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बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के 5 टिप्स:जाने क्या हैं गुड पेरेंटिंग के तरीके, पैरेंट्स जरूर ध्यान दें इन छोटी-छोटी बातों पर, क्या है एक्सपर्ट की राय ....

3 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं
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  • सराहना अवश्य करें

पेरेंटस बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है। बच्चे के जन्म से पहले ही माता-पिता को उसकी परवरिश को लेकर कई बातों का ध्यान रखना होता है। अपने बढ़ते बच्चे की परवरिश के दौरान माता-पिता को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

बच्चों पर भरोसा कायम करें
बच्चों पर भरोसा कायम करें

कई बार पेरेंटस अपने बच्चे से कुछ ऐसी बातें कह देते हैं, जिससे उसका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है। ऐसा न हो इसलिए बच्चे के सामने ये बातें कहने से बचें:

गलतियां न गिनाएं
अक्सर पेरेंट्स दोस्तों और रिश्तेदारें के सामने अपने बच्चों की गलतियां गिनाने लगते हैं। इससे बच्चों का आत्मविश्वास कम होता है और ये बातें उनके मन में बैठ जाती हैं। वे अपने आप को कमजोर समझने लगते हैं।

बच्चों की गलतियों पर मायूस न हो
बच्चों की गलतियों पर मायूस न हो

सबके सामने बच्चों का मजाक न बनाएं
कोई काम सही तरीके से न करने पर सबके सामने बच्चे का मजाक बनाने की गलती कभी न करें। इससे बच्चे का हौसला टूट सकता है और अगली बार बच्चा वह काम करने से कतरा भी सकता है। बच्चे की छोटी-बड़ी कोशिश पर उसका आत्मविश्वास बढ़ाएं, इससे उसे अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलेगी।

बच्चे का मजाक बनाने की गलती न करें
बच्चे का मजाक बनाने की गलती न करें

कोई भी परफेक्ट नहीं होता
बच्चे की क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए उसे नई चीजें सिखाएं, जैसे- पेंटिंग, प्लांटिग, आदि। इससे आपका बच्चा अलग-अलग एक्टिविटी में व्यस्त रहेगा और क्रिएटिव बनेगा। इससे यह पता चलेगा कि बच्चे को किस काम में रुचि है।

बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं
बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं

दूसरे बच्चों से तुलना न करें
हर बच्चा अपने आप में अलग होता है। हर बच्चे में अपनी अलग खूबियां होती हैं। अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। ऐसा करने से बच्चे का आत्मविश्वास कम होगा और बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है। बच्चा दूसरे बच्चों से लड़ाई-झगड़ा भी कर सकता है।

दूसरे बच्चों से तुलना न करें
दूसरे बच्चों से तुलना न करें

डांटने या पीटने की बजाय प्यार से समझाएं
गलती करने पर बच्चे को डांटने या पीटने की बजाय प्यार से समझाएं। बच्चे गुस्से की जगह प्यार से जल्दी बात को समझते हैं। मारने से बच्चे अपने माता-पिता से डरने लगते हैं। कई बच्चे तो पेरेंट्स को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।

डांटने या पीटने की बजाय प्यार से समझाएं
डांटने या पीटने की बजाय प्यार से समझाएं

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक बिंदा सिंह का कहना है कि पेरेंट्स को खुद ऐसा व्यवहार करना चाहिए कि बच्चे उन्हें अपना रोल मॉडल समझें। पेरेंट्स यदि खुद दिनभर फोन पर बिजी रहेंगे और बच्चों को फोन से दूर रहने के लिए कहेंगे तो बच्चे उनकी बात कभी नहीं मानेंगे। दूसरी बात, आप बच्चों को कभी भी किसी के सामने न डांटें, इससे उनका कॉन्फिडेंस कम होता है। पेरेंट्स बच्चों को क्वालिटी टाइम दें और उन्हें प्यार से अच्छी आदतें सिखाएं।

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