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ममता दीदी की सफेद साड़ी:बहुत खास है बंगाल की CM का सफेद साड़ी से नाता, जानें क्या है वजह

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भवानीपुर दंगल को जीतकर अपनी राष्ट्रीय छवि को मजबूत करने में सफलता हासिल कर ली है। 'दीदी' को राजनीति के जानकार वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के दावेदार के तौर पर देख रहे हैं। इस बीच, ममता बनर्जी की सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और सादगी की मिसाल एक बार फिर चर्चा में है। आइए जानते हैं ​ममता दीदी की सफेद साड़ी पहनने के पीछे की वजह और साड़ी से बनने वाली छवि...

रंगीन किनारी वाली सफेद साड़ी और हवाई चप्पल पहने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यानी जनता की प्रिय दीदी। दीदी रैलियों में सबसे तेज और सधे कदमों से चलतीं हुईं बेहद आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी और मजबूत इरादों वाली नजर आती हैं। उनकी सादगी भरी यह छवि ही उन्हें भीड़ से अलग बनाती है। अपनी इसी सादगी के चलते ममता दीदी बंगाल के लोगों के दिलों पर राज करती हैं। इस बीच, बहुत से लोग ऐसे हैं, जो जानना चाहते हैं कि ममता दीदी हमेशा सफेद सूती साड़ी ही क्यों पहनती हैं?

ग्रेसफुल एंड एलिगेंट दिखाती है साड़ी
फैशन डिजाइनर श्रुति संचेती बताती हैं कि भारतीय महिलाएं साड़ी में बेहद ग्रेसफुल और एलिगेंट दिखती हैं। बात इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस की हो या फिर दफ्तर की कोई मीटिंग, वर्किंग महिलाएं साड़ी ही पसंद करती हैं क्योंकि साड़ी हमेशा खूबसूरत लगती है। वहीं पश्चिम बंगाल में ढाकाई और कॉटन की साड़ियों खूब पहनी जाती हैं। वहां की ज्यादातर महिलाएं किसी और कॉस्टयूम की बजाय साड़ी पहनना पसंद करती हैं।

दीदी की सफेद साड़ी है अहम पहचान
श्रुति संचेती के मुताबिक, अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साड़ी की बात करें तो बंगाल में महिलाओं को देवी माना जाता है। राजनीति में ममता का करीब 40 साल से ज्यादा समय से बोलबाला है। बंगाल की जनता ममता दीदी का बहुत सम्मान करती है। उन्हें सिर आंखों बिठाकर रखती है। श्रुति संचेती कहती हैं कि यह बिल्कुल वैसे है, जैसे- लोग अपने मन में भगवान की एक छवि बना लेते हैं, जिसे बार-बार बदलना पसंद नहीं करते हैं। लोग भगवान को एकरूप में ही याद करते हैं। ममता ने भी लोगों के दिल में अपनी सफेद साड़ी और हवाई चप्पल वाली छवि बना दी है, जिसे वह बदलना नहीं चाहती हैं। राजनीति में पहनावा किसी भी व्यक्ति की खास पहचान बन जाता है। ममता की सफेद साड़ी भी उनकी अहम पहचान है। उनके लिए फैशन लास्ट ऑप्शन है।

बचपन की तंगी ने बना दिया सादगी की मिसाल
जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी की सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और सादगीभरा जीवन जीने की वजह बचपन में झेली आर्थिक तंगी भी बताई जाती है। दरअसल, जब ममता बनर्जी 9 साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद ममता और उनके परिवार को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बचपन में शौक-मौज की जगह जरूरत ने ले ली। तब से लेकर आज तक ममता बनर्जी के पास जरूरत के हिसाब से ही कपड़े होते हैं। वे ज्यादा कपड़े इकट्ठे करने में यकीन नहीं करती हैं और सादगी-पूर्ण जीवन जीती हैं।

यहां बनती हैं दीदी की साड़ियां
ममता बनर्जी एकरंगी बॉर्डर वाली जो सफेद साड़ियां पहनती हैं, वो बंगाल के ही धानेखाली इलाके की बनी होती हैं। धानेखली इलाका कपड़े की बुनाई के लिए जाना जाता है। इन साड़ियों की खासियत है कि ये वहां के चिपचिपाहट भरे मौसम में भी हल्की और आरामदेह होती हैं।

क्या सच में अशुभ होता है सफेद रंग?
हिंदू धर्म में दुल्हन और शादीशुदा महिलाएं सफेद रंग के कपड़े नहीं पहन सकती। माना जाता है कि पति की मौत के बाद महिलाएं ​सफेद रंग पहनती हैं। इसलिए सफेद रंग को अशुभ माना जाता है और इस रंग के कपड़े मांगलिक कार्यों में नहीं पहने जाते हैं। धार्मिंक ग्रंथों में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है कि सफेद रंग को दुल्हन या विवाहित म​हिला नहीं पहन सकती है या फिर यह रंग शादीशुदा महिलाओं के लिए अशुभ है। ग्रंथों में इसे शांति, शुभता, पवित्रता का रंग बताया गया है। ऐसे में यह कोरी मान्यता है कि सफेद रंग अशुभ होता है। इसके इतर, दक्षिण भारत में शादी के वक्त दुल्हनें सफेद या फिर क्रीम कलर की साड़ियां पहनती हैं।