया केस

अब तक केस ट्रायल पर भी नहीं आया है। यहां तक कि सभी अभियुक्तों की कोर्ट में एक साथ पेशी भी नहीं हुई है। अनीश के भाई अनिल चौधरी ने बताया कि “मैंने आत्मरक्षा के लिए हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था, जिसे अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। यहां तक कि मुझे और अनीश की पत्नी दीप्ति को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।” जबकि दीप्ति का कहना है कि “उनके और उनके परिवार (ससुराल) के साथ पुलिस का रवैया भी बहुत अच्छा नहीं रहा है। दीप्ति कहती हैं लड़ाई चाहे कितनी भी लंबी हो हम लड़ेंगे और उम्मीद है कि हमें इंसाफ जरूर मिलेगा।”

इस सीरीज की चौथी किस्त अगले रविवार, 12 जून को आएगी।