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सुख मंत्र:किसी भी रोग की तरह, तनाव से भी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है दूरी, मौजूदा हालात में चंद उपायों से रहे तनावमुक्त

6 महीने पहले
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इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चिंता और तनाव में है। इससे लोगों में अवसाद बढ़ रहा है। लंबे समय का यह तनाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर करता है। दरअसल, तनाव कोई आंतरिक मामला नहीं है, यह तो बाहरी खबर या हालात के प्रति आंतरिक प्रतिक्रिया है, जिसे आप अगर चाहें, तो नियंत्रित कर सकते हैं। हम घर के भीतर रहकर, अपनी सेहत का ध्यान रख रहे हैं, यानी अपने बस में जो है, वो कर रहे हैं। इससे आगे, ‘क्या हुआ अगर...?’ के बारे में सोचना हम छोड़ सकते हैं।

तनाव है या नहीं, ऐसे पहचानें
तनाव का स्तर स्थिति के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। चलिए, तनाव को 0 से 10 संख्या के बीच के स्तर पर रखते हैं। यदि आप संक्रमण की आशंका या वर्तमान की स्थिति से ज़्यादा डरे हुए हैं और हर वक़्त उसी के बारे में सोचकर चिंता करते रहते हैं, तो आपके तनाव का स्तर रेड ज़ोन में जा सकता है। इस स्थिति में आपके अंदर नकारात्मक सोच बनती है, जिससे तनाव बढ़ता है। इससे पहले की आपका तनाव रेडज़ोन में आ जाए इसे किन्हीं लक्षणों से पहचान सकते हैं। अगर आपको अचानक सिर दर्द महसूस होने लगता है या अकारण अचानक दांत पीसने लगते हैं या फिर बैठे-बैठे पैर को ऊपर-नीचे झुलाते हैं, तो समझ लीजिए की यह उच्च स्तर का तनाव है। इसके अलावा मजबूर महसूस करना, दुखी रहना, अधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, जल्दी नाराज़ होना, चुप होकर कोने में बैठना आदि भी लक्षण हैं।

सम्भावना पर ध्यान दें
कोरोना के संदिग्ध, पॉज़िटिव केस और मृतकों के आंकड़े हर घंटे बदल रहे हैं। इन्हें देखिए, पर केवल सूचना के लिए। आप घर पर हैं। अगर घर पर ही रहेंगे, सारे नियमों का पालन करेंगे, तो आप वायरस से बचे रहेंगे। आंकड़ों को देखकर किसी आशंका में न पड़ें। आपने क़ायदे माने हैं, तो आप के सुरक्षित रहने की पूरी सम्भावना है। यह सकारात्मक सोच है।

‘असहाय’ का सहाय बना लें
‘हम कुछ कर नहीं सकते, बंधे हुए हैं घर के अंदर’ मौजूदा हालात में ऐसा महसूस होना सामान्य है। लेकिन इस भाव से भी छुटकारा पा सकते हैं। हम जानते हैं कि कोरोना जैसे वायरस को फैलने से रोकने में हम अपनी भूमिका निभा रहे हैं। अब कुछ लोगों की मदद करके इस भूमिका को ख़ास बना सकते हैं। अगर आपके क्षेत्र में कोई अन्न वितरण हो रहा हो, कोई नेकनीयती से वंचितों की मदद करने का काम कर रहा हो, तो आप भी उससे जुड़कर सकारात्मक पहल कर सकते हैं। सुरक्षित फ़ासले से, सुरक्षित रहते हुए मदद की जा सकती है।

‘नकारात्मक’ को अनफॉलो कर दें
लाख कोशिश करें, पर मोबाइल पर हाथ चलने ही लगता है। नई पोस्ट पर ध्यान जाता ही है, तो इसमें ज़्यादा परेशानी की बात नहीं है। लेकिन आपने मन की सेहत आपका विकल्प नहीं हो सकती, इसलिए इसे वरीयता देते हुए यानी अहमियत देते हुए उन तमाम लोगों को अनफॉलो कर दें, जो केवल नकारात्मक वीडियो या संदेश भेजते हैं। उन संदेशों के लिए डिलीट की सुविधा है, जो आपको तनाव देते हों। इस समय सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इससे दूर रहने की ज़रूरत है। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग विषय के हैशटेग खोलकर काफ़ी कुछ पढ़ते चले जाते हैं। इसी क्रम में वो कई अनावश्यक ख़बरंे भी पढ़ लेते हैं, जिससे उन्हें गुस्सा आने के साथ घबराहट होने लगती है। इनसे दूरी बनाएं।

तर्क से काम लें, भा‌वुक होकर नहीं
‘सामान की कमी हो रही है, कल को आटा न मिला तो, सब्ज़ी नहीं मिलेगी, फल नहीं खा पाएंगे...’ इस तरह की निराधार सूचनाओं की कमी नहीं है। तर्क से काम लें। सरकार ने कहा है कि ज़रूरी चीज़ की कमी नहीं होगी, हो भी नहीं रही है, तो फिर कोरी भावुकता में क्यों पड़ें? ज़रा सोचिए, गर्मियों का मौसम आने लगा है और कोई ऐसा हो, जो स्वेटर पहने, टोपा लगाए घूम रहा हो और कहे, कि उसे लगा कि कहीं ऐसा न हो कि सर्दियां आएं ही ना, इसलिए स्वेटर पहने घूम रहा हूं, तो आपको अटपटा लगेगा ना?

‘क्या हो अगर...’ की बात करें
क्या हुआ अगर लॉकडाउन और बढ़ाया गया, तो...? क्या होगा अगर हमें किसी वजह से बाहर निकलना पड़ा तो...? क्या होगा काम का, वेतन का, कामगारों का...? हमारे पास इस समय नकारात्मक ‘क्या होगा’ की कोई कमी नहीं है। इस समय किसी भी तरह की कोई गतिविधि करना मुश्किल है, तो अगर आगे की कोई बात करनी ही है, तो सकारात्मक करें। हम ऑफ़िस जाएंगे, तो क्या नया करेंगे, कॉलेज के दोस्तों के बीच पहुंचकर या स्कूल जाकर कितनी राहत महसूस करेंगे, इन सबके बारे में सोचें, बात करें।

दिमाग काे व्यस्त रखना जरूरी
मन अच्छा महसूस करे, घर में बंद रहने की वजह से नाराज़गी न पनपे, इसके लिए कुछ ऐसा करते रहें, जिससे मन बहल जाए। कुछ छोटे-छोटे सुझाव हैं, जो दिमाग को व्यस्त ही नहीं, चुस्त-दुरुस्त और तेज-तर्रार भी बनाएंगे -

  • रोज तीन से चार वाक्य उस हाथ से लिखें, जो आपके लिए आपका उल्टा हाथ हो।
  • चंद कदम उल्टे चलें यानी पीछे की तरफ़। इस क्रिया को संभाल कर करें।
  • खुद को एक खत लिखें। इसमें यादें हो सकती हैं, सपने हो सकते हैं या अनुभव।
  • तरह-तरह की हेयर स्टाइल्स बनाएं। चूंकि बाहर जाना नहीं है, सो यह प्रयोग ही सही।
  • अपने एक पैर पर संतुलन बनाते हुए खड़े हों। चंद सेकंड्स से शुरू करते हुए, इस क्रिया को पांच मिनट तक ले जाने की कोशिश करें।

समय कठिन है, पूरी दुनिया विपत्ति से घिरी है, लेकिन सूर्य-चंद्रमा, तारे-बादल, पंछी-फूल अपनी मौजूदगी से इस बात की याद दिला रहे हैं कि वक्त बदलेगा। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। यह समय भी बीत जाएगा।

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