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तीन देशों से नाता पर नागरिकता किसी की नहीं:एक महिला के लिए कम पड़ी यूगांडा, ब्रिटेन और इंडिया की जमीन, मुंबई हाईकोर्ट में लगाई गुहार

नई दिल्ली2 महीने पहले
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जानी-मानी बंगला लेखिका तस्लीमा नसरीन का एक उपन्यास है- ’औरत का कोई देश नहीं’। इस उपन्यास में तस्लीमा ने महिलाओं के दर्द को बयां किया है। खुद तस्लीमा नसरीन को भी बांग्लादेश से निर्वासित होने के बाद कई देशों में नागरिकता के लिए भटकना पड़ा था। भारत में भी उन्हें नागरिकता नहीं दी गई थी।

बिल्कुल ऐसी ही कहानी है इला पोपट की। इला का अपना कोई देश नहीं है। 57 साल से भारत में रह रहीं इला की नागरिकता के आवेदन को तीन बार ठुकराया जा चुका है। भारत के अलावा ब्रिटेन और यूगांडा ने भी उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 67 साल की इला फिलहाल ‘स्टेट-लेस’ हैं। अब उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट से नागरिकता दिलाने की गुहार लगाई है। ताकि उनका भी कोई देश हो, जिसे वो अपना कह सकें।

गुजरात से यूगांडा चले गए थे माता-पिता

दरअसल, इला के माता-पिता गुजरात के पोरबंदर के मूल निवासी थे। जो बाद में अफ्रीकी देश यूगांडा जाकर बस गए। उस दौर के ब्रिटिश उपनिवेश यूगांडा में बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी रहते थे। उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थित वहां काफी अच्छी थी। उन्हें वहां आम बोलचाल में ‘ब्राउन साहब’ कहा जाता था। लेकिन यूगांडा में बसे ‘ब्राउन साहब’ वहां के स्थानीय लोगों से अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। यही वजह है अंग्रेजों की कमजोर होती स्थिति के बीच वहां रह रहे भारतीयों के खिलाफ नफरत बढ़ने लगी। जिसके बाद बड़ी संख्या में भारतीय मूल के व्यापारियों ने यूगांडा छोड़ ब्रिटेन या भारत की नागरिकता ले ली।

इला के माता-पिता भी ब्रिटिश पासपोर्ट पर इंडिया आ गए। उस वक्त इला की उम्र केवल 10 साल थी।

हर तरफ से ठोकरें खाने के बाद उम्र के इस पड़ाव में इला ने हाईकोर्ट से इंसाफ की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि कोर्ट अधिकारियों को उन्हें नागरिकता देने के लिए कहे।
हर तरफ से ठोकरें खाने के बाद उम्र के इस पड़ाव में इला ने हाईकोर्ट से इंसाफ की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि कोर्ट अधिकारियों को उन्हें नागरिकता देने के लिए कहे।

पति, बच्चे और पोते-पोतियां हिंदुस्तानी पर दादी का कोई देश नहीं

कम उम्र में भारत आने के बाद इला पूरी तरह से यहां की हो गईं। गुजरात में उनका बाकी परिवार पहले से रह रहा था। ऐसे में उन्हें यहां एडजस्ट होने में कोई दिक्कत भी नहीं हुई। इला की शादी भी यहीं हुई। उनके कई बच्चे और पोते-पोतियां भी हैं। सभी भारतीय नागरिक हैं। इला यहां वोट डालती हैं और उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी है। लेकिन उन्हें भारतीय पासपोर्ट नहीं दिया गया है।

यूगांडा और ब्रिटेन ने भी ठुकराया आवेदन

भारत में नागरिकता नहीं मिलने के बाद इला ने यूगांडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया। भारत स्थित यूगांडा एम्बेसी ने यह तो माना कि इला का जन्म यूगांडा में हुआ है पर उसने यह कहते हुए आवेदन ठुकरा दिया कि वो पहले कभी यूगांडा की नागरिक नहीं रही हैं। अपने माता-पिता की ब्रिटिश नागरिकता के आधार पर इला ने ब्रिटेन की नागरिकता के लिए भी कोशिश की। लेकिन उन्हें यहां भी नाकामी हाथ लगी।

रिश्तेदारों की शादियों में नहीं जा पाती हैं

इला के मायके के ज्यादातर लोग ब्रिटेन में ही रहते हैं। ऐसे में जब भी परिवार में कोई शादी होती है तो इला चाह कर भी उसमें शामिल नहीं हो पाती हैं। इला ने ब्रिटेन से बिना नागरिकता भी कुछ समय के लिए देश में आने देने की अपील की थी, ताकि वो अपने परिवार के बाकी सदस्यों से मिल सकें। लेकिन इला के पास किसी देश का पासपोर्ट न होने के कारण उन्हें इसकी भी अनुमति नहीं दी गई।

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