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नाजनीन बोलीं-बिना क्राइम के काटी 6 साल सजा, माफी मंगवाई:दो देशों की लड़ाई में पिसी, ईरान पर टॉर्चर करने-ब्रिटेन पर चुपचाप देखने के आरोप

लंदनएक महीने पहले
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ईरान-ब्रिटिश नागरिक नाजनीन जगारी-रैटक्लिफ ने एक दोनों देशों की सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने आप को जबरन बंदी बनाए रखने और झूठे कबूलनामे पर दस्तखत करवाने का आरोप लगाया है। उनको ईरान में जासूसी करने के अपराध में साल 2016 में गिरफ्तार किया गया था।

नाजनीन ने कहा है, 'मैंने कोई अपराध नहीं किया, फिर भी मुझे 6 साल की सजा मिली, और अब अपनी रिहाई के लिए भी मुझसे ईरानी सरकार ने जबरदस्ती कबूलनामे पर साइन करवाए, उसे फिल्माया गया, एक दिन यह सच भी बाहर आएगा।'

रिहा होने के बाद नाजनीन ने BBC को एक इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने कबूला कि उन्हें UK वापस भेजने से पहले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने उनसे उनकी मर्जी के खिलाफ बयान लिए। इसे रिकॉर्ड भी किया गया। उन्होंने कहा कि किसी दिन वे इसे दिखाकर मेरे बारे में झूठ फैलाएंगे।

नाजनीन को इसी साल 16 मार्च को ईरान से रिहा किया गया। ब्रिटेन सरकार की तरफ से ईरान को 53 करोड़ डॉलर अदा किए गए थे, जिसके बाद नाजनीन को रिहा किया गया। वह साल 2016 में अपनी दो साल की बेटी गैब्रिएला के साथ ईरान में अपने माता-पिता से मिलने गई थीं, ब्रिटेन वापस आते समय उन्हें ईरानी सरकार ने अरेस्ट कर लिया था। 6 साल की सजा में एक साल उन्हें ईरान में उनके माता-पिता के घर में हाउस अरेस्ट, यानी नजरबंद करके रखा गया।

आजादी के सौदे में सिर चढ़ा जिंदगीभर का इल्जाम
नाजनीन ने कहा कि उन्हें ईरान से जाते वक्त उनके माता-पिता से मिलने की इजाजत तक नहीं दी गई। उनका यह भी आरोप है कि इस घटना के वक्त सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि UK सरकार के प्रतिनिधि भी वहीं मौजूद थे। मगर उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा। मजबूरन मुझे अपनी आजादी के बदले में जिंदगीभर के लिए अपने सिर पर गलत इल्जाम ढोना पड़ेगा।

6 साल इंसाफ की लड़ाई लड़ी, मगर अब सब बेकार
इंटरव्यू में नाजनीन कहती हैं कि वह चाहती हैं कि दुनिया को पता लगे कि कैसे ईरानी शासन ने उन्हें अमानवीय तरीके से मजबूरन कुबूलनामे पर हस्ताक्षर करवाए, जबकि वह इस पर कभी भी दस्तखत नहीं करना चाहती थीं। उनका कहना है, 'मैं ऐसा क्यों करना चाहूंगी, जबकि बीते 6 साल मैंने सिर्फ यही लड़ाई लड़ी है कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया।' नाजनीन के वकीलों ने कहा है कि इस तरह गलत तरीके से कबूलनामा लेने से इसकी कोई अहमियत नहीं बचती है।

'यह सिर्फ ईरानी सरकार की स्ट्रैटेजी है कि वो अपना खौफ दिखाना चाहते हैं कि कैसे वो जो चाहें वो करवा सकते हैं।' - नाजनीन
'यह सिर्फ ईरानी सरकार की स्ट्रैटेजी है कि वो अपना खौफ दिखाना चाहते हैं कि कैसे वो जो चाहें वो करवा सकते हैं।' - नाजनीन

दोनों सरकार की मिलीभगत की मुझे मिली इतनी बड़ी सजा
नाजनीन की वकील ने इस घटना के बाद UK सरकार को घेरते हुए इसे ब्रिटेन और ईरान की साजिश बताया है। कहा गया इन दोनों देश की मिलीभगत से ही नाजनीन से जबरदस्ती गलत कबूलनामे पर हस्ताक्षर लिए गए।

नाजनीन की वकील का कहना है कि उनकी रिहाई के समय UK से अधिकारी गए थे, उन्होंने खुद नाजनीन से कहा था कि इन कागजों की आगे कोई अहमियत नहीं रहेगी। मगर उसे अगर प्लेन में बैठकर वापस अपने परिवार के पास जाना है तो इन कागजात पर दस्तखत करने होंगे। इस घटना से नाजनीन को काफी बड़ा झटका लगा था, जिससे वह अभी तक काफी परेशान हैं।

ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने UK सरकार को घेरा
मानवाधिकार संगठन निवारण ने नाजनीन की तरफ से UK सरकार के विदेश सचिव लिज ट्रस की निंदा करते हुए पत्र लिखा है। इसमें साफ लिखा है कि ईरानी सरकार द्वारा नाजनीन से गलत दस्तावेजों पर जबरदस्ती दस्तखत कराने की इस घटना पर UK सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठा रही। आने वाले समय में इसका बहुत बुरा असर पड़ने वाला है।

ह्यूमन राइट्स ने इस जबरन स्वीकारोक्ति को उस यातना के पैटर्न का हिस्सा और पार्सल माना है, जिसे नाजनीन ने पहली बार साल 2016 में ईरान में हिरासत में लिए जाने के बाद झेला। यह माना जा रहा है कि यह कुबूलनामा नाजनीन के खिलाफ आगे ईरान में इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस बात की भी आलोचना की है कि कैसे विदेश कार्यालय ने नाजनीन को मिलने वाली यातनाओं के खिलाफ ईरानी अधिकारियों पर आरोप लगाने के लिए बहुत कम प्रयास किए। इस समस्या ने विदेशी कैदियों को दी जाने वाली यातनाओं की पॉलिसी पर भी सवाल खड़ा किया है।

अपनी बेटी और परिवार से मिलने के लिए मजबूरी में मानीं सारी शर्तें।
अपनी बेटी और परिवार से मिलने के लिए मजबूरी में मानीं सारी शर्तें।

जंजीरों में बांधा, तो कभी मेंटल वार्ड भेजा
नाजनीन को ईरान की क्रूर सीक्रेट अदालतों ने सजा सुनाई। उन्हें जंजीरों में जकड़कर और आंखों पर पट्टी बांधकर रखा गया, तेज रोशनी और शोर पैदा करके उन्हें सोने नहीं दिया गया। कई बार उन्हें नौ-नौ घंटे की कड़ी पूछताछ से गुजरना पड़ा। 2019 जुलाई में भूख हड़ताल के बाद नाजनीन को एक अस्पताल के मेंटल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था और एक हफ्ते तक उन्हें बिस्तर से बांधकर रखा गया। इन 6 सालों में उन्हें कई तरह की यातनाएं दी गईं।