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मात्र 250 रुपए खर्च कर सुरक्षित करें लाडली का भविष्य:मदर्स डे पर अपने बेटी को दें जीवन सुरक्षा का तोहफा, जिंदगीभर याद करेगी बिटिया

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
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आप अपनी बिटिया के लिए इस मदर्स दे पर सरकार की उन योजनाओं में छोटा-छोटा निवेश करके बेटी के भविष्य के लिए बड़ा अमाउंट इकट्ठा कर सकती हैं। .

1 - सुकन्या समृद्धि योजना
केंद्र सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की थी। इसमें कम पैसे निवेश करने पर अच्छा रिटर्न मिलता है। साथ ही सालाना 1.5 लाख रुपये तक इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

कौन कर सकता है निवेश
10 वर्ष के कम उम्र की बालिकाओं के लिए उनके माता-पिता बैंक या पोस्ट ऑफिस में अकाउंट खोलकर इस योजना में निवेश कर सकते हैं। बेटी 18 वर्ष या 21 या शादी की उम्र की होती है, पॉलिसी मैच्योर होने पर पैसा निकाल सकते हैं। मात्र 250 रुपए में अकाउंट खोला जा सकता है। इस योजना में अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा कर सकते हैं।

एक बार के निवेश से सालों तक उठाएं फायदा
- इस योजना में 7.6 % सालाना ब्याज मिलेगी। अगर हर साल 36 हजार रुपए भी बेटी के नाम पर निकालती हैं तो 21 साल बाद आपको 15 लाख रुपए तक मिल सकते हैं।
- आयकर विभाग अधिनियम, 1961 के सेक्टर 80सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपए इनकम टैक्स में छूट मिल सकती है। 21 साल में इनकम टैक्स पर 31.5 लाख रुपये की छूट पा सकती हैं।

निवेश के लिए अपनाए यह प्रक्रिया
- किसी भी नजदीकी पोस्ट ऑफिस या बैंक शाखा में जाकर आवेदन फॉर्म भरें।
- बैंकों की वेबसाइट से भी फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।
- ड्राफ्ट/ चेक के साथ केवाईसी के दस्तावेज जैसे कि पासपोर्ट या आधार कार्ड जमा कराना होगा।
2 - बालिका समृद्धि योजना
गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों की बेटियों के लिए साल 1997 में यह योजना शुरू हुई थी। सरकार बेटियों की पढ़ाई के लिए उन्हें हर साल स्कॉलरशिप देती है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि माता-पिता लड़कियों की शादी पूरी होने तक उनकी पढ़ाई जारी रखें।

बेटी के जन्म के समय सरकार 500 रुपए देती है। बच्ची के नाम पर खाता खोला जाता है। बच्ची के हर कक्षा में पहुंचने पर सरकार इस खाते में रुपए जमा करती जाती है। 18 वर्ष की होने पर लड़की खाते से जमा राशि निकाल सकती है। वह पढ़ाई के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। एक परिवार की अधिकतम दो लड़कियों को ही इस योजना का लाभ मिलता है। माता-पिता आंगनबाड़ी केंद्र या किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

3 - सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप
सीबीएसई वन गर्ल स्कॉलरशिप योजना 10वीं तक की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को 11वीं और 12वीं कक्षा में आर्थिक मदद दिलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसका लाभ सिर्फ वहीं बालिकाएं ले सकती हैं जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।
स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत बेटियों के 10वीं क्लास के रिजल्ट के आधार पर ही आगे स्कॉलरशिप दी जाती है। छात्राओं के खाते में 2 साल के लिए हर महीने 500 रुपए छात्रवृत्ति के रूप में जमा की जाती है।

स्कॉलरशिप के लिए ऐसे करें आवेदन
सीबीएसई बोर्ड की तरफ से हर साल रजिस्ट्रेशन फॉर्म निकाले जाते हैं। यह फॉर्म सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट www.cbse.gov.in पर सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप प्रोग्राम के नाम से जारी होते हैं। जिसे भरने के बाद ऑनलाइन ही जमा किया जाता है।

बेटियों के लिए बनाई गईं भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पॉलिसी के बारे में एलआईसी एडवाइजर सोनिका राजपूत ने भी बताया।

4 - कन्यादान पॉलिसी
बेटियों के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए शुरू हुई इस पॉलिसी में बच्ची के माता-पिता आवेदन करते हैं। पॉलिसीधारक यानी बच्ची के माता-पिता की उम्र 18-50 के बीच होनी चाहिए। वहीं बेटी की उम्र अधिकतम 10 वर्ष हो सकती है।

- यह पॉलिसी 13 से 25 वर्ष के लिए ले सकते हैं। - 3 साल तक प्रीमियम भरने की छूट दी जाती है। - पॉलिसी मैच्योर होने पर करीब दो दोगुना रिटर्न मिलता है।

इसे ऐसे समझे की अगर आज आपके घर में बेटी पैदा होती है। आप उसके लिए 20 साल की पॉलिसी लेते हैं, तो 17 साल में कुल 1 लाख रुपए जमा करने पर आपको लगभग 1.88 लाख रुपए मिलेंगे।

5 - जीवन तरुण पॉलिसी
90 दिन से लेकर 12 साल की उम्र की बेटियों के लिए यह पॉलिसी ली जा सकती है। इसमें निवेश करने पर जमा राशि का ढाई गुना रिटर्न मिलता है। इसके लिए आपको 25 साल का इंतजार करना पड़ता है। 19 साल तक प्रीमियम देना होता है। पेरेंट्स हर महीने कम से कम 400 रुपए जमा कर सकते हैं। 19 साल में 90 हजार रुपए जमा करने पर 25 साल बाद करीब 2.31 लाख रुपए मैच्योरिटी अमाउंट मिलेगा।

आप रहें या न रहें बेटी को मिलेगा फायदा
स्पेशल कंडीशन के लिए पेरेंट्स को हर महीने प्रीमियम में 100 रुपए अधिक जमा करने होंगे। इसका फायदा यह होगा कि पॉलिसी के टाइम पीरियड में अगर माता-पिता का एक्सीडेंट होता है या उनकी आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तब भी पॉलिसी जारी रहती है, बल्कि बचे हुए सभी प्रीमियम माफ हो जाते हैं। मैच्योरिटी पर परिवार को पूरा अमाउंट दिया जाता है।

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