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दोहरी दहशत:तालिबान से डरी LGBTQ कम्युनिटी सोशल मीडिया से मिटा रही पहचान, इस बीच जानिए उन मुस्लिम देशों को, जहां आजादी से घूमते हैं ट्रांसजेंडर

2 महीने पहले
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मारवा और उनकी दोस्त दोनों समलैंगिक हैं। काबुल पर तालिबान के कब्जे के दौरान अगस्त में दोनों ने अचानक शादी करने का फैसला किया। साधारण तरीके से हुई इस शादी में न कोई रिश्तेदार शरीक हुआ और न कोई दोस्त। अब उन्हें डर है कि कहीं से सुराग मिल जाएगा और तालिबान उन्हें खत्म कर देगा। वहीं, एक अन्य अफगानिस्तान ट्रांसजेंडर महिला को सड़कों पर यौन हिंसा झेलनी पड़ी। यहां तक कि उनके परिवार ने भी उन्हें छोड़ दिया।

ये केवल एक या दो लोगों की कहानी नहीं, बल्कि तालिबान के राज में अफगानिस्तान की पूरी की पूरी एलजीबीटी कम्युनिटी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं। वे डरे हुए हैं कि उन्हें किसी भी वक्त मौत के घाट उतारा जा सकता है, क्योंकि तालिबानी शासन में समलैंगिकता किसी अपराध से कम नहीं है। हाल ही में अफगानिस्तान में एक समलैंगिक लड़के को भी प्रताड़ित करने का मामला सामने आया। हालांकि, तालिबान ने अभी तक समलैंगिकों को लेकर अपनी नीति स्पष्ट नहीं की है। बावजूद तालिबान के अतीत से खौफजदा एलजीबीटी कम्युनिटी सोशल मीडिया से अपने सभी सबूत मिटा रही है। दूसरी तरफ कई ऐसे भी मुस्लिम देश हैं जहां होमोसेक्शुअल रिलेशलशिप को कानूनी मान्यता मिली हुई है।

ये भी है खौफ की वजह

साल 1996 से लेकर 2001 तक तालिबान का देश पर शासन रहा। इस दौरान समलैंगिकों को पत्थर मारकर मौत के उतार दिया जाता था या फिर उन्हें कमर या छाती तक जमीन में गाड़कर फिर पत्थर मारा जाता।

क्या है समलैंगिकता

सेम सेक्स के प्रति अट्रैक्शन रखने वाले महिला या पुरुष को समलैंगिक माना जाता है। इसका उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वात्सायन के लिखे कामसूत्र में इस पर एक अध्याय भी लिखा गया है। साल 1860 में अंग्रेजों ने समलैंगिकता के खिलाफ धारा 377 को लागू किया था। इस कानून के जरिये समलैंगिकता को गैरकानूनी बताया गया, बाद में देश इस रिश्ते को मान्यता देने लगे, हालांकि इसके बाद भी सामाजिक मान्यता मिलना आसान नहीं।

इन मुस्लिम देशों में होमोसेक्सुअल रिलेशलशिप है मान्य

माली (Mali)- इस देश के नागरिक भले ही एलजीबीटी समुदाय से भेदभाव करते हों, लेकिन यहां का कानून होमोसेक्सुअल रिलेशन को कानूनी मान्यता देता है। हालांकि, यहां के संविधान के अनुसार पब्लिक प्लेस पर सेक्स की पाबंदी है और ये नियम सिर्फ होमोसेक्सुअल या हेट्रो के लिए ही नहीं है, बल्कि सभी पर लागू है।

जॉर्डन (Jordan)- यहां साल 1951 में होमोसेक्सुअल रिलेशंस को कानूनी मान्यता मिल गई थी। तब से इस देश का संविधान एलजीबीटी कम्युनिटी के अधिकारों की रक्षा करता आया है।

तुर्की (Turkey) - साल 1858 में इस देश में क्रांतिकारी बदलाव हुए, तभी समलैंगिकों के बीच सेक्स संबंधों को मान्यता दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस देश में आज भी ये अधिकर कायम है। हालांकि, संविधान में इस समुदाय की सुरक्षा को लेकर उचित प्रावधान न होने के कारण इन लोगों को भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा हैं।

बहरीन (Bahrain) - इस देश में साल 1976 से ही समलैंगिकों के संबंधों को कानूनी मान्यता मिल गई थी, लेकिन यहां के लड़के, लड़कियों की तरह कपड़े नहीं पहन सकते।

अल्बानिया (Albania) - दक्षिण-पूर्व यूरोप का ये इस्लामिक देश समलैंगिकों की रक्षा को लेकर काफी गंभीर है। यहां साल 1995 से गे रिलेशन को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। समुदाय के लोगों को भेदभाव से बचाने के लिए कई अहम कानून बनाए गए हैं।

इंडोनेशिया (Indonesia)- इस देश में एकमात्र राज्य आचे को छोड़कर समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है। आचे में आज भी शरिया कानून के तहत सजा सुनाई जाती है। कुछ माह पहले ही सोशल मीडिया पर समलैंगिक जोड़ों को सजा देने का वीडियो वायरल भी हुआ था, जिसमें इस्लामी कानून शरिया के तहत उन्हें 77 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई। यहां सेम सेक्स वाले विवाहित कपल्स की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है।

नाइजर (Niger) - बात दें, नाइजर और नाइजीरिया, दोनों अलग-अलग देश हैं। इसका नाम नाइजर नदी के नाम पर पड़ा है। इसे दुनिया के सबसे गरीब और असुरक्षित देशों में गिना जाता है। यहां सेम सेक्स द्वारा सेक्सुअल एक्टिविटी लीगल है। हालांकि, ये देश भी कानूनी रूप से सेम सेक्स वालों को मान्यता नहीं देता।

अज़रबैजान (Azerbaijan)- इस देश का कुछ हिस्सा यूरोप में तो कुछ एशिया में आता है। साल 2000 में अज़रबैजान में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से मुक्त कर दिया गया था।

कजाकिस्तान(Kazakhstan) - साल 1998 में कजाकिस्तान ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया, लेकिन यहां रहने वाले एलजीबीटी समुदायों के कई सदस्यों का कहना है कि उन्हें अपमान और हिंसा से बचने के लिए लोगों से अपनी सेक्सुअल पहचान छिपानी पड़ती है।

उत्तरी साइप्रस (Northern Cyprus)- यहां साल 2014 से समलैंगिकता को लीगल करार दिया गया। इससे पहले सेम सेक्स वाले पुरुषों के लिए इस तरह के रिश्ते अपराध थे, जबकि सेम सेक्स वाली महिलाओं को कभी भी अपराधी नहीं कहा गया।

क्या है भारत की स्थिति
साल 2018 में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था। इसके मुताबिक, दो व्यस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को जुर्म नहीं माना जाएगा। हालांकि, अब भी हमारे यहां समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिल सकी है। कोर्ट में इसे लेकर कई बार याचिकाएं दायर और खारिज होती रही हैं। दिल्ली हाइकोर्ट में वकील एसके झा बताते हैं कि केंद्र सरकार भी समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की याचिका का विरोध कर चुकी है। भारत में विवाह को सबसे पवित्र बंधन माना जाता है। ऐसे में एक ही लिंग के दो व्यक्तियों के बीच विवाह की स्वीकृति को मान्यता प्राप्त नहीं है। शादी की व्यवस्था को लेकर बने कानूनों में बदलाव से बहुत व्यापक और क्रांतिकारी बदलाव होगा।

दुनिया में समलैंगिकता को लेकर स्थिति
समलैंगिक समुदाय के अधिकारों पर सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों में भी लंबे समय तक चर्चा होती रही। हालांकि, अभी भी कई देश ऐसे हैं जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका में अलग अलग राज्यों में समलैंगिक विवाह के लिए अलग अलग कानून हैं। यहां 2015 तक सभी 50 राज्यों में कानूनी वैधता मिल चुकी थी।

इन देशों में भी मान्य
अर्जेंटीना(2010)
ग्रीनलैंड(2015)
दक्षिण अफ्रीका (2006)
ऑस्ट्रेलिया (2017)
आइसलैंड (2010)
स्पेन (2005)
बेल्जियम (2003)
आयरलैंड (2015)
अमेरिका (2015)
ब्राजील (2013)
स्वीडन (2009)
कनाडा (2005)
जर्मनी (2017)
फ्रांस (2013)
इंग्लैंड (2013)

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