• Hindi News
  • Women
  • Increasing Number Of Women Managers On Top Posts In The Country, Crisis In The Jobs Of Low Salary

महिलाओं की नौकरी का हिसाब:देश में टॉप पोस्ट पर बढ़ रही महिला मैनेजरों की संख्या, कम सैलरी वालों की नौकरी पर संकट

नई दिल्ली2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फोटो सौजन्य: Christina Morillo - Dainik Bhaskar
फोटो सौजन्य: Christina Morillo
  • ग्लोबल स्तर पर महिला सीईओ की संख्या में 27 फीसदी की वृद्धि
  • भारत में बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी करीब छह प्रतिशत बढ़ी

देश में कामकाजी महिलाओं के हालात को लेकर अच्छी खबर आई है। नौकरी करने वाले लोगों के बारे में आई इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में टॉप मैनेजरियल और बोर्ड पोजिशन संभालने वाली महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। खासतौर पर महिलाओं के टॉप पोस्ट पर आने के मामले में पूर्वोत्तर के राज्यों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि हाल ही में केंद्र सरकार की रिपोर्ट में ये साफ था कि पिछले कुछ समय पुरुषों की तुलना में महिलाओं की नौकरी ज्यादा गई है।

पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में हालात बेहतर, पंजाब ने भी किया कमाल

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों की कामकाजी महिला की स्थिति कंपनियों में टॉप पोस्ट हासिल करने के मामले में काफी अच्छी है। इन क्षेत्रों में मैनेजर की पोजीशन में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा है। 34.1 फीसदी के साथ मेघालय टॉप पर है। उसके बाद सिक्किम और मिजोरम का नंबर है। आंध्र प्रदेश में 32.3 फीसदी और पंजाब 32.1 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर है। वहीं 6.9 फीसदी के रेशियो के साथ असम सबसे निचले पायदान पर है।

बड़े शहरों से बेहतर छोटे शहरों और गांवों का आंकड़ा

अगर देशभर में मैनेजेरियल पोजीशन में महिलाओं की स्थिति की बात करें तो अनुपात 18.7 फीसदी है। जहां शहरों में ये रेशियो 16.4 फीसदी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो ये रेशियो 21.4 फीसदी है। इस सर्वे से यह भी पता चला है कि विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और मैनेजर के तौर पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम करने वाली महिलाओं के अनुपात की बात करें तो उत्तर-पूर्वी राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। 51.8 फीसदी के साथ मणिपुर पहले पायदान पर है। 51.7 फीसदी के साथ मेघालय दूसरे नंबर पर, 50.4 फीसदी के साथ सिक्किम तीसरे और 47.9 फीसदी के साथ आंध्र प्रदेश चौथे नंबर पर है। असम यहां भी पिछड़ता नजर आ रहा है। 6.2 फीसदी के साथ आखिरी पायदान पर है।

कंपनी के बोर्ड अधिकारियों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

वहीं क्रेडिट सुइस की न्यू जेंडर डाइवर्सिटी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह साल में भारत में बोर्ड अधिकारियों के मामले में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहतर हुआ है। बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी करीब छह प्रतिशत बढ़ी है। साल 2015 में यह आंकड़ा 11.4 फीसदी था और अब यह 17.3 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि, इसकी तुलना अगर दुनिया के दूसरे देशों करें तो अब भी हम वैश्विक औसत 24% से नीचे हैं। इस डेटा को तैयार करने के लिए 46 देश की लगभग 3000 कंपनियों के 33,000 सीनियर एग्जीक्यूटिव को शामिल किया गया था। हालांकि की ग्लोबल स्तर पर महिला सीईओ की संख्या में 27 फीसदी की वृद्धि हुई है। लेकिन वो अब भी दुनिया के कुल सीआई का केवल 5.5 फीसदी हिस्सा ही है।

देश में कोरोना में महिलाओं ने सबसे ज्यादा गंवाई नौकरी

हाल ही में केंद्र सरकार ने बेरोजगारी दर के आंकड़े जारी किए थे। उस डेटा के अनुसार बेरोजगारी दर अपने चरम पर है लेकिन पुरुष की तुलना में महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है। जनवरी से अप्रैल के बीच जहां पुरुष में बेरोजगारी दर 6 फीसदी थी, वहीं महिलाओं में यह दर 13.3 फीसदी रही। मई से अगस्त के बीच पुरुषों में दर 7.9 फीसदी रहा, जबकि महिलाएं 14.3 फीसदी तक पहुंच गईं। दोनों आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि टॉप पोस्ट पर महिलाओं के लिए मौके बढ़े हैं तो संकट आने पर निचले स्तर पर महिलाओं की ही नौकरी जा रही है।

खबरें और भी हैं...