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हिंदुस्तान की हेल्थ का हिसाब:जबरदस्ती का प्यार, पति की मार और कमाई का लेखा-जोखा, महिलाओं से जुड़ी ऐसी 10 बातें जानिए

नई दिल्ली3 महीने पहले
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मैरिटल रेप क्राइम है या नहीं, इस पर अभी भी बहस जारी है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज भी बुधवार को इस पर एकमत नहीं हो सके। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की पिछले हफ्ते आई रिपोर्ट में महिलाओं के शारीरिक संबंध बनाने से मना करने, पति के हाथ उठाने और पत्नियों के साथ जबरदस्ती करने जैसे मुद्दों पर कई अहम खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोवा में अपने लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है, जबकि जम्मू-कश्मीर सबसे कम। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की ताजा रिपोर्ट में महिलाओं से संबंधित 10 बातें...

1. शारीरिक संबंध बनाने से मना करना, गलत नहीं
NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, 80% महिलाओं ने माना कि अगर पत्नी थकी है या उसका मूड नहीं है तो वह शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर सकती है। अगर पति को सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज या फिर पति का किसी और औरत के साथ संबंध हो तभी पत्नी सेक्शुअल रिलेशन बनाने से मना कर सकती है। खास बात यह है कि 66% पुरुषों ने महिलाओं के इस फैसले को सही माना है।

सेक्स के लिए ना कहने वाली महिलाओं की सबसे अधिक संख्या गोवा (92%) में है, जबकि जम्मू-कश्मीर (65%) और अरुणाचल प्रदेश (63%) में सबसे कम है। हालांकि,8% महिलाएं और 10% पुरुष इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं कि पत्नी किसी भी कारण से अपने पति से सेक्स करने से मना कर सकती है। NFHS-5 के मुताबिक, देश में अब भी 29% से ज्यादा महिलाओं को पति की शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

2. पत्नी से जबरदस्ती करने को कम लोगों ने ठहराया सही
जेंडर एटिट्यूड का पता लगाने के लिए सर्वे में पुरुषों से पूछा गया- पत्नी के शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने पर क्या कि पुरुष को गुस्सा हो जाना और पत्नी को डांट देना, पत्नी को घर खर्च के लिए पैसे नहीं देना, मारपीट करना, पत्नी की इच्छा के खिलाफ जबरदस्ती सेक्स करना या किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाने का हक मिल जाता है? 15-49 आयु वर्ग के 6% पुरुषों ने माना कि अगर पत्नी सेक्स के लिए ना कहती है तो वे इन विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि 72% पुरुषों ने इनमें से किसी भी विकल्प को सही नहीं ठहराया। वहीं 19% पुरुषों ने कहा कि पत्नी के शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने के बाद पति को गुस्सा होने या पत्नी को डांट लगाने का हक है।

3. पति का मारपीट करना सही या गलत?
दुनिया भर में जब महिलाओं की सेहत, आजादी और करियर को लेकर अवेयरनेस बढ़ रही है, तब NFHS-5 सर्वे में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सर्वे में 44% पुरुषों का मानना है कि पत्नी को पीटना सही है। हैरानी की बात यह है कि 45% महिलाएं भी इसे सही मानती हैं। मारपीट को सही ठहराने वाली महिलाओं की संख्या पिछले सर्वे की तुलना में जहां 7% घटी है। वहीं पुरुषों के मामले में यह संख्या 2% बढ़ी है।

4. सिर्फ 32% मैरिड वुमन हैं नौकरीपेशा
सर्वे के मुताबिक, देश में 32% शादीशुदा महिलाओं के पास नौकरी है। इनमें 15% महिलाओं के हाथ में उनकी सैलरी नहीं आती है, जबकि 14% महिलाएं यह तक नहीं पूछ पाती हैं कि उनका कमाया गया पैसा खर्च कहां हुआ। ​जिन 32% शादीशुदा महिलाओं के पास नौकरी है, उनकी उम्र 15-49 के बीच है, जबकि इसी आयु वर्ग के 98% पुरुषों के पास नौकरी है। हालांकि, NFHS के पिछले सर्वे में यह दर 31% थी।

5. बहू-बेटियों को अकेले बाहर जाने की नहीं है इजाजत
NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अभी भी ऐसी महिलाओं की बड़ी संख्या है, जिन्हें अकेले घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है। सिर्फ 56% महिलाओं को अकेले बाजार, 52% को अस्पताल और 50% को अपने गांव या कम्युनिटी से बाहर जाने की इजाजत है। कुल मिलाकर देश में सिर्फ 42% महिलाओं को ही इन सभी स्थानों पर अकेली जाने की इजाजत है, जबकि सिर्फ 5% महिलाओं को ही अकेले कहीं भी आने-जाने की इजाजत मिली है।

6. काबू में आ रही जनसंख्या दर
NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जनसंख्या दर काबू आ गई है। देश में अब एक ​महिला पर औसत 2 बच्चे हैं, जबकि पिछले सर्वे में प्रति महिला औसत बच्चों की संख्या 2.2 थी। वहीं कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल करने वालों की संख्या भी 54% से बढ़कर 67% हो गई है।

7. मोटापे की शिकार हो रहीं महिलाएं
साल 2015-16 के सर्वे में 21% महिलाओं का वजन औसत से अधिक था। अब ऐसी महिलाओं की संख्या 24% से अधिक हो गई है। पुरुषों में ये आंकड़ा 19% से बढ़कर 23% पहुंच गया है।

8. सामाजिक स्थिति में हुआ सुधार
NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों में 91% और ग्रामीण क्षेत्र में 87% महिलाएं घर के अहम फैसलों में अपनी राय रखती हैं। 79% महिलाओं के पास बैंक अकाउंट है, जबकि 4 साल पहले केवल 53% महिलाओं का अपना बैंक अकाउंट था।

9.घरेलू हिंसा: ज्यादातर महिलाएं चुपचाप सहती हैं जुल्म
देश में महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ ही उन पर घरेलू हिंसा भी बढ़ती जाती है। सर्वे के मुताबिक, 18 से 19 साल की 17% महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं, जबकि 40-49 साल की 32% महिलाओं को यह दंश झेलना पड़ रहा है।

10. हाइजीन को लेकर संजीदा हुए लोग
कोरोना महामारी के बाद से महिलाओं अपने परिवार की सेहत को लेकर सतर्क हुईं हैं। NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अब 78% लोग हाथ धोने की आदत डाल चुके हैं, जबकि पिछले सर्वे में यह संख्या 60% थी।