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पीरियड्स से पहले क्या आपको ऐसा होता है:जल्दी गुस्सा आता है, बात-बात पर नाराज हो जाती हैं, एक पल मूड कुछ दूसरे पल कुछ

7 महीने पहले
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इतना शॉर्ट टेंपर वह नहीं होती। बात-बात पर गुस्सा होती है। कुछ भी पूछो तो चिल्ला कर बोलती है। चिड़चिड़ी हो गई है। एक पल मूड कुछ और दूसरे पल मूड कुछ और। कुछ समय उसे अच्छा देखता हूं तो अगले ही पल वह उखड़ी हुई लगती है। चेहरे पर बेचैनी साफ दिखती है। साइकेट्रिस्ट से अपनी पत्नी के बारे में रोहन ने बताया कि कई बार वह सबसे अलग रहने लगती है। उदास रहती है, कुछ नहीं बोलती, ऐसा लगता है जैसे नाराज है। इसके क्या कारण हैं?

महिलाओं में दिखते हैं कई लक्षण

दरअसल, ये पीएमएस के लक्षण हैं। पीएमएस यानी प्री मेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम। पीरियड्स से पहले यह लक्षण दिखते हैं। दो दिन पहले इसमें परेशानी शुरू होती है जो एक हफ्ते तक रह सकती है। सेंट्रल इस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री (सीआईपी) रांची की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संघमित्रा गोडी बताती हैं अधिकतर महिलाओं में पीएमएस के कुछ लक्षण देखने को मिलते हैं। कुछ में यह मामूली होता है तो कुछ में सीरियस।

20-35 वर्ष की उम्र की महिलाओं में परेशानी अधिक

पीएमएस में दो तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं। एक जो व्यवहार में दिखता है जिसे बिहेवियरल सिम्प्टम या साइकोलॉजिकल सिम्प्टम कहते हैं। आमतौर पर 20 से 35 वर्ष की उम्र की महिलाओं को ये परेशानी होती है।

दिखता है चिड़चिड़ापन

डॉ. संघमित्रा के अनुसार, पीरियड्स अनियमित रहने पर भी पता नहीं चलता कि ये लक्षण इसकी वजह से है। हालांकि डॉक्टर लक्षणों से पहचान लेते हैं ये पीएमएस है। चिड़चिड़ापन, बेचैनी, मूड में बदलाव आदि साइकोलॉजिकल है।

लक्षणों के आधार पर दी जाती हैं दवाइयां

जबकि दूसरे तरह के लक्षण फिजियोलॉजिकल होते हैं। जैसे सिर दर्द, चक्कर आना, ब्रेस्ट में सूजन व दर्द, बॉडी में सूजन होना, मेंस्ट्रुअल क्रैंप आदि। कई महिलाओं का बीपी लो हो जाता है। दरअसल, हर महिला में अलग-अलग तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं। इन लक्षणों के आधार पर ही दवाइयां दी जाती हैं।

डिप्रेशन भी हो सकता है

यदि महीने में छह दिन मूड में बदलाव हो और साल में चार बार भी ऐसा होता है तो इसे प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम ही माना जाता है। किसी-किसी महिला की स्थिति गंभीर होती है। वो डिप्रेशन में जा सकती है।

पीएमएस के ये हैं कारण

पीएमएस के कारणों में हार्मोन में बदलाव को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ओवुलेशन के बाद प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजेन हार्मोन में तेजी से गिरावट होती है। एस्ट्रोजेन नीचे जाने से सेरोटोनिन लेवल पर प्रभाव पड़ता है। सेरोटोनिन ब्रेन का ऐसा केमिकल होता है जिसके कारण मूड बदलता है। नींद डिस्टर्ब होती है।

लाइफस्टाइल चेंज करने से कम होगी परेशानी

पीएमएस से राहत पाने के लिए लाइफस्टाइल को चेंज करें। इसी तरह व्यायाम करने से भी राहत मिलती है। वहीं संतुलित खानपान जिसमें लो फैट हो, उसे लेना बेहतर होता है। इस स्थिति में शराब पीना ठीक नहीं होता। विटामिन ई और विटामिन बी 6 के साथ हर्बल सप्लीमेंट्स भी लें। इवनिंग प्राइमरोज ऑयल का भी इस्तेमाल करें।

काउंसिलिंग और दवाइयां भी जरूरी

काउंसिलिंग भी ऐसे मामलों में जरूरी है। साइकोएजुकेशन से चीजें ठीक हो सकती हैें। गुस्से का भी प्रबंधन किया जा सकता है। इसी तरह एंटी ड्रिप्रेशन और एंटी एंजाइटी दवाइयों भी ली जा सकती है।