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पापा पेट से हैं:पुरुष प्रेग्नेंट होंगे, ब्रेस्टफीडिंग कराएंगे; वैदिक काल का विचार जल्द बनेगा मेडिकल साइंस का चमत्कार

नई दिल्ली21 दिन पहलेलेखक: मनीष तिवारी
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अपनी नई फिल्म 'मिस्टर मम्मी' में रितेश देशमुख प्रेग्नेंट नजर आ रहे हैं। फिल्म में पत्नी जेनेलिया डिसूजा की तरह ही रितेश देशमुख में भी प्रेग्नेंसी के सारे लक्षण हूबहू दिखते हैं। मर्द को प्रेग्नेंट देखकर लोग ठहाके लगा रहे हैं। लेकिन, क्या होगा अगर पुरुष सच में प्रेग्नेंट होने लगें और बच्चे को जन्म देने में कामयाब हो जाएं ?

हैरान मत हों, यह कोई ख्याली पुलाव नहीं है। भविष्य में सच में पुरुष न सिर्फ प्रेग्नेंट हो सकेंगे, बल्कि बच्चों को जन्म देने से लेकर ब्रेस्टफीडिंग तक करा सकेंगे, जो अब तक एक महिला ही कर पाती है। ऐसा हम नहीं, वैज्ञानिक कह रहे हैं। वे लगातार इसके लिए रिसर्च कर रहे हैं और धीरे-धीरे कामयाबी की तरफ भी बढ़ रहे हैं।

वैदिक सभ्यता के समय से ही प्रेग्नेंट पुरुष का कॉन्सेप्ट मौजूद रहा है। साहित्य से लेकर हॉलीवुड फिल्मों तक में पुरुषों को प्रेग्नेंट होकर बच्चे को जन्म देते दिखाया गया है।

48 साल पहले एक फिलॉस्फर ने मेडिकल साइंस को दिया आइडिया

20वीं सदी में एक फिलॉस्फर हुए, जिन्हें मेडिकल साइंस की दुनिया में जोसेफ फ्लेचर के नाम से जाना जाता है। उन्हें बायोएथिक्स का पितामह कहा जाता है। 1974 में उन्होंने एक किताब लिखी, 'द एथिक्स ऑफ जेनेटिक कंट्रोल'। जिसमें उन्होंने पुरुषों में यूट्रस ट्रांसप्लांट का आइडिया दिया।

उन्होंने कहा कि यूट्रस ट्रांसप्लांट के जरिए पुरुष भी बच्चे पैदा कर सकते हैं। महिलाओं की तरह ही पुरुषों के चेस्ट में भी निपल्स, मैमरी ग्लैंड्स और पिट्‌यूटरी ग्‍लैंड्स होती हैं, जिससे वे बच्चे को अपना दूध भी पिला सकते हैं।

जोसेफ फ्लेचर की बातों का असर ऐसा हुआ कि दुनिया में एक तबका मानता है कि महिलाओं की तरह ही पुरुषों को भी प्रेग्नेंट होने, बच्चे को जन्म देने और पालने का हक है।

स्त्री-पुरुष में अंतर की वजह बायोलॉजिकल कम, सोशल-कल्चरल ज्यादा

आज दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि बीते कुछ दशकों में मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि ‘मेल प्रेग्नेंसी’ को सिरे से नकारा नहीं जा सकता। ऐसा नहीं हो सकेगा, इसके पीछे कोई वजह भी नहीं दिखती। आखिर कुछ रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स को छोड़ दें, तो महिलाओं और पुरुषों के शरीर में अंतर कम और समानताएं ज्यादा हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक जो अंतर बाहरी तौर पर दिखते भी हैं, उनकी वजह बायोलॉजिकल कम, सोशल और कल्चरल ज्यादा है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी इमोशंस होते हैं। एक जैसे हॉर्मोंस, शरीर की लगभग एक जैसी बनावट।

स्त्री और पुरुष में बायोकेमिकल, न्यूरोएंडोक्राइन, हॉर्मोनल, वैस्कुलर और नर्वस सिस्टम करीब एक ही तरह से काम करता है:

कार्ल युंग ने बताया हर इंसान में स्त्री-पुरुष दोनों प्रवृत्तियां, राजा ईल ने ईला बन दिया पुरुरवा को जन्म

19वीं सदी के मनोवैज्ञानिक कार्ल युंग ने भी अपनी ‘कलेक्टिव अनकॉन्शस’ थ्योरी में कहा था कि हर इंसान के अचेतन में महिला और पुरुष दोनों व्यक्तित्व के गुण होते हैं। यह पढ़ते हुए हमें भारत की मिथकीय परंपरा में प्रचलित अर्धनारीश्वर शिव याद आते हैं और शिव-पार्वती से जुड़ी एक कथा भी।

कथा कुछ यूं है कि शिव-पार्वती अंबिका वन में विहार कर रहे थे। वे प्रेम में लीन थे, तभी कुछ ऋषि वहां आ गए, जिससे पार्वती को लज्जा आ गई। इसपर शिवजी ने शाप दिया कि जो भी अंबिका वन में प्रवेश करेगा, वह तुरंत स्त्री में बदल जाएगा।

एक बार मनु के पुत्र राजा ईल भटक कर अंबिका वन में चले गए और स्त्री में बदल गए। दुखी ईल ने अपना नाम बदलकर ईला रख लिया। फिर उनकी मुलाकात ऋषि बुध से हुई। दोनों के विवाह के बाद ईला ने पुरुरवा को जन्म दिया। जिन्होंने बाद में अपनी मां को शाप मुक्त कराया और ईला फिर से राजा ईल में बदल गईं।

इन्हीं पुरुरवा को अप्सरा उर्वशी से प्रेम हुआ और ऋग्वेद में इनकी प्रेम कथा से साहित्य की शुरुआत हुई।

खैर, राजा ईल के ईला बनकर पुरुरवा को जन्म देने की इस कथा में मेडिकल साइंस का जिक्र भले नहीं है, लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि पुरुषों के प्रेग्नेंट होने और बच्चे को जन्म देने का विचार नया नहीं है।

ऐसी ढेर सारी साइंस फिक्शन किताबें, फिल्में और टेलीविजन ड्रामा हैं, जिनमें पुरुषों को प्रेग्नेंट होकर बच्चों को जन्म देते, मां की तरह उन्हें पालते दिखाया गया है:

इंसानों के अस्तित्व पर आया खतरा, तो पुरुष भी बच्चे पैदा कर बढ़ा सकेंगे आबादी

अमेरिकी पोर्टल सलून डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में सैन फ्रैंसिस्को में रिप्रोडक्टिव एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. एमी संभावना जताती हैं कि दुनिया में बुजुर्गों की संख्या के साथ ही लोगों में इन्फर्टिलिटी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में भविष्य में बच्चे पैदा करने की जिम्मेदारी उठाने के लिए पुरुषों की भी जरूरत पड़ेगी। हालांकि, इसमें काफी समय लग सकता है।

8 अरब इंसानों के बावजूद आबादी बढ़ाने की बात पढ़ने पर भले ही अजीब लगे, लेकिन इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि एक वक्त के बाद धरती पर मौजूद हर प्रजाति के अस्तित्व पर संकट मंडराता है। कोरोना का खतरा भले ही टल गया हो, लेकिन इंसानों के सामने ऐसे संकटों की कमी नहीं है।

महामारी से लेकर प्राकृतिक आपदाएं और इन्फर्टिलिटी जैसी समस्याएं इंसानों की आबादी के लिए बड़ा खतरा हैं। कई प्राचीन मानव सभ्यताएं ऐसे ही कारणों की वजह से खत्म हो चुकी हैं।

लेकिन, इंसानों की आबादी बढ़ाने की जिम्मेदारी उठाने से पहले पुरुषों को कई चुनौतियों से पार पाना होगा:

4 में 3 चुनौतियों का खोजा जा चुका है समाधान

अच्छी बात यह है कि मेडिकल साइंस इन 4 चुनौतियों में से 3 को पहले ही पार कर चुकी है। हॉर्मोनल थेरेपी के जरिए इंजेक्शन देकर हॉर्मोंस की कमी पूरी की जा सकती है। सर्जरी के जरिए पुरुषों में जरूरी रिप्रोडक्टिव सिस्टम तैयार किया जा सकता है। फिलहाल इसका इस्तेमाल ट्रांसजेंडर महिलाओं का जेंडर चेंज करने में हो रहा है।

स्पर्म को फर्टिलाइज करने के लिए जरूरी ओवरी का विकल्प आईवीएफ के रूप में हमारे सामने मौजूद है। आखिरी चैलेंज है यूट्रस, जो ट्रांसप्लांट के जरिए मिल सकता है।

नर चूहे में यूट्रस ट्रांसप्लांट किया गया, 10 बच्चे जन्मे

चीन की नेवल मेडिकल यूनिवर्सिटी, शंघाई के रिसर्चर्स ने जून, 2021 में एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें उन्होंने एक नर चूहे में यूट्रस ट्रांसप्लांट की जानकारी दी। जिसमें प्रेग्नेंट हुए नर चूहे ने 10 बच्चों को जन्म भी दिया। जिसके बाद यूट्रस ट्रांसप्लांट से पुरुषों के भी प्रेग्नेंट हो सकने के दावे को और मजबूती मिली।

चीन के इस प्रयोग ने नैतिकता पर बहस छेड़ दी। हर जेंडर और सेक्स के लोगों में प्रेग्नेंसी की बात ने कई सवाल खड़े कर दिए।

बात जेंडर और सेक्स की हो रही है, तो आगे बढ़ने से पहले यह जान लें कि दोनों में क्या अंतर है, ताकि ‘मेल प्रेग्नेंसी’ को बेहतर ढंग से समझा जा सके:

प्रेग्नेंसी में यूट्रस यानी गर्भाशय का अहम है रोल

प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे जरूरी चीज है यूट्रस। जिसके पास यूट्रस और ओवरीज हैं, वह प्रेग्नेंट हो सकते हैं और बच्चों को जन्म भी दे सकते हैं। लेकिन, पुरुषों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में यूट्रस नहीं होता।

इसी वजह से मर्द के तौर पर जन्म लेने वाले लोग प्रेग्नेंट नहीं हो सकते। फिर चाहे वे 'सिसजेंडर मेल' हों या फिर 'ट्रांसजेंडर वुमन'।

महिला के तौर पर जन्म लेने वाली 'सिसजेंडर फीमेल' और 'ट्रांसजेंडर मेल' में फीमेल रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स के साथ ही यूट्रस भी मौजूद होता है। जिससे वह प्रेग्नेंट होकर बच्चों को जन्म दे सकते हैं और बच्चे को चेस्टफीडिंग भी करा सकते हैं।

महिला से पुरुष बनने के लिए जेंडर चेंज करवाने की थेरेपी करा रहे लोग भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं। अगर किसी ने जेंडर चेंज करवाने के लिए पार्शियल हिस्टेरेक्टमी करवाई है यानी यूट्रस रिमूव करा दिया है, लेकिन ओवरीज, सर्विक्स और फेलोपियन ट्यूब नहीं, तो पुरुष साथी से फिजिकल रिलेशन बनाने से उन्हें फेलोपियन ट्यूब या पेट में ही गर्भ ठहर सकता है।

PubMed Central के मुताबिक 1895 से 2015 तक दुनिया में ऐसे 71 मामले सामने आ चुके थे।

अमेरिका के मोटिवेशनल स्पीकर और राइटर थॉमस बीटी ऐसे ही ट्रांस मैन हैं, जो अपना जेंडर चेंज कराने की थेरेपी के बीच प्रेग्नेंट हुए:

क्या बिना यूट्रस के प्रेग्नेंसी संभव है?

अब तक आप यह तो समझ गए होंगे कि प्रेग्नेंट होने के लिए यूट्रस सबसे अहम है, जहां गर्भ ठहरता है, भ्रूण का विकास शुरू होता है। लेकिन, बिना यूट्रस के भी प्रेग्नेंसी संभव है। कई कारणों से महिलाओं में यूट्रस के बाहर फेलोपियन ट्यूब में ही बच्चे का विकास शुरू हो जाता है या फिर उन्हें एब्डॉमिनल प्रेग्नेंसी हो जाती है।

यूट्रस से बाहर होने वाली यह प्रेग्नेंसी Ectopic Pregnancy कहलाती हैं, जिनमें मां और बच्चे दोनों की जान का खतरा होता है। लिहाजा, पुरुषों के लिए भी एब्डॉमिनल प्रेग्नेंसी उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए यूट्रस ट्रांस्प्लांट का ज्यादा सेफ ऑप्शन मौजूद होते हुए इतना बड़ा रिस्क न तो पुरुष उठाना चाहेंगे और न ही डॉक्टर।

यूट्रस ट्रांसप्लांट से प्रेग्नेंसी महिलाओं में सफल रही है। आमतौर पर यूट्रस ट्रांसप्लांट के 1 साल बाद महिलाएं आईवीएफ के जरिए प्रेग्नेंट होती हैं और सिजेरियन सर्जरी से बच्चे जन्म देती हैं।

ट्रांस वुमन में यूट्रस ट्रांसप्लांट होगा ‘मेल प्रेग्नेंसी’ की तरफ सबसे बड़ा कदम

फिलहाल 'मेल बॉडी' में यूट्रस ट्रांसप्लांट पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स में इसके एथिकल इश्यूज पर बहस हो रही है। लेकिन, मेल प्रेग्नेंसी पर बात आगे बढ़ती है, तो सबसे पहले ट्रांस वुमन इसके लिए आगे आएंगी। ट्रांस वुमन का जन्म भले ही पुरुष के शरीर में हुआ हो, लेकिन आत्मा से वह खुद को फीमेल ही महसूस करती हैं।

रिप्रोडक्टिव एंडोक्रिनोलॉजी और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. रिचर्ड पॉल्सन कहते हैं कि मेल बॉडी में यूट्रस ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सकता, उन्हें इसकी कोई वजह नहीं दिखती है। साइंस पोर्टल लाइव साइंस की एक रिपोर्ट में वह कहते हैं कि जेंडर चेंज करवा कर फीमेल बनने वाली ट्रांस वुमन भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

प्रेग्नेंट होने के लिए पुरुषों को कराने होंगे ये बदलाव

पुरुषों को प्रेग्नेंट होने के लिए यूटेराइन ट्रांसप्लांट कराना पड़ेगा। यूटेराइन ट्रांसप्लांट में यूट्रस, सर्विक्स, वेजाइनल कफ जैसे ऑर्गन्स ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। फिर इन्हें कनेक्टिव टिश्यूज, धमनियों और नसों से कनेक्ट किया जाता है। फिर वेजाइनोप्लास्टी के जरिए मेल प्राइवेट पार्ट की सर्जरी कर उससे फीमेल प्राइवेट पार्ट डेवलप किया जाता है, जिसे पेनियल इन्वर्जन प्रोसीजर भी कहते हैं।

फिलहाल, आधिकारिक तौर पर पुरुष से महिला बनने के लिए ट्रांस वुमन वेजाइनोप्लास्टी करवाती हैं, ताकि उनका जेंडर चेंज हो सके।

पुरुषों में यूट्रस के लिए कोई स्पेस नहीं होता है। इसलिए उनका पेल्विक इनलेट भी सर्जरी के जरिए चौड़ा करना पड़ेगा। फिर यूट्रस लगाने के लिए एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा, ताकि जख्म भर जाएं। इसके बाद यूट्रस ट्रांसप्लांट का प्रोसेस शुरू होगा।

अपने ही स्पर्म से हो सकेंगे प्रेग्नेंट, सर्जरी से होगा बच्चे का जन्म

यूटेराइन ट्रांसप्लांट से पहले पेशेंट ने अपना स्पर्म बैंक में सुरक्षित रखवाया है, तो उसका इस्तेमाल करके आईवीएफ के जरिए वह प्रेग्नेंट हो सकेगा। इस दौरान डॉक्टर हॉर्मोंस की मॉनिटरिंग करते रहेंगे, ताकि प्रेग्नेंसी में कोई खतरा न हो। फिर सिजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को पैदा कर सकेंगे।

महिलाओं की तरह क्या पुरुष बच्चों को दूध पिला सकते हैं?

बात साल 2002 की है। श्रीलंका में 38 साल के एक व्यक्ति ने दूसरे बच्चे को जन्म देते वक्त दम तोड़ दिया। बच्ची को भूख से रोते देख एक दिन उसने अपनी छाती से लगाया, तो पता चला कि वह नवजात को दूध पिला सकता है। तब श्री लंका के गवर्नमेंट हॉस्पिटल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कमल जयसिंघे ने बताया कि अगर पुरुष में प्रोलैक्टिन हॉर्मोन हाईपरएक्टिव हो जाए, तो उसके चेस्ट में दूध बन सकता है।

मेडिकल एन्थ्रोपोलॉजिस्ट डेना राफेल ने 1978 में अपनी कितना ‘द टेंडर गिफ्ट: ब्रेस्टफीडिंग’ में लिखा था कि पुरुष अपने चेस्ट के निप्पल्स और टिश्यूज को एक्टिव कर लैक्टेशन शुरू कर सकते हैं।

ट्रांस वुमन में लैक्टैशन शुरू करने के लिए डॉक्टर ब्रेस्ट मिल्क पंप से निप्पल्स के टिश्यूज को एक्टिव करने के साथ ही कुछ दवाएं भी देते हैं। अब मार्केट में बकायदा 'मेल लैक्टेशन किट' आने लगी हैं, जिनका इस्तेमाल कर पुरुष लैक्टेशन के लिए जरूरी हॉर्मोंस और चेस्ट के टिश्यूज को एक्टिव कर सकते हैं, ताकि बच्चों को दूध पिला सकें।

बात हॉर्मोंस की हो रही है तो यह भी जान लें कि मेल और फीमेल में हार्मोनल ग्लैंड्स एकसमान होती हैं, अंतर सिर्फ दोनों में हॉर्मोंस के लेवल का होता है:

इंटरनेट की दुनिया में आ चुके हैं 'प्रेग्नेंट मैन'

असली दुनिया में न सही, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में मेल प्रेग्नेंसी होने लगी है। यकीन नहीं होता तो अपने स्मार्टफोन का कीबोर्ड चेक करिए। कीबोर्ड के इमोजी ऑप्शंस में Pregnant Man सर्च करने पर आपको प्रेग्नेंट पुरुष की इमोजी नजर आएगी। यूनिकोड कंर्सोटियम ने यह नया इमोजी सितंबर 2021 में Emoji 14.0 वर्जन में लॉन्च किया था। इन्हें इसलिए लॉन्च किया गया, ताकि इनका इस्तेमाल ट्रांस मैन और नॉन-बाइनरी जेंडर वाले लोग कर सकें।

ये इमोजी अब एंड्रॉयड से लेकर एप्पल तक सारे प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं:

कई ट्राइब्स में पुरुषों के 'प्रेग्नेंट होकर बच्चे को जन्म देने' की परंपरा

प्राचीन इजिप्ट में परंपरा थी कि महिला के प्रेग्नेंट होने के बाद पति भी प्रेग्नेंट होने से लेकर बच्चे को जन्म देने तक के सारे रिचुअल्स पूरे करता था। अमेरिका से लेकर थाईलैंड, रूस, चीन और भारत तक कई ट्राइब्स में आज भी ऐसी परंपराएं जारी हैं, जिसमें पत्नी की तरह ही पुरुष भी प्रेग्नेंसी के लक्षण दिखाने से लेकर बच्चे को जन्म देने तक का अभिनय करता है।

ग्राफिक्स: सत्यम परिडा

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