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तालिबान के राज में नौकरीपेशा महिलाओं पर दोहरी मार:न नौकरी बच रही और न सैलरी मिल रही, US से लगा रहीं गुहार

नई दिल्ली2 महीने पहले
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अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत आने के बाद महिलाओं की स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। अफगानी महिला टीचरों और हेल्थ वर्करों ने अमेरिका और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से गुहार लगाई है कि अफगानिस्तान को मिलने वाली मदद न रोकें। वर्ना जीने के लाले पड़ जाएंगे। महिलाओं ने कहा है कि उन्हें अरसे से सैलरी नहीं मिली है, जिससे घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। काबुल पर कब्जे के बाद से अमेरिका ने अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक को दी जाने वाली 9.4 अरब डॉलर रोक दी है। विश्व बैंक के मुताबिक, अफगानिस्तान की करीब 90 फीसदी आबादी हर दिन दो डॉलर से कम में गुजारा करने के लिए मजबूर है। देश को 2019 में 4.2 अरब डॉलर मिला था, मगर इस बार कुछ भी नहीं मिलने जा रहा है।

अफगानिस्तान में कामकाज पुरुषों के हाथ में, महिलाओं के हाथ निचले स्तर की नौकरियां अफगानिस्तान में ज्यादातर कामकाज पुरुषों के हाथ में है। तालिबान के आने के बाद महिलाओं को वैसे भी कामकाज के लायक नहीं समझा रहा है। हाल ही में तालिबान के काबुल के मेयर ने कहा था कि महिलाओं को सिर्फ बाथरूम साफ करने के काम में लगाया जाना चाहिए। हमदुल्लाह नामोनी ने कहा था कि सिर्फ उन्हीं महिलाओं को काम पर जाने की इजाजत होगी, जहां पुरुष काम नहीं कर सकते हैं। जैसे डिजाइन या इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाली महिलाएं या महिला टॉयलेट्स में काम करने वालीं महिलाएं। 1996-2001 के अपने शासन के दौरान भी तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं को स्कूल और काम पर जाने से रोक दिया था।

अमेरिका के रहने पर 10 कर्मचारियों में थीं 3 महिलाएं
वर्ल्ड बैंक की 2007-08 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में महिलाओं के हाथ में नौकरी बेहद कम है। देश में 10 कर्मचारियों में से 7 पुरुष हैं और 3 महिलाएं। शहरी इलाकों में जेंडर गैप ज्यादा है, जहां पर लेबर मार्केट में हर 5 में से बस 1 ही महिला है। यह आंकड़ा तब का है जब वहां पर अमेरिकी सेना मौजूद थी और चुनाव के जरिए सरकार चुनी जाती थी। तालिबान के सत्ता में आने के बाद कई महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया है और कई ने डर की वजह से नौकरी छोड़ दी। तब से यह संख्या और घटी ही होगी।

देश में 1.2 लाख महिला टीचर्स, 14 हजार हेल्थ वर्कर्स, जिन्हें 3 महीने से नहीं मिली सैलरी
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अफगानिस्तान में 1.2 लाख महिला टीचर्स हैं और करीब 14,000 महिलाएं हेल्थ केयर वर्कर्स हैं। इन सभी को बीते तीन महीने से सैलरी नहीं मिली है। इसके अलावा, 16,000 महिला टीचर्स ऐसी हैं, जिन्हें हाईस्कूल में पढ़ाने से तालिबान ने रोक दिया है। उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।

अमेरिका के रहने के दौरान सुधरे थे लड़कियों-महिलाओं के हालात
अफगानिस्तान में अमेरिका की मौजूदगी के दौरान महिलाओं की हालत सुधरी थी। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में 2018 में महिला साक्षरता दर करीब दोगुनी होकर 30 फीसदी हो गई थी। वहीं, 2001 में जब स्कूल जाने वाली लड़कियों की संंख्या जीरो थी, वह 2018 में बढ़कर 25 लाख हो गई।