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बेटी को हाथी पर बैठाकर निकाली बारात:पिता ने अपने अरमानों को किया पूरा, दबंगों के डर से खुद नहीं कर सके थे शादी में घुड़चढ़ी

अहमदाबादएक महीने पहले
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गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के सुरेंद्रनगर इलाके की एक शादी चर्चा में हैं। दरअसल, इस इलाके में दलित समुदाय के लोग घोड़ी पर बारात निकालने से डरते हैं, वहां एक दलित परिवार ने हाथी पर बारात निकाली। वह बारात एक बेटी की थी। गुजरात के अहमदाबाद के सुरेंद्रनगर के नटू परमार की बेटी की शादी से एक दिन पहले हाथी पर बारात निकाली गई।

बेटियों का नहीं होता है फुलेकू
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक नाटू परमार ने कहा कि फुलेकू (विवाह पूर्व बारात) के लिए आज भी लगभग हर महीने दलितों की ओर से एफआईआर दर्ज होती हैं। आप इससे दो दशक पहले के परिदृश्य की कल्पना कर ही सकते हैं। मुझे मेरे बड़ों ने बारात निकालने से मना कर दिया, और मैं आधे-अधूरे मन से राजी हो गया। लेकिन मैंने तब फैसला किया था, कि मेरे बच्चों को मेरा भाग्य नहीं भुगतना पड़ेगा।

हाथी पर लटकाए संदेश वाले बैनर
इस बारात को लेकर लोग काफी उत्साहित हैं। आज भी अगर दलितों की बारात घोड़े पर निकलती है तो अहमदाबाद में पथराव होता है। ऐसे में बारात पुलिस की सुरक्षा में निकाली जाती है। हाथी को अहमदाबाद से बुलवाया गया था। उसे रंग-बिरंगा सजाया गया था। इस हाथी पर 'बेटी को पढ़ाएं, बेटी को अधिकार दें' के मैसेज के साथ दो फ्लेक्स भी लगाए गए थे। इस पर डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर की एक तस्वीर भी सभी को यह याद दिलाने के लिए ली थी कि उन्होंने जेंडर या जाति के बावजूद, हम सभी के समानता की बात कही है।' नाटू परमार उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2016 के ऊना में कोड़े मारने की घटना के बाद गाय के शवों के साथ कलेक्टर कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया था।

तीनों भाई-बहनों में सबसे बड़ी भारती नर्सिंग और मिडवाइफ की डिग्री के साथ अभी लिमडी जनरल हॉस्पिटल में बतौर स्टाफ नर्स काम कर रही हैं। नटू परमार के 19 और 21 साल के दो बेटे हैं जो कि नर्सिंग का कोर्स कर रहे हैं।

डरो मत- हम सभी समान हैं
भारती की ससुराल वाले भी इस कार्यक्रम में पहुंचे थे। हाथी के लिए पुलिस परमिशन की जरूरत होती है। लेकिन इस इवेंट में कोई पुलिस प्रोटेक्शन नहीं ली गई थी। परमार अपने दलित समाज को मैसेज देना चाहते हैं कि किसी से डरने की जरूरत नहीं है। हम सब एक समान हैं और कानून हमारी रक्षा के लिए है।