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मामला सुरक्षा का:मुंबई में कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं ?

3 दिन पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
  • NCRB 2019 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, रेप के बाद मर्डर व गैंग रेप के मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर। देशभर में दर्ज हुए 283 मामलों में सबसे अधिक 47 हादसे महाराष्ट्र में।

मुंबई के साकीनाका इलाके में 34 वर्षीय महिला के साथ रेप और बेरहमी से हत्या के मामले ने एक बार फिर साल 2012 में देश को दहलाने चुके निर्भया कांड के जख्म को ताजा कर दिया है। 9 सितंबर को मुंबई के एक ऑटो रिक्शा में महिला का रेप कर उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डालकर बेरहमी से वार कर जख्मी कर दिया। निर्भया की तरह ही मुंबई की पीड़िता ने भी बहुत ज्यादा खून बहने और अंदरूनी चोट के कारण अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस भयानक हादसे के बाद एक बार फिर से महिलाएं खौफ और गुस्से से भर गई हैं, उनकी अपनी सुरक्षा को लेकर मांग और ऊंची हुई है। वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन ब्लेम-गेम में व्यस्त हैं। इस बीच जानते हैं, महिलाओं के लिए कितनी सेफ है मुंबई।

शिवसेना का कहना, दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में है मुंबई
शिवसेना पार्टी के ‘सामना’ अखबार ने 13 सितंबर के संपादकीय में लिखा कि मुंबई में महिला के साथ हुई रेप व हत्या की घटना से महाराष्ट्र की संस्कृति को ठेस पहुंची है। मुंबई पुलिस इस मामले में दोषियों के खिलाफ कारवाई कर रही है। इसमें आगे जोड़ा गया, ‘साकीनाका की घटना से सभी को आघात पहुंचा है, फिर भी मुंबई महिलाओं के लिए दुनिया का काफी सुरक्षित शहर है, इस पर किसी तरह की दो राय होने की कोई वजह नहीं।’
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पुलिस अभी तक सिर्फ एक ही दोषी को पकड़ सकी है। जबकि मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले का कहना है कि पुलिस हर अपराध स्थल पर मौजूद नहीं रह सकती। घटना के अगले ही दिन सीसीटीवी फुटेज की मदद से एक दोषी को पकड़ा गया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलेगा।

कितनी सुरक्षित है मुंबई, इसकी पोल खोलती है खुद पुलिस की रिपोर्ट
मुंबई पुलिस की क्राइम रिपोर्ट देखी जाए तो 2021 में जुलाई तक मुंबई में 550 रेप के मामले दर्ज हुए, जिनमें 445 दोषियों को पकड़ा गया है। जबकि 2020 जुलाई तक रेप का आंकड़ा 377 था जिनमें 299 दोषियों को पुलिस ने पकड़ा था। एक ही साल में रेप के मामले 31% बढ़े, जबकि दोषियों को पकड़ने में पुलिस की कार्यक्षमता को देखा जाए तो वह 21% से घटकर 19% हो गई।

महाराष्ट्र सबसे असुरक्षित राज्य
नेशनल क्राइम ब्यूरो रिकॉर्ड (NCRB) की 2019 की रिपोर्ट को देखा जाए तो रेप के बाद मर्डर व गैंग रेप के मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है। 2019 में देशभर में इसके 283 मामले दर्ज किए गए थे जिसमें से सबसे अधिक 47 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। रेप के बाद मर्डर व गैंग रेप केस में मध्य प्रदेश 37 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

क्या कहता है महानगरों का डेटा
मेट्रोपॉलिटन शहरों की बात की जाए तो रेप के बाद मर्डर व गैंग रेप के मामले में दिल्ली 5 मामलों के साथ पहले नंबर पर है, 4 मामलों के साथ चेन्नई दूसरे और 2 मामलों के साथ मुंबई और लखनऊ तीसरे स्थान पर हैं। 2019 में देशभर में रेप के कुल 32033 मामले दर्ज किए गए, तो वहीं 19 मेट्रोपॉलिटन शहरों में कुल 3309 रेप केस दर्ज हुए। जिसमें सबसे अधिक मामले दिल्ली (1231), दूसरे नंबर पर जयपुर (517) और तीसरे नंबर पर मुंबई में 394 रेप के मामले दर्ज हुए।

दिल्ली के बाद मुंबई सबसे अनसेफ
महिला छेड़खानी की बात की जाए तो दिल्ली (2,311) के बाद मुंबई (2,069) में सबसे ज्यादा छेड़खानी के मामले दर्ज हुए। इनमें यौन उत्पीड़न, कपड़े उतारने की कोशिश, ताक-झांक और पीछा करने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो दिल्ली के बाद मुंबई में सबसे ज्यादा क्राइम रेट दिखता है।

सेफ सिटी इंडेक्स में दिल्ली 48वें और मुंबई 50वें स्थान पर
इस साल अगस्त में ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ द्वारा जारी की गई दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों की लिस्ट ( safe city index 2021) में भारत के दो शहर दिल्ली और मुंबई को शामिल किया गया। 60 शहरों की लिस्ट में दिल्ली 48वीं और मुंबई 50वीं रैंक पर रहा। इन शहरों को डिजिटल सिक्योरिटी, हेल्थ, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और पर्सनल सिक्योरिटी के मापदंडों पर मापा गया। दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में कोपेनहेगन (copenhagen), टोरंटो (toronto) और सिंगापुर (singapore) शामिल रहे।

महिला सुरक्षा के मामले में पिछड़े
2019 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी (Georgetown University’s Institute for Women, peace and security) ने महिला सुरक्षा के पैमाने पर भारत को 167 देशों में 133 रैंक दी थी। क्योंकि भारत में महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने, सड़क से गुजरने में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। यानी रिपोर्ट से जाहिर होता है कि दिल्ली और मुंबई भले ही दुनिया के सुरक्षित शहरों की लिस्ट में शामिल हो जाएं लेकिन आंकड़ों और हकीकत को देखा जाए तो महिला सुरक्षा के मामले में अभी भी हम कोसों दूर हैं।

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