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सकारात्मक विचार:डर है, चिंता है, बेचैनी है, तो मन को समझाएं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें

डॉ. नम्रता सिंह12 दिन पहले
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  • हालात ही ऐसे हैं कि रातों को नींद न आना, एक अजीब-सी बेचैनी का मन में बस जाना, निगेटिव ख्यालों का बार-बार आना सामान्य हो गया है।
  • इन हालात को काबू में करने के लिए ब्रेन को ट्रेन किए जाने की ज़रूरत है।

कोरोना महामारी से पहले कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब हम-आप, देश-विदेश में हर जगह हर आदमी एक तरह की परेशानी से गुज़रेगा, हम सब में एक जैसे डर, चिंता और भय के भाव होंगे। संकट का वितान बहुत बड़ा है। डर और चिंता स्वाभाविक है। संक्रमण की एक के बाद एक लहरें आ रही हैं। वैक्सीन है, लेकिन फिर भी भय बना हुआ है। मन है कि फिक्र किए बिना रहता ही नहीं।

इसलिए बहुत ही ज़रूरी हो जाता है कि हम स्वयं को और अपने परिवार को इस तरह से संभालें कि नकारात्मक वातावरण में भी अच्छी तरह से रह सकें और अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ सकें…

क्या-क्या परेशानियां हो रही हैं ?

  • हर समय ऐसा लगना कि कोई बुरी ख़बर आने वाली है जैसे - किसी का फ़ोन आने पर डर जाना।
  • न्यूज़ देखकर दिन भर उसी के बारे में सोचना, सोशल मीडिया पर किसी के घर की ख़बर देखकर उसके साथ कुछ बुरा ना हो गया हो, ऐसा सोचना।
  • परिवार में किसी को संक्रमण ना हो जाए, इस बात को लेकर हर समय चिंतित और व्यग्र रहना।
  • घर में किसी के भी के कोरोना पॉज़ीटिव आने पर बहुत ज़्यादा डर जाना और निगेटिव सोचना और बातें करना।
  • दिन भर मुंह सूखना, खाना खाने का मन ना करना, रात में ठीक से नींद ना आना।
  • बातों का रुख़ बार-बार महामारी से जुड़े पहलुओं की ओर मुड़ते रहना।

कैसे करें अपने ब्रेन को ट्रेन

  1. कोरोना महामारी का एक पहलू यह भी है कि इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है पर हम सिर्फ ऐसे लोगो के बारे में जानकारी लेते है जिन्हें कुछ परेशानी हो रही हो। जैसे बाद में भी ऑक्सीजन की कमी हो रही है, ऐसे मामलों के बारे में हम टीवी पर देखते हैं या जिन लोगों को परेशानी हो रही हो उनके बारे में जानने की कोशिश करते हैं, जिन लोगो की दुखद मौत हो रही हो। हमारा ब्रेन जिन तस्वीरों को देखता है उनको सेव कर लेता है और फिर वही पिक्चर एक फिल्म की तरह हमारे दिमाग में घूमती है। इसलिए सबसे पहले कुछ दिनों के लिए ऐसे माध्यमों से दूर रहने का प्रयास कीजिए जो आपको निगेटिव सूचनाएं देती है जैसे टीवी और सोशल मीडिया।
  2. स्वयं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखें। रोज कम से कम 15 मिनट एक्सरसाइज़ करें, टहलें या योग करें। पूरे दिन को एक दिन पहले से प्लान कर लें और उसी के अनुसार काम करें। दिन भर में क्या खाया, कितना पानी पीया, एक्सरसाइज़ की या नहीं, कितने घंटे काम किया, हॉबी को कितना समय दिया इन बातों को डायरी में लिखिए। इसका रोज़ या साप्ताहिक तौर पर विश्लेषण कीजिए। जहां चूक हो रही होगी, आपको पता चल जाएगा। इससे आपको ख़ुद में सकारात्मक बदलाव लाने और ज़्यादा से ज़्यादा एक्टिव रहने की प्रेरणा मिलेगी।
  3. मानते हैं कि कोरोना एक बड़ी और गंभीर समस्या है पर सिर्फ हम और आप इससे घिरे हुए नहीं हैं। आज हर इंसान इस परेशानी से लड़ रहा है। कोशिश करें कि आप आसपास के लोगों से बात करते हुए उनको हिम्मत दें कि यह एक बुरा समय है और धीरे-धीरे ये गुज़र जाएगा। जब आप किसी को कुछ समझाते है या दूसरे की मदद करने की सोचते हैं तो आप के अंदर एक हौसले का जज़्बा खड़ा हो जाता है। इसलिए इस कठिन समय में समाज के लिए, आसपास के लोगों के लिए कुछ करने का सोचे और करें। जैसे-किसी की पैसे से मदद करना, किसी के लिए कुछ खाने-पीने का इंतज़ाम करना, इत्यादि जो भी सामर्थ्य में हो। ऐसा करने से सुकून महसूस होगा और नकारात्मकता दूर होगी।
  4. घर में अपने आप को व्यस्त रखने के लिए कुछ नए काम करें जैसे घर की व्यवस्था बदल दीजिए। सुबह-सुबह की धूप लीजिए। किसी किताब के अंश फोन पर अपने दोस्त/ दोस्ताें को पढ़कर सुनाइए, कॉन्फ्रेंस कॉल करके या वीडियो कॉन्फ्रेंस करके बुक रीडिंग का सत्र रखिए। अपनी क्रिएटिविटी को बढ़ाए, इंडोर गेम्स एन्जॉय करें, अपनी खाने-पीने की आदतों को ठीक करें। जितना हो सके पौष्टिक खाना खाएं। स्वस्थ आदतें बनाने का यह बेहतर समय है। हर दिन के काम की सूची बना लें, ताकि लक्ष्य हासिल करने का संतोष हो।
  5. हमारे अपने ऐसे बहुत से शौक़ होते हैं, जो अपने बिजी शेड्यूल के कारण हम पूरे नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इस वक़्त ख़ुद का ध्यान निगेटिव चीज़ों से हटाने के लिए अपने किसी शौक़ जैसे- गार्डनिंग, कुकिंग, पेंटिंग, वाद्य यंत्र बजाना सीखना, ऑनलाइन ब्लॉग लिखना सीख सकते हैं। सीखना जहां आपको एक नया कौशल सिखाएगा, वहीं आपके ध्यान को सकारात्मक रूप से कौशल पर केंद्रित रखने में मदद करेगा।
  6. अपने ब्रेन को सकारात्मकता की ओर मोड़िए। बेहतर दृश्यों की मदद लीजिए। अपनी पुरानी तस्वीरें देखें और उस तस्वीर के वक़्त के अनुभवों को घर के छोटों या बच्चों से साझा करें। अपनी उपलब्धियों और उससे जुड़ी सीखों का वर्षों के हिसाब से रिकॉर्ड बना सकते हैं।
  7. इस तरह से ये छोटी-छोटी आदतें अगर आप अपनी बदल लेते है तो सिर्फ़ दो हफ्ते में आप अपने अंदर एक बदलाव महसूस करेंगे और आप पहले से ज़्यादा मेंटली स्ट्रॉन्ग होंगे। अच्छे दिन थे और रहेंगे, इस पर भरोसा रखें।
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