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डार्क स्पॉट का डर:जयपुर, भोपाल, दिल्ली-NCR में महिलाएं शाम होते ही खौफ के साए में रहने को मजबूर, सुरक्षा की सुध लेने वाला कोई नहीं

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: पारुल रांझा
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पंजाब में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर सियासी बवाल तेज हुआ तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। जबकि, बात अगर महिलाओं की जाए तो देश में दिन रात गुलजार रहने वाले कई ऐसे भी हाइटेक शहर हैं, जहां आज भी रात में अकेले जाने से महिलाएं डरती हैं और उनकी सुरक्षा की सुध लेने वाला कोई नहीं। इन शहरों में बढ़ते जा रहे डॉर्क स्पॉट के कारण कामकाजी महिलाओं और युवतियों को ऑफिस से घर पहुंचने तक डर के साए में रहना पड़ रहा है। आलम यह है कि सड़कों पर अंधेरा होते ही महिलाओं की आवाजाही कम हो जाती है। इसे लेकर पेश है दैनिक भास्कर वुमन टीम की रिपोर्ट:

भोपाल- यहां 124 डार्क स्पॉट, असामाजिक तत्वों के कारण बिगड़ रहा माहौल

भोपाल में करीब 124 डार्क स्पॉट चिह्नित हैं, जहां बदमाशों को अंधेरे का ज्यादा फायदा मिल सकता है। सबसे ज्यादा ऐसे 9 स्पॉट गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में सामने आए हैं। हालांकि, थाना स्तर पर हुए सर्वे के बाद भोपाल पुलिस और नगर निगम इन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट लगवा रही है। इसके लिए नगरीय प्रशासन को 20 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। प्रशासन की माने तो रेलवे और भेल प्रबंधन से बात करके भी डार्क स्पॉट पर स्ट्रीट लाइट लगाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि वन विहार गेट-2 के पास, सैर सपाटा, ठंडी सड़क, पं. खुशीलाल अस्पताल रोड, जंबूरी मैदान, रुचिलाइफ स्केप के पास जाटखेड़ी, कमला पार्क, वर्धमान पार्क व संगम टॉकीज के पास फुटपाथ आदि मुख्य डॉर्क स्पॉट हैं। कुछ माह पहले ही शक्ति नगर नाले के पास ऑटो ड्राइवर एक महिला यात्री के साथ अश्लील हरकत सिर्फ इसलिए कर पाया, क्योंकि वहां अंधेरा था। ऑटो से उतरकर महिला ने वहां से भागकर अपनी इज्जत बचाई थी।

ज्यादातर डार्क स्पॉट में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
ज्यादातर डार्क स्पॉट में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।

जयपुर- सूरज ढलते ही अंधेरे में डूब जाती हैं कई कॉलोनियां
भले ही जयपुर शहर दिनों-दिन प्रगति कर रहा है, लेकिन आज भी कई क्षेत्र रात के अंधेरे में डूब जाते हैं। इस अंधेरे के बीच अपराध और डर जन्म लेता है। स्थानीय निवासी अनिता जैन बताती हैं कि पिंक सिटी में स्ट्रीट लाइट एक आम समस्या है। अधिकारियों के पास हर दिन दर्ज होने वाली शिकायतों में करीब 30% शिकायतें स्ट्रीट लाइट से जुड़ी होती हैं।

गांधीनगर रेलवे स्टेशन के पास, बजाज नगर, बैरवा कॉलोनी पर स्ट्रीट लाइट की कमी है। वहीं, तिलक नगर, आर के नगर, राठौड़ नगर, बानी पार्क, श्रीराम पुरी में कई ऐसे डार्क स्पॉट हैं, जहां स्ट्रीट लाइटों की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन कोई सुध लेने को तैयार नहीं। शहर के बाहरी इलाकों से लगती कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां आबादी तो है पर, शाम ढलते ही गलियां सूम-सान और अंधेरे में डूब जाती हैं।

वहीं, राजस्थान के हिंडौन सिटी के कई पार्कों में सुबह-शाम घूमने जाने वाली महिलाओं को अंधेरे के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यहां ठेकेदार के ही व्यक्ति पार्कों में लगे खंभों से एलईडी लाइटें खोल ले जाते हैं।

जयपुर में अधिकारियों के पास रोजाना दर्ज होने वाली शिकायतों में करीब 30% शिकायतें स्ट्रीट लाइट से जुड़ी होती हैं।
जयपुर में अधिकारियों के पास रोजाना दर्ज होने वाली शिकायतों में करीब 30% शिकायतें स्ट्रीट लाइट से जुड़ी होती हैं।

दिल्ली-एनसीआर- अंधेरा होते ही साथ-साथ चलता है डर का साया
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में स्ट्रीट लाइटें तो क्षेत्र के पार्कों, गलियों में लगाई गई हैं। लेकिन, मौजूदा समय में देखा जा रहा है कि कई ऐसी जगह है जहां या तो लाइटें बंद पड़ी है या फिर खंभों के बीच की दूरी ज्यादा है। ऐसे में ये रात के समय यहां डार्क स्पॉट बनते जा रहे हैं।

दिल्ली में गांधी विहार, मुकरबा चौक व बाहरी दिल्ली की कई जगह पर डार्क स्पॉट होने का फायदा चोर भी उठा रहे हैं। यहां लाइट न होने से शाम को अंधेरा हो जाता है और किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए महिलाएं शाम के बाद घरों से बाहर निकलने से बचती हैं। द्वारका के कई सेक्टरों में लोग महिलाओं और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से परहेज करते हैं।

वहीं, नोएडा सेक्टर-141 के पास, 74, 77, 78, 121, 122 व ग्रेटर नोएडा में डेल्टा-2, नॉलेज पार्क स्थित कॉलेजों के हॉस्टल के बाहर भी शाम होने के बाद महिलाओं का आना बंद हो जाता है। कई जगह पर जो स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, उनमें रोशनी बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रही। वजह ये कि पेड़ों की टहनियों ने पूरी तरह लाइटों को घेर रखा है। शहर के कई ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़े होने से कई डॉर्क स्पॉट बन चुके हैं।

कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियों ने पूरी तरह लाइटों को घेर रखा है।
कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियों ने पूरी तरह लाइटों को घेर रखा है।

महिलाएं बोलीं- डॉर्क स्पॉट में जुआरियों और नशेड़ियों का जमावड़ा
ग्रेटर नोएडा की श्रुति बिष्ट कहती हैं, अगर रात में किसी लड़की के साथ कोई हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार उसी को ही ठहराया जाएगा। इसलिए, शहर के कई स्थान जहां रोशनी का अभाव है, मैं रात के समय अकेले नहीं निकलती। जब भी मुझे शाम को घर पहुंचने में देरी हो जाती है तो मैं मेट्रो स्टेशन के पास सुनसान एरिया होने के कारण भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर उतरकर ऑटो पकड़ती हूं, जबकि घर मेट्रो स्टेशन से बिल्कुल पास में ही है। ऐसा सुरक्षा के मद्देनजर करना पड़ता है।

वहीं, भोपाल की नैना कपूर बताती हैं शहर में ज्यादातर डॉर्क स्पॉट ऐसे हैं, जहां जुआरियों और नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। जल्द से जल्द इस दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि महिलाओं को असुरक्षा की भावना का एहसास न हो।

जयपुर की अंजली यादव का कहना है कि, शहर की कई अंदरुनी गलियां, कॉलोनियां और मुख्य रोड रात को अंधेरे में होती हैं। जबकि, शहर में रोड लाइट पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। दिन में बाहर जाते वक्त तो कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन शाम के बाद किसी न किसी घटना की आशंका बनी रहती है।

जब गाड़ी या ऑटो में ड्राइवर के साथ अकेली हों तो अपने दोस्त या फैमिली मेंबर को जरूर इन्फॉर्म कर दें।
जब गाड़ी या ऑटो में ड्राइवर के साथ अकेली हों तो अपने दोस्त या फैमिली मेंबर को जरूर इन्फॉर्म कर दें।

अपनी हिफाजत का सबसे बड़ा जिम्मा खुदका
सोशल वेलफेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव श्वेता त्यागी बताती हैं अक्सर बड़े शहरों के लाइफस्टाइल और नौकरी के कारण देर-सबेर बाहर निकलना महिलाओं की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अपनी हिफाजत का सबसे बड़ा जिम्मा खुद आपका ही है। इसलिए सिर झुकाकर चलने की बजाय अलर्ट होकर सामने देखते हुए चलें।

अगर रास्ते के बारे में ज्यादा जानकारी न हो, तो किसी अनजान व्यक्ति से न पूछें। पार्टी के दौरान अनजान लोगों से दूर रहें। खुद ड्राइव करते वक्त कार में सेंट्रल लॉक लगाकर ही ड्राइव करें। लाउड म्यूजिक चलाकर उसमें खोएं नहीं। जब गाड़ी या ऑटो में ड्राइवर के साथ अकेली हों तो अपने दोस्त या फैमिली मेंबर को जरूर इन्फॉर्म कर दें। मजबूरी में भी अनजान लोगों से लिफ्ट न लें।

खाली बस में न चढ़ें, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर के अलावा अन्य कोई सवारी न हो। रास्ता लंबा बेशक हो, लेकिन जाना-पहचाना और रोशनी वाला हो। क्योंकि, अपराधी ज्यादातर अंधेरे वाली जगहों पर ही मौजूद रहते हैं।

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