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कैसे बदलता है इंसान का सेक्स:जिंदगीभर हर महीने लेने पड़ते हैं इंजेक्शन, कुछ साल बाद लड़का बन जाता है लड़की

नई दिल्ली4 दिन पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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जरा सोचिए आपको एक कमरे में बंद कर दिया जाए। खिड़की-दरवाजों पर ताला लगा दिया जाए तो आपका उस कमरे में दम घुटने लगेगा। आप बाहर निकलने के लिए बेचैन रहेंगे। ठीक इसी तरह कुछ लोग अपने शरीर से बाहर निकलना चाहते हैं। प्राइड मंथ में आइए बताते हैं क्या होता है सेक्स चेंज कराने का प्रोसेस...

अगर कोई इंसान एक लड़की के रूप में जन्म लेने के बाद खुद को उस शरीर में कैद समझे क्योंकि वह लड़का है तो उसकी जिंदगी उसके लिए दर्द भरी होगी। इस दिक्कत को दूर करने के लिए होती है सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (SRS)। इसके जरिए लड़की ट्रांसमैन और लड़का ट्रांसवुमन बन सकता है।

बात वहां से शुरू करते हैं, जहां से सेक्स चेंज करने की प्रक्रिया शुरू होती है

जो भी इंसान ट्रांसजेंडर बनना चाहता है, उसकी सबसे पहले मानसिक स्थिति देखी जाती है। इसका स्कोरिंग सिस्टम होता है। कई सवाल किए जाते हैं। इसके बाद मनोचिकित्सक तय करते हैं कि उन्हें मानसिक बीमारी तो नहीं है। अगर उनमें डिस्फोरिया मिलता है तो मनोचिकित्सक मरीज को सर्जरी की क्लीयरेंस देते हैं। डिस्फोरिया में इंसान अपने शरीर से परेशान होता है। इसमें कई सेशन होते हैं जिसमें 6 महीने से 1 साल तक का वक्त लग जाता है।

साइकॉलजिस्ट से हरी झंडी मिलने के बाद हार्मोन इंजेक्शन देने शुरू किए जाते हैं

दिल्ली स्थित हेल्थ फर्स्ट मल्टीस्पेशलिटी क्लिनिक में डायबिटीज और थायराइड स्पेशलिस्ट डॉक्टर अरविंद कुमार ने वुमन भास्कर को बताया कि मनोचिकित्सक से क्लीयरेंस के बाद मरीज का मेडिकल चेकअप होता है। इसमें हम ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन, फैमिली में शुगर, बीपी, कैंसर, लीवर जैसी बीमारियों की हिस्ट्री पूछते हैं। इसके बाद कुछ टेस्ट करवाए जाते हैं- जैसे लिवर फंक्शनिंग टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायराइड टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट। बहुत कम मामलों में हम क्रोमोजोम स्टडी करवाते हैं ताकि हमें पता चल सके कि मरीज लड़का है या लड़की।

दरअसल, हार्मोन इंजेक्शन देने की वजह से कई बार लिवर प्रभावित हो जाता है। कुछ मामलों में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स पर असर पड़ता है। रिपोर्ट के बाद ही आगे का प्रोसेस शुरू किया जाता है।

पेशेंट्स से पूछते हैं बदलाव तेजी से चाहिए या धीरे

डॉक्टर अरविंद कुमार के अनुसार हर मरीज की डिमांड अलग-अलग होती है। कुछ को तेजी से बदलाव चाहिए तो किसी को धीरे से। उसी हिसाब से फिर डोज और उसकी फ्रीक्वेंसी तय की जाती है। अगर स्लो चेंज चाहिए होते हैं तो 1 महीने में इंजेक्शन दिए जाते हैं और 3 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया जाता है।

तेजी से बदलाव की चाहत रखने वाले मरीजों को हफ्ते या 10 दिन में एक इंजेक्शन दिया जाता है और 1 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया जाता है। यह देखा जाता है कि उन्हें कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हुआ। जो लड़की से लड़का बनते हैं उन्हें टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन दिए जाते हैं। जो लड़के से लड़की बनना चाहते हैं उन्हें एस्ट्रोजन की डोज दी जाती है।

3 महीने में दिखने लगते हैं बदलाव

यह इंसान के शरीर पर निर्भर करता है कि हार्मोन की डोज कैसे काम कर रही है। डॉक्टर ने बताया कि कुछ लोगों में यह बदलाव 3 महीने में ही दिखने लगता है और कुछ में 1 से डेढ़ साल लग जाते हैं।

2 साल तक होती है कई स्तर पर सर्जरी

शरीर के अंदर बदलाव आने के बाद बाहरी बदलाव का सिलसिला शुरू होता है। अगर ट्रांसमैन बनना हो तो इसके लिए सबसे पहले ब्रेस्ट रिमूव की जाती है। इसके बाद यूट्रस। सबसे आखिर में ऑर्गन यानी सेक्स बदला जाता है। दिल्ली स्थित सर गंगाराम हॉस्पिटल में प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉक्टर ललित चौधरी ने बताया कि सर्जरी में 2 प्रोसेस होते हैं। रिवर्सेबल (परिवर्तनीय) और अरिवर्सेबल (अपरिवर्तनीय) प्रोसेस।

रिवर्सेबल प्रोसेस में ब्रेस्ट सर्जरी और फेशियल फेमिनिन सर्जरी (FFS) आते हैं। ब्रेस्ट सर्जरी 2 घंटे की होती है और इसकी कीमत 1 से 1.5 लाख के बीच आती है। FFS में लोग जॉ लाइन, हेयर लाइन, रिनोप्लास्टी करवाते हैं। इसमें मल्टीपल सर्जरी होती हैं इसलिए इसमें 7 से 8 घंटे लगते हैं और इसकी कीमत 2 लाख तक होती है।

अरिवर्सेबल प्रोसेस में सेक्स चेंज किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी होती है। इसमें 8 घंटे लगते हैं और इसकी कीमत 3-4 लाख होती है। यह सर्जरी बहुत कम लोग करवाते हैं क्योंकि यह काफी महंगी होती है। इन सभी सर्जरी को एक साथ नहीं किया जा सकता। इसलिए इस प्रोसेस में 2 साल तक लग जाते हैं।

सारी जिंदगी लेने पड़ते हैं हार्मोन इंजेक्शन

डायबिटीज और थायरॉइड स्पेशलिस्ट डॉक्टर अरविंद कुमार के अनुसार ट्रांसमैन और ट्रांसवुमन को जिंदगी भर हार्मोन इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। लेकिन सर्जरी के बाद इनकी डोज कम हो जाती है। 2 या 3 महीने में 1 इंजेक्शन दिया जाता है। यह इसलिए दिए जाते हैं ताकि अगर लड़की ट्रांसमैन बनी है तो उसकी दाढ़ी-मूंछ आती रहे। एक इंजेक्शन की कीमत 300-400 रुपए तक होती है।

क्या ट्रांसवुमन मां बन सकती है?

जवाब है- नहीं। मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक इस पूरे प्रोसेस में कुदरती चीजें नहीं होतीं। जैसे ट्रांसवुमन को पीरियड्स नहीं होते। वह मां नहीं बन सकतीं। ऐसे ही ट्रांसमैन में स्पर्म नहीं बनते। वह पिता नहीं बन सकते। ऐसे कपल इमोशनली एकसाथ होते हैं। नॉर्मल जिंदगी जीते हैं लेकिन सेक्स लाइफ इनकी बाकी लोगों की तरह नहीं होती।

ऑपरेशन के बाद भी कई बार करवानी पड़ जाती है काउंसिलिंग

डॉक्टर ललित चौधरी के अनुसार कई बार देखने में आया है कि मरीज की फैमिली उन्हें सपोर्ट नहीं करती। या फिर उनके पार्टनर उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं। इससे वह परेशान हो जाते हैं। अपने फैसले से नाखुश भी हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें फिर से मनोचिकित्सक के पास काउंसिलिंग के लिए भेजा जाता है।

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