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रिश्तेदार कहते थे निखत को शॉर्ट्स न पहनाओ:पिता बोले-बेटी वर्ल्ड चैम्पियन बन गई है, उसका सपना पूरा करने के लिए सेल्समैन बना

नई दिल्ली7 महीने पहले
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पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेटर मोहम्मद जमील चाहते थे कि उनकी चार बेटियों में से कोई एक धाकड़ खिलाड़ी बने। जमील की तीसरी बेटी निखत जरीन ने अपने अब्बू का सपना सच कर दिखाया। निखत ने विमेंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में देश के लिए इकलौता गोल्ड मेडल जीता है। 25 साल की निखत ने फ्लाई वेट कैटेगरी (52 KG) के फाइनल में थाईलैंड की जुटामास जितपों को हराया। हालांकि, निखत को खेल के दौरान तानों का भी सामना करना पड़ा।

मोहम्मद जमील ने बताया कि निखत की दो बहन डॉक्टर हैं। निखत की ट्रेनिंग के साथ साथ उसकी छोटी बहनों के लिए समय देना पड़ता था। दोनों बैडमिंटन खेलती हैं। जब निखत ने हमें बॉक्सर बनने की अपनी इच्छा के बारे में बताया, तो हमारे मन में कोई झिझक नहीं थी, लेकिन कभी-कभी, रिश्तेदार या दोस्त कहते थे कि लड़की को ऐसा खेल नहीं खेलना चाहिए जिसमें उसे शॉर्ट्स पहनना पड़े, लेकिन हमने निखत ने जो चाहा वो किया।

निखत अपने अंकल की सलाह पर बॉक्सिंग को चुना था। 14 साल की उम्र में ही उन्होंने वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैम्पियनशिप का खिताब हासिल कर लिया था और यही वो मुकाम था जहां उन्होेंने इसे आगे भी जारी रखने का सोचा। निखत के लिए आगे की चुनौती महान बॉक्सर मैरी कॉम की छाया से निकल खुद की पहचान बनानी थी। उन्हें अपने टाइम के लिए इंतजार करना पड़ा। हालांकि, कंधे में लगी चोट ने उनके इस इंतजार को और लंबा कर दिया। फिर जैसे ही निखत ने विमेंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में जीत हासिल की, जमील का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

25 साल की निखत विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पांचवीं भारतीय महिला मुक्केबाज हैं। उनसे पहले केसी लेखा, जेनी आरएल, सरिता देवी और एमसी मैरिकॉम ये मुकाम हासिल कर चुकी हैं।
25 साल की निखत विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पांचवीं भारतीय महिला मुक्केबाज हैं। उनसे पहले केसी लेखा, जेनी आरएल, सरिता देवी और एमसी मैरिकॉम ये मुकाम हासिल कर चुकी हैं।

मैरीकॉम को आदर्श मानती हैं निखत
निखत जरीन का जन्म तेलंगाना के निजामाबाद में 14 जून 1996 को हुआ। पिता मुहम्मद जमील अहमद और माता परवीन सुल्ताना के घर में जन्मी इस भारतीय स्टार ने 13 साल की उम्र में बॉक्सिंग में कदम रखा। भारतीय मुक्केबाजी की लीजेंड एमसी मैरीकॉम को जरीन अपना आदर्श मानती हैं। उनके खेल से प्रेरणा लेने वाली इस मुक्केबाज ने अपने आदर्श की तरह ही भारत को विश्व मुक्केबाजी महिला चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल दिलाया।

2010 में जीता पहला गोल्ड मेडल
साल 2010 में निखत ने अपना पहला गोल्ड मेडल नेशनल सब जूनियर मीट में जीता था। उसके बाद तुर्की में साल 2011 में महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में फ्लाइवेट में निखत ने पहली बार देश के लिए किसी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता। साल 2011 के 15 साल की उम्र में इस मुक्केबाज ने AIBA महिला युवा और जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया।

भारत ने विमेंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के इतिहास में 10वां गोल्ड मेडल जीता है। 6 गोल्ड मेडल अकेले एमसी मेरीकॉम ने जीता था।
भारत ने विमेंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के इतिहास में 10वां गोल्ड मेडल जीता है। 6 गोल्ड मेडल अकेले एमसी मेरीकॉम ने जीता था।

2013 में जीता युवा विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप
दो साल बाद साल 2013 में बुल्गारिया के निखत ने एक बार फिर मुक्केबाजी का जौहर दिखाया और महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। साल 2014 में निखत ने 51 किलो वर्ग में सर्बिया में आयोजित तीसरे नेशन्स कप इंटरनेशनल मुक्केबाजी टूर्नामेंट में गोल्ड अपने नाम किया। साल बाद थाइलैंड ओपन इंटरनेशनल में सिल्वर मेडल भारत की झोली में डाला। साल 2019 में बैंकाक में आयोजित थाइलैंड ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया।

पिता चाहते थे कि बेटी चुने स्पोर्ट्स
निखत के पिता मोहम्मद जमील पूर्व फुटबॉलर और क्रिकेटर थे। वे शुरू से चाहते थे कि उनकी चार बेटियों में से एक कोई स्पोर्ट्स चुने। तीसरी बेटी निखत जरीन ने एथलेटिक्स चुना। निखत दोनों स्प्रिंट स्पर्धाओं में स्टेट चैम्पियन बनकर उभरीं, लेकिन एक चाचा की सलाह पर बॉक्सिंग रिंग में आ गई। 14 साल की उम्र में वे वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैम्पियनशिप बनीं। निखत के पिता ने बताया कि विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतना एक ऐसी चीज है जो मुस्लिम लड़कियों के साथ-साथ देश की प्रत्येक लड़की को जीवन में बड़ा हासिल करने का लक्ष्य रखने के लिए प्रेरणा का काम करेगी।

निखत के चाचा ने की मदद
निखत जरीन के चाचा शमशुद्दीन ने ही उन्हें बॉक्सिंग की दुनिया से रू-ब-रू करवाया। शमशुद्दीन बॉक्सिंग कोच थे। वह अपने बेटों और निखत को एक साथ ट्रेनिंग देते थे। उन्हें देखते हुए निखत जरीन की भी बॉक्सिंग में रूचि बढ़ने लगी। बॉक्सिंग के लिए उनके जुनून को देखकर उनके चाचा ने उन्हें भी कोचिंग देनी शुरू की। उस वक्त वह 13 साल की थी। शुरुआती दिनों में निखत के लिए पढ़ाई और बॉक्सिंग एक साथ करना काफी मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने सब कुछ संभाल लिया। इन सब में उनके दोस्तों ने भी उनका साथ दिया। उनके दोस्त उनके लिए नोट्स तैयार करके रखते थे।

कंधे की चोट के बाद भी नहीं हटी पीछे
निखत को शुरुआती दौर में ही कंधे की चोट से सामना करना पड़ा। उनके दाहिने कंधे की हड्डी टूट गई थी, जिसके बाद उनकी सर्जरी करानी पड़ी। सर्जरी के बाद दोबारा फॉर्म में आना काफी मुश्किल था। महज 20 साल की उम्र में कंधे में चोट लगना निखत के लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हर तकलीफ को पार करते हुए दोबारा खेलना शुरू किया।

लोगों ने शॉर्ट्स पहन कर खेलने से किया मना
जमील बताते हैं कि इस खेल में लड़कियों को शॉर्ट्स और ट्रेनिंग शर्ट पहनने की जरूरत होती है। जमील परिवार के लिए यह आसान नहीं था। अपनी मां परवीन सुल्ताना और अपने माता-पिता दोनों के समर्थन से निखत तुर्की के उल्कु डेमिर को हराकर तुर्की में 2011 विश्व युवा चैम्पियनशिप बनी थीं। वह बताते हैं, 'मैंने अपनी बेटी की पढ़ाई और खेल के लिए निजामाबाद में ट्रांसफर लेने का फैसला किया। निखत की पढ़ाई के लिए 15 साल तक सऊदी अरब में एक सेल्स असिंसटेंट के रूप में काम किया।'

निखत ने 2019 में किया कम बैक
सारी तकलीफों को पीछे छोड़ते हुए निखत ने 2019 में स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर बेहतरीन कमबैक किया। उसके बाद निखत ने साल 2021 में बैंकाक में आयोजित एशियाई मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता। इस प्रदर्शन ने उन्हें जबरदस्त आत्मविश्वास दिया। निखत ने 2019 जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज के रूप में चुना गया।

अखिल भारतीय इंटर-यूनिवर्सिटी मुक्केबाजी चैम्पियनशिप
2015 में जालंधर में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में, निखत ने 'सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज' का पुरस्कार जीता।

तेलंगाना की आधिकारिक राजदूत
निखत को उनके गृह नगर निजामाबाद, तेलंगाना का आधिकारिक राजदूत नियुक्त किया गया था। 2010 में, निखत ने चेन्नई में आयोजित जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक के साथ-साथ 'सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज' का पुरस्कार जीता। निखत मोहम्मद अली को अपना आदर्श मानती हैं।

निखत अमेरिकी खिलाड़ी मोहम्मद अली बेटी लैला अली की भी बहुत बड़ी फैन हैं।
निखत अमेरिकी खिलाड़ी मोहम्मद अली बेटी लैला अली की भी बहुत बड़ी फैन हैं।

अंतरराष्ट्रीय करियर
निखत ने 2010 में 14 साल की उम्र में इरोड में राष्ट्रीय सब-जूनियर मीट में स्वर्ण पदक जीतकर, बॉक्सिंग की दुनिया में अपने आगमन की घोषणा की।

महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप
वर्ष 2011 में, निखत ने तुर्की में आयोजित AIBA महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में फ्लाईवेट में स्वर्ण पदक जीता था।

यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप
उन्होंने 2014 में यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीता था। यह इवेंट बुल्गारिया में हुआ था।

नेशन्स कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट
उसी वर्ष, उन्होंने नेशंस कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में 51 किलोग्राम भार वर्ग में रूसी पाल्टसेवा एकातेरिना को हराकर स्वर्ण पदक जीता।

सीनियर वुमन नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप
निखत ने अपने पदक तालिका में एक और स्वर्ण पदक जोड़ा 2015 में जब उन्होंने असम में आयोजित सीनियर वुमन नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप जीती।