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बेहतर याददाश्त:रास्ता भटक जाएं तो महिलाओं की लें मदद, महिलाओं को जल्दी याद हो जाते हैं रास्ते, पहाड़, नदी-नाले और खाली मैदान को बनाती हैं लैंडमार्क

3 महीने पहले
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  • लैंडमार्क पसंद न आए तो अनुमान पर करती हैं भरोसा, शॉर्टकट नहीं ढूंढती लेकिन गलियां रखती हैं याद
  • गूगल से पहले भारत को डिजिटल मैप पर लाने वाली थी ये भारतीय महिला

अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को रास्ते याद नहीं रहते, या फिर मैप दिया जाए तो वो भी उन्हें समझ नहीं आता। अब रिसर्च इस बात को गलत साबित कर रही है। साल 2018 में प्रतिष्ठित साइंस जर्नल 'मेमोरी एंड कॉग्निशन' के मुताबिक याददाश्त के मामले में महिलाएं, पुरुषों से कई कदम आगे हैं। वे चेहरे याद रखती हैं, काम याद रखती हैं, यहां तक कि वे रास्ते भी जल्दी याद कर पाती हैं।

इस बात को जांचने के लिए कई टुकड़ों में स्टडी हुई। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों के दो समूहों को मशरूम इकट्ठा करने के लिए मैक्सिको के एक गांव में भेजा गया। जंगलों से घिरे उस इलाके को सैटेलाइट पोजिशन दे दी गई ताकि सबकी एक्टिविटी दिखती रहे। इसके अलावा सारे प्रतिभागियों के दिल की धड़कन को भी मॉनिटर किया गया। इसमें दिखा कि महिलाएं ज्यादा मशरूम जमा करके समय से पहले लौट आईं, जबकि पुरुषों की 70% से ज्यादा एनर्जी खर्च हुई और वे रास्ता भी भटक गए। ये तो हुई रास्ते याद रख पाने की बात, लेकिन जब डायरेक्शन पूछा जाए तो महिला और पुरुष दोनों ही अलग-अलग तरीके से रास्ता बताते हैं। महिलाएं आमतौर पर प्राकृतिक चीजों को लैंडमार्क की तरह देखती हैं, जैसे पहाड़, नदी-नाले या फिर खाली मैदान। वहीं पुरुष दुकानों, बैंक या थानों जैसी जगहों से जोड़ते हुए रास्ते याद रखते हैं। अगर रास्ते में कोई प्राकृतिक दृश्य न हो तो महिलाएं लैंडमार्क याद रखने की बजाए अनुमान पर भरोसा करती हैं। जानिए रास्ते याद रखने का कौनसा तरीका अपनाती है महिलाएं?

सिंबॉलिक
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लड़कों की तरह शॉर्टकट नहीं ढूंढती लेकिन गलियां रखती हैं याद महिलाएं
साइंस की माने तो महिला और पुरुष दोनों ही रास्ता याद रखने का अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। इतना ही नहीं अगर उन्हें रास्ता समझाने के लिए कहा जाए तो दोनों ही एक ही रास्ते को अलग-अलग अंदाज में बताते है। इसके पीछे का राज साइंस में छुपा है। रास्ता पहचानने के पीछे की साइकोलॉजी को समझने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने 2018 में स्टडी की। इसमें देखा गया कि पुरुष कोई भी रास्ता याद करने के लिए लैंडमार्क पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, इसके बजाए वे डायरेक्शन के हिसाब से चलते हैं। जबकि महिलाएं रास्ता याद रखने के लिए अपने लैंडमार्क खुद बनाती हैं। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं शॉर्टकट बनाने या ढूंढने में विश्वास नहीं रखती, हालांकि उन्हें गलियां और सड़कें ज्यादा याद रहती हैं। इसलिए वे अपने तय लैंडमार्क पर पहुंचने के बाद ही आगे का रास्ता पता लगा पाती हैं। महिलाएं रास्ता तय करते समय ये भी ध्यान देती हैं कि सड़क या रास्ता कितना घुमावदार है, या फिर टेढ़ी-मेढ़ी गलियों से गुजरते हुए जिक-जैक पैटर्न में तैयार किया गया है या नहीं।

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बगीचा, पेड़, पहाड़, पुरानी इमारतें और धार्मिक स्थल बनते हैं महिलाओं के लैंडमार्क

महिलाएं अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए ऐसे लैंडमार्क बनाती हैं जो उन्हें हमेशा याद रहें या फिर उनके जीवन की किसी घटना से जुड़े हों। रिसर्च में महिलाओं और पुरुषों के बीच एक एक्सपेरिमेंट किया गया। जिसमें कार, चेयर, दुकान, पहाड़, पेड़, बगीचा और प्ले ग्राउंड को लैंडमार्क बनाया गया। रिजल्ट में देखा गया कि पुरुष इन लैंडमार्क को शॉर्टकट बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। जबकि महिलाएं उसी के आधार पर आगे का रास्ता पता लगा रहीं थी। भारत में महिलाएं बगीचा, पेड़, पहाड़, पुरानी इमारतें और कई बार धार्मिक स्थल को अपना लैंडमार्क बनाती हैं। अगर किसी जगह से उनकी कोई खास याद जुड़ी है या घटना जुड़ी है, तो वे उस जगह को कभी नहीं भूलती।

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गूगल से पहले भारत को डिजिटल मैप पर लाने वाली भी महिला
एक समय वो था जब हम रास्ता पूछने के लिए जगह-जगह गाड़ी रोकते थे। लेकिन आज हर किसी के मोबाइल में गूगल मैप इंस्टॉल है, जिसकी मदद से आप बड़ी आसानी से अपनी मंजिल पर पहुंच जाते हैं। डिजिटल मैप ने दुनिया के नक्शे को बस एक क्लिक दूर कर दिया है। लेकिन क्या आपको पता है कि गूगल से भी पहले भारत को डिजिटल मैप पर लाने का काम एक भारतीय महिला ने किया था। मूलरूप से यूपी के बरेली जिले की रहने वाली रश्मि शर्मा ने 1995 में मैप माई इंडिया (map my india)कंपनी की शुरुआत की थी। ऐसी डिजिटल मैप कंपनी जो बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के लोकेशन बताती है। उस दौर में भारत में इंटरनेट नहीं आया था। 2005 में पहली बार इंटरनेट भारत में आया और उसके बाद तमाम एमएनसी कंपनियों ने यहां कमद जमाए। मैप माई इंडिया आज भारतीय मौसम विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर काम कर रही है। रश्मि शर्मा कंपनी की को-फाउंडर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं।

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