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बुआ में आई देवी, तलवार से भतीजी को मार डाला:दबी इच्छाएं बना रहीं महिलाओं को मानसिक रोगी, झारखंड और ओडिशा में सबसे ज्यादा मामले

नई दिल्ली12 दिन पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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राजस्थान के डूंगरपुर में 16 साल की बुआ ने 7 साल की भतीजी की तलवार से गर्दन काटकर हत्या कर दी। घरवालों ने बताया कि घर में माता की पूजा चल रही थी। तभी आरोपी नाबालिग में देवी आ गई और उसके बाद यह घटना हुई। अंधविश्वास के चलते अक्सर इस तरह की घटनाएं देखी जाती हैं। यह फिल्म ‘भूलभुलैया’ की तरह है। जैसे अचानक विद्या बालन मंजुलिका बन जाती है।

क्या वाकई में महिलाओं में देवी आती है या एक मानसिक विकार है। आइए आपको बताते हैं।

भूत-प्रेत नहीं, भ्रम में जीते हैं ऐसे लोग

मनोचिकित्सक डॉक्टर बिंदा सिंह ने वुमन भास्कर को बताया कि समाज में अंधविश्वास के चलते अक्सर इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती हैं। असल में भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती। अगर कोई इंसान कहे कि उसमें भूत, प्रेत या देवी आ रही है तो वह मानसिक रूप से बीमार है। ऐसे व्यक्ति भ्रम में जीते है। अधिकतर मरीज डिप्रेशन का शिकार होते हैं।

आगे पढ़िए, कैसे कंवर्जन डिसऑर्डर बना सकता है महिला को अपराधी?

स्ट्रेस बढ़े तो होता है कंवर्जन डिसऑर्डर

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉक्टर राजीव मेहता ने बताया कि जब किसी महिला में स्ट्रेस बढ़ जाए तो वह कंवर्जन डिसऑर्डर की शिकार हो सकती हैं। इस डिसऑर्डर को पहले हिस्टेरिया कहा जाता था। जब महिला की भावनाओं को दबाया जाए तो उनमें तनाव बढ़ जाता है। अक्सर हमारे समाज में औरतें चुप रहकर सब कुछ सहती रहती हैं। इसका असर उनके दिमाग पर पड़ता है।

जो पसंद नहीं, उन पर हो सकता है हमला

कंवर्जन डिसऑर्डर में मरीज किसी भी हद तक जा सकता हैं। मर्डर तक कर सकता हैं। डॉ. राजीव मेहता कहते हैं कि जिन लोगों को वह पसंद नहीं करते, उन पर हमला तक कर सकते हैं। इस बीमारी का इलाज संभव है। ऐसे मरीजों के अतीत में कुछ बुरा जरूर हुआ होता है। काउंसिलिंग और दवा से इस बीमारी का इलाज होता है।

महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों ने उनकी मानसिक सेहत को बिगाड़ा है। कैसे, आइए आपको बताते हैं।

पुरुष 6% तो महिलाएं 12% डिप्रेशन की शिकार होती हैं।
पुरुष 6% तो महिलाएं 12% डिप्रेशन की शिकार होती हैं।

वैदिक काल के बाद महिलाओं पर लगे प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश के देवरिया में रहने वाले लेखक डॉक्टर आर.अचल ने बताया कि वैदिक काल के बाद से महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए। महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए स्मृतियां लिखी गईं। इसमें साफ लिखा गया कि महिला पिता, पति और बेटे के संरक्षण में रहें। घर में बेटे-बेटी के पालने में फर्क किया गया। लड़कियों को बचपन से सिखाया गया कि उन्हें घर पर रहना है, वह कमजोर हैं और उनकी इच्छाओं का कोई मतलब नहीं। यह सब बंधन उन्हें डिप्रेशन का शिकार बना देते हैं।

वहीं, बचपन से उन्हें अपने आसपास भूत-प्रेत, देवी जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। यह बातें उनके सब-कॉन्शियस माइंड (अवचेतन मन) में चलती रहती हैं। जब पूजा, कोई धार्मिक कार्यक्रम या त्योहार हो तो डिप्रेशन की शिकार महिलाएं अजीब तरह की हरकतें करने लगती हैं जिससे लोग कहते हैं कि उनमें देवी आ गईं। दरअसल वह बहुत भावुक होती हैं और सम्मान पाने के लिए उनका दिमाग वैसा बर्ताव करने लगता है।

झारखंड और ओडिशा में ज्यादा दिखते हैं ऐसे मामले

झारखंड और ओडिशा में इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। यह बात लेखक डॉक्टर आर.अचल ने कही। उन्होंने कहा कि उत्तर पूर्व भारत में ऐसे मामले नहीं होते क्योंकि वहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर रखा गया है। देवी, भूत-प्रेत जैसा अंधविश्वास केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बाकी धर्मों में भी देखा जाता है।

1980 में अमेरिकन साइक्राइटिक असोसिएशन ने हिस्टेरिया को मेंटल डिसऑर्डर माना।
1980 में अमेरिकन साइक्राइटिक असोसिएशन ने हिस्टेरिया को मेंटल डिसऑर्डर माना।

19वीं शताब्दी में मिस्र में मिला था पहला मामला

कंवर्जन डिसऑर्डर को पहले हिस्टेरिया कहा जाता था। यह ग्रीक शब्द से बना जिसका मतलब है यूट्रस। यह बीमारी सबसे पहले 1900 ई.पू. में मिस्र की युवा महिलाओं में देखने को मिली। इस मानसिक बीमारी का कारण गर्भाशय को बताया गया। मिस्र के चिकित्सक महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में तेज सुगंध की सामग्री डालते थे ताकि उनका यूट्रस ठीक तरह काम करने लगे।

ग्रीक की पौराणिक कथाओं में भी जिक्र

ग्रीक की पौराणिक कथाओं में एरगोनॉट मेलामपूस नाम के एक चिकित्सक थे। उन्होंने लड़कियों में हिस्टेरिया को देखा। उन्होंने लड़कियों को लड़कों से मिलवाया। इससे महिलाओं का गुस्सा शांत होने लगा। मेलामपूस के अनुसार महिलाओं को उनका यूट्रस अशांत कर करा था क्योंकि उनकी शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं हो रही थीं।

जब अंधविश्वास पड़ा जान पर भारी

बुराड़ी मर्डर: दिल्ली के बुराड़ी में 4 साल पहले एक साथ 11 लोगों ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। पुलिस के मुताबिक यह घटना अंधविश्वास के चलते हुई थी। मरने से पहले परिवार ने अनुष्ठान किया था। पुलिस को एक रजिस्टर मिला था जिसमें लिखी बातें, मौत के तरीके से मिलती थीं। परिवार के सदस्य मरना नहीं चाहते थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके गुजर चुके पिता के बताए रास्ते पर चलने से उन्हें मोक्ष मिलेगा लेकिन मरेंगे नहीं।

बेटियों की ली जान: साल 2021 में आंध्र प्रदेश में पेरेंट्स ने अपनी दोनों बेटियों की जान ले ली थी। दोनों बच्चों का शव पूजा घर से बरामद हुआ। दंपती का कहना था कि ऐसा करने के लिए ईश्वर ने कहा था। इसलिए उन्होंने बेटियों का त्याग किया।