सुष्मिता को 'गोल्ड डिगर' कहना कितना सही:दहेज और खूबसूरत पार्टनर की चाह पुरुषों को, फिर वो लालची क्यों नहीं कहलाते?

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: भारती द्विवेदी
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सुष्मिता सेन और आईपीएल के फाउंडर ललित मोदी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। ललित ने सुष्मिता के साथ अपने रिश्ते को जगजाहिर किया, तब से हंगामा बरपा है। ट्रोल सुष्मिता को 'गोल्ड डिगर' बुला रहे हैं। सुष्मिता की ट्रोलिंग में लेखिका और एक्टिविस्ट तसलीमा नसरीन से लेकर खुद को फिल्म क्रिटिक्स कहने वाले कमाल आर खान जैसे लोग तक शामिल हैं।

इनदोनों के अलावा ज्यादातर लोगों का रिएक्शन भी एक जैसा ही है। दोनों ने सुष्मिता के रिश्ते पर कमेंट करते हुए उनको 'गोल्ड डिगर' कहा है। अब ट्रोलर्स के लिए सुष्मिता और ललित मोदी दोनों ने ही बड़े प्यार से पोस्ट लिखा है।

सुष्मिता ने क्या लिखा है, पहले ये जान लीजिए...

अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर छुट्टियों की एक फोटो शेयर करते हुए सुष्मिता ने लंबी-चौड़ी दबंग पोस्ट लिखी है। वो लिखती हैं- 'ये देखकर दिल दुखता है कि हमारे आसपास की दुनिया कितनी निराश और दुखी होती जा रही है। वैसे, मुझे गोल्ड से ज्यादा डायमंड पसंद हैं और वो मैं अपने लिए खुद ही खरीदती हूं। कुछ बुद्धिजीवी मुझे 'गोल्ड डिगर' कहते हैं, यह उनकी छोटी सोच को दर्शाता है।'

दहेज पुरुष लेते हैं फिर महिलाएं कैसे गोल्ड डिगर

भारतीय समाज में शान के साथ दहेज लेने की प्रथा है। ये प्रथा पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक फैली हुई है। बिहार में जितना ऊंचा पद, दहेज के लिए उनता बड़ा मुंह खुलता है। यानी कि ये पूरे ही भारत की समस्या है। आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि दहेज की वजह से महिला को टॉर्चर किया गया। कहीं शादी टूट गई तो कहीं महिला ने तंग आकर आत्महत्या कर ली।

इस मुद्दे पर जब हमने दिल्ली यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ताराशंकर से बात की तो उनका कहना था- महिलाओं के काम को कभी भी आर्थिक रुप से नहीं देखा गया। पितृसत्तात्मक समाज कि हमेशा ही कोशिश रही है कि महिलाओं के हाथ में पैसा नहीं रहे। भारत में लड़के सिर्फ एकमुश्त दहेज नहीं लेते बल्कि ये भी देखते हैं कि लड़की मां-बाप की एकलौती हो या भाई ना हो। ऐसा इस वजह से ताकि बाद में लड़की के पिता की प्रॉपर्टी उन्हें ही मिले। ये भी एक तरह की 'गोल्ड डिगर' मानसिकता है।

दहेज के कई केस मिल जाएंगे जिसमें समाज में अच्छे पदों पर बैठे लड़के या उनकी फैमिली शामिल है। तो सवाल उठता है कि जब शादी के लिए दहेज लड़के लेते हैं फिर महिलाओं को 'गोल्ड डिगर' कहना कहां तक उचित है?
दहेज के कई केस मिल जाएंगे जिसमें समाज में अच्छे पदों पर बैठे लड़के या उनकी फैमिली शामिल है। तो सवाल उठता है कि जब शादी के लिए दहेज लड़के लेते हैं फिर महिलाओं को 'गोल्ड डिगर' कहना कहां तक उचित है?

क्या पुरुषों की इकलौती क्वालिटी पैसा कमाना है?

हमारा संविधान महिला-पुरुष दोनों को बराबर हक देता है। लेकिन इसके बाद भी लड़के-लड़कियों के बीच बहुत भेदभाव है। जहां लड़कियों को कंट्रोल करने के लिए तमाम नियम-कायदे बना दिए गए हैं। वहीं लड़कों को बचपन से ही सख्त, लड़कियों पर धौंस जमाने वाला बिहेवियर सिखाया जाता है। उनके अंदर ये भरा जाता है कि वो चाहे जैसे भी हो नौकरी कर लें या बहुत सारा पैसा कमा लें तो आसानी से शादी हो जाएगी या लड़की मिल जाएगी।

अगर कोई लड़का समाज के तयशुदा पैमाने के हिसाब से स्मार्ट या खूबसूरत ना हो और उसकी गर्लफ्रेंड सुंदर होती है, तो ये मान लिया जाता है कि लड़की ने बस पैसे के लिए उसे चुना होगा। दो लोग रिश्ते में होते हैं तो उनके बीच क्या केमिस्ट्री है, वो कैसा बॉन्ड शेयर करते हैं ये किसी को नहीं पता होता लेकिन आसपास के लोग जजमेंट देते हैं। तो क्या हमें अब ये मान लेना चाहिए कि लड़कों के पास पैसे के अलावा कोई गुण नहीं होता? और लड़के की सारी क्वालिटी पैसे से जुड़ी होती हैं।

कोई महिला फाइनेंशियल स्टेबिलिटी देख रही तो गलत कैसे?

तारा सवाल उठाते हुए कहते हैं- अगर कोई महिला रिश्ते में फाइनेंशियल स्टेबलिटी देखती हैं तो इसमें क्या गलत है? सैपियोसेक्शुअल रिलेशन में लोग बौद्धिक क्षमता देखकर दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं। वो गलत नहीं माना जाता है। ठीक वैसे ही ऐसे रिश्ते के लिए 'गोल्ड डिगर' के बजाए फाइनेंशियल स्टेबिलिटी जैसे शब्द इस्तेमाल किया जाना चाहिए। दहेज लें पुरुष, पत्नी के पिता की प्रॉपर्टी पर नज़र रखें पुरुष, पत्नी को जॉब ना करने दें पुरुष, दुनिया की दो तिहाई से अधिक संपत्ति पर कब्ज़ा रखें पुरुष लेकिन 'गोल्ड डिगर' कहकर महिलाओं को नीचा दिखाया जाता है।

​​पैसे और सुंदर बीवी वाले पुरुषों के लिए कोई नाम क्यों नहीं?

ऐसा नहीं है कि हमारे समाज में पुरुषों के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है। लेकिन ये कम देखने को मिलता है। कई ऐसे किस्से मिल जाएंगे जहां उनके रंग और कद-काठी की वजह से उन्हें ताने मिले। बात साउथ के एक्टर धनुष की। साउथ में उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। उनके गाए एक गाने ‘कोलावरी-डी’ और बॉलीवुड फिल्म 'राझंणा' के बाद हिंदी बेल्ट में भी उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। धनुष ने साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या से साल 2004 में शादी की थी। उन्होंने लव मैरिज की थी। शादी के वक्त धनुष बड़ा नाम नहीं थे जबकि ऐश्वर्या जानीमानी फैमिली से आती थी। एक इंटरव्यू में धनुष ने कहा था कि लोग उन्हें ऑटोवाला समझते थे। जाहिर सी बात है ऐसा उनके लुक की वजह से था। ऐश्वर्या की खूबसूरती की वजह से लोग इस जोड़ी को बेमेल कह रहे थे।

हाल ही में साउथ की ही एक और एक्ट्रेस नयनतारा ने शादी की। ट्रोलर्स ने इस शादी को भी ट्रोल किया और कहा कि पैसे और लुक दोनों ही मामले में नयनतारा अपने पार्टनर विग्नेश से बेहतर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नयनतारा की कुल संपत्ति 165 करोड़ है तो वहीं विग्नेश की 50 करोड़।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कटरीना कैफ़ की कुल संपत्ति 148 करोड़ रुपए है तो वहीं विक्की कौशल की लगभग 38 करोड़ रुपए।
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कटरीना कैफ़ की कुल संपत्ति 148 करोड़ रुपए है तो वहीं विक्की कौशल की लगभग 38 करोड़ रुपए।

यही सवाल कटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी के समय भी उछाली गई। दोनों ने जब शादी की तो लोगों ने विक्की को ट्रोल किया। उनको लुक्स, फेम और कमाई के मामले में कटरीना से कमतर बताया गया। बॉलीवुड में ही जब पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय ने अभिषेक बच्चन से शादी की तो वह अपने पति से बड़ा ब्रांड थीं। ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जो इनसे मिलते-जुलते हैं। भले ही लड़कों को अलग-अलग तरीकों से ट्रोल किया गया हो लेकिन उन्हें कभी 'गोल्ड डिगर' नहीं कहा जाता।

पुरुष जिन्हें दुनिया उनकी बीवियों की वजह से जानती है

वैसे तो अलग-अलग फील्ड के कई नाम मिल जाएंगे लेकिन मुमताज, जूही चावला, शिल्पा शेट्टी, रवीना टंडन, अमृता अरोड़ा, आएशा टाकिया, प्रीति जिंटा, सोनम कपूर, अंकिता लोखंडे, असिन ये कुछ चुनिंदा नाम हैं। इन अभिनेत्रियों ने जीवनसाथी के तौर पर बिजनेसमैन को चुना। शादी के पहले इनसब ने सालों डेट किया, फिर शादी के बंधन में बंधी। इन सारी ही अभिनेत्रियों की अपनी पहचान है। इन्होंने अपने बलबूते जिंदगी के सारे ऐशो-आराम को हासिल किया है। भले ही इनके पार्टनर के पास बहुत पैसा हो लेकिन दुनिया इनके पार्टनर को इनकी वजह से जानती हैं।

पैसों के बाद भी बड़े-बड़े लोगों के रिश्ते टूटे जाते हैं

हमारे यहां औरत-पुरुष के बीच गैर बराबरी की इतनी गहरी खाई है, जिसे पाटना मुश्किल है। महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें किसी की बेटी, बहन या बीवी होने के पहले इंसान समझा जाए। जैसे लड़कों को समझा जाता है। उन्हें भी प्यार, बराबरी और रिस्पेक्ट चाहिए होती है। जब किसी भी लड़के में उन्हें ये चीजें दिखती हैं फिर वो उसे ही प्राथमिकता देती हैं। अभिनेत्री करिश्मा कपूर का रिश्ता पति के खराब बिहेवियर, एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स और डोमेस्टिक वायलेंस की वजह से टूटा। टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की शादी भी इसका जीता जगता उदाहरण है।

कंगना, प्रीति जिंटा, ऐश्वर्या राय, रति अग्निहोत्री, रिया पिल्लई, युक्ता मुखी, डिंपी महाजन सबने अपने रिश्ते में घरेलू हिंसा झेली, जिसके बाद रिश्ता टूटा। दुनिया के सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स की शादी भी एक ताजा उदाहरण है। बिल और उनकी पत्नी मिलिंडा शादी के 27 साल बाद अलग हुए। मिलिंडा ने अलग होने की जो वजह बताई वो भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और बिहेवियर का मुद्दा था।

लड़के देखते हैं गुडलुक्स, लड़कियां इंटेलिजेंसी और सेंस ऑफ ह्यूमर

साल 2017 में डेटिंग ऐप टिंडर ने पार्टनर को लेकर एक सर्वे कराया था। इस सर्वे में 15 हजार महिला-पुरुष शामिल हुए। सर्वे रिजल्ट के अनुसार महिलाएं पुरुषों में सबसे पहली चीज सेंस ऑफ ह्यूमर फिर कॉमन इंटरेस्ट और तीसरे नंबर पर इंटेलिजेंट होना देखती है। जबकि कम उम्र से लेकर बड़ी उम्र तक के पुरुषों ने एकमत से लड़कियों के लिए 'गुडलुक्स' कहा था।

साल 2019 में मेंस्ट्रूल साइकल ट्रैकिंग ऐप ने ‘माय वन कंडोम’ और जर्मनी की ‘गौटिंगोन यूनिवर्सिटी’ की मदद से 180 देश की अलग-अलग बैकग्राउंड की 68 हजार महिलाओं से ये जाना कि वास्तव में वो अपने पार्टनर से क्या चाहती हैं? नब्बे फीसदी महिलाओं ने कहा कि वो अपने पार्टनर में पहली क्वालिटी 'विनम्रता' चाहती हैं। 86.5% महिलाओं ने सपोर्ट, और 72% महिलाओं ने इंटेलिजेंस को प्राथमिकता दी थी।

इसी साल वेबसाइट ब्राइड्स में छपी एक लेख के मुताबिक महिलाएं अपने पार्टनर में कॉन्फिडेंस, रिस्पेक्ट, सेंस ऑफ ह्यूमर, मैच्योरिटी, विश्वसनीयता, ईमानदारी, सहानुभूति, मुश्किल पलों में साथ खड़े होने जैसी क्वालिटी देखना चाहती हैं।

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