हुर्रे… बेबी बूम:बहुत से घरों में खुशियां भी लेकर आया कोविड

एक महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • ढेरों कपल्स ने लॉकडाउन में प्लान किया प्रेगनेंसी
  • सर्वे बता रहे हैं कि इस पीरियड में प्रेगनेंसी रेट बढ़ा

कोविड के दिए गम कम नहीं है, लेकिन कुछ घरों में यह महामारी खुशियों लेकर आई। द युनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड के अनुसार लॉकडाउन में प्रेगनेंसी रेट बढ़ा। दरअसल कोरोना के दौरान संक्रमण से बचने के लिए बहुत- सी कंपनियों ने अपने एम्प्लॉयीज को घर से काम करने की सुविधा दी। इस वक्त का उपयोग लोगों ने फैमिली प्लानिंग के लिए भी किया।

सर्वे को सही ठहराता बालक
सर्वे को सही ठहराता बालक

कपल की सही प्लानिंग
24 मार्च 2019 को कोरोना की पहली लहर के बाद लॉकडाउन लगा। जो थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद बढ़ता ही रहा। दूसरी लहर के बाद लॉकडाउन खुलने पर भी कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम का सिलसिला जारी रखा, जो अब तक चला आ रहा है। इसका फायदा कंपनियों के साथ-साथ उन कपल्स को भी हुआ जो नौकरी के लंबे घंटों के कारण बेबी प्लान नहीं कर पा रहे थे या लगातार टालते जा रहे थे।

सब कुशल मंगल है
सब कुशल मंगल है

दमदार तर्क
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क प्रोवाइडर नॉर्ड वीपीएन ने एक सर्वे में पाया गया कि जनवरी से सितंबर 2020 के बीच प्रेगनेंसी ट्रैपिंग एप्स खूब डाउनलोड किए गए। इसका ट्रैकर डाउनलोड करने की रफ्तार लगभग 208 गुना बढ़ गई। अब जाहिर है कि प्रेगनेंसी ट्रैकर वही कपल रखना चाहेंगे जो प्रेगनेंसी से गुजर रहे हों ताकि भ्रूण के विकास पर नजर रखी जा सके।

वेलकम बेबी
वेलकम बेबी

आनेवाले सालों में मनेगी ढेरों बर्थडे पार्टियां
दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में गाइनोकॉलोजी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. मंजू पुरी का कहना है कि साइंटिफिकली और लॉजिकली देखा जाए, तो इसके चांसेज ज्यादा हैं। कोविड के दिनों में महिलाएं कम ही अस्पताल आईं। ऐसे में वे कॉन्ट्रासेप्टिव सलाहों से दूर रहीं। अगर किसी को उन दिनों कॉपर टी लगवानी होगी या फिर गर्भधारण से जुड़े दूसरे ऑपरेशन कराने होंगे, तो उनको सुविधा नहीं मिल पाई। इसके अलावा यह भी सच है कि लॉकडाउन में लोग घरों के अंदर रहे और इस वजह से भी प्रेगनेंसी के चांसेज बढ़ गए। डॉ. मंजू पुरी इस बात से सहमत हैं कि बहुत सारे कपल्स जो इस बात से परेशान थे कि उनकी इच्छा के बावजूद घर में किलकारियां नहीं गूंज रही, इनके लिए कोविड के कारण मिली छुटि्टयों का दौर वरदान बन कर सामने आया। महिलाएं कंसीव करने में कामयाब हुईं। खासतौर पर मैट्रोज में रह रही वर्किंग महिलाओं के लिए घर से ऑफिस जाने का समय बचा और उन्हें मानसिक आराम मिला, जो प्रेगनेंसी के लिए बहुत जरूरी है।

आपका स्वागत है फरिश्ते
आपका स्वागत है फरिश्ते

सांच को आंच क्या
युनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड भी इस बात को पुख्ता करता है कि महामारी के कारण होने वाली असुविधाओं की वजह से करीब 120 लाख महिलाओं तक गर्भनिरोध की सुविधाएं नहीं पहुंच सकी। इस अंतर्राष्ट्रीय सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ एजेंसी की ओर से मार्च 2021 में जारी किए गए डेटा के अनुसार इस बीच करीब 14 लाख महिलाएं प्रेगनेंट हुईं।

खुशियों का जहां
खुशियों का जहां

क्या कहता है देसी सर्वे
पेरेंटिंग वेबसाइट मॉमजंक्शन के बर्थ प्रेडिक्टर सर्वे में शामिल करीब 30 प्रतिशत महिलाओं में से 56 प्रतिशत लॉकडाउन में प्रेग्नेंट हुईं। इसमें से बहुत सारी अनप्लांड थी, ढेरों प्लान करके भी की गईं। मॉमजंक्शन की वाइस प्रेजिडेंट नताशा गरयाली के अनुसार कोविड की वजह से 56 प्रतिशत प्रेग्नेंट वुमन ने डिजिटल पेरेंटिंग प्लेटफॉर्म पर एक्सपर्ट के दिए हुए नुस्खों की मदद ली। नॉर्डवीपीएन की कम्युनिकेशन्स हेड रुबी गोंजालेज का कहना है कि लोगों को जब महामारी में रहने की आदत हुई, तो उन्होंने फैमिली बढ़ाने को ले कर सोचना शुरू किया। ऐसा पाया गया कि उन दिनों भारत में खूब प्रेगनेंसी ट्रैकिंग एप्स इंस्टॉल किए गए। कुल मिला कर कहा जाए, तो मार्च 2019 के बाद कैलेंडर की कई तारीखें लोगों को दुख भरे दिनों की याद दिलाएगी, तो कुछ बर्थडे के रूप में सेलिब्रेट की जाएगी।

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