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US में लोग कम हैं, बंदूकें ज्यादा:कैंसर-एक्सिडेंट से ज्यादा गोलीबारी में मरते हैं बच्चे-अंग्रेजों से लड़ने को रखी थीं बंदूकें फिर लत लगी

वाशिंगटन3 महीने पहले

अमेरिका के टेक्सास के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में 21 लोगों की मौत हो गई है। इनमें 19 मासूम शामिल हैं। अमेरिका में रिहायशी इलाकों में हर साल होने वाली गोलीबारी में बड़ी संख्या में मासूम शिकार होते हैं। मारने वालों में भी नाबालिग होते हैं।

बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह ‘बंदूक’ है

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के आंकड़े बताते हैं कि 2020 में गोलीबारी की घटना में 45,222 लोगों की जान चली गई थी, इनमें 4,367 बच्चे शामिल थे। जबकि, इसी अवधि में रोड एक्सीडेंट के चलते 3,900 बच्चों की जान गई। अमेरिका में ऐसा पहली बार था जब एक्सीडेंट और कैंसर के मुकाबले गोलियों ने ज्यादा बच्चों की जान ली।

CDC के आंकड़ों के मुताबिक 2006 से लेकर 2016 के बीच 22 हजार से ज्यादा बच्चे गोलीबारी में मारे गए।

अमेरिका में बंदूक रखना शौक है। हर घर में बंदूक होती है। जाहिर है, कभी-कभी बंदूकें बच्चों के हाथ लग जाती हैं। कई बार बच्चे खेल-खेल में खुद की या अपने भाई-बहन की जान ले लेते हैं। इस साल अब तक स्कूल में गोलीबारी की 27 ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 124 बच्चे मारे जा चुके हैं।

मारने वाले भी ज्यादातर बच्चे ही हैं

स्कूलों में होने वाली गोलीबारी के ज्यादातर गुनहगार भी कम उम्र के स्टूडेंट ही होते हैं। ‘US गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस’ की रिपोर्ट बताती है कि स्कूल में गोलीबारी के आधे आरोपी स्कूल के ही पूर्व या मौजूदा छात्र होते हैं। इनमें से ज्यादातर छात्रों ने हमले के लिए अपने माता-पिता की बंदूक का इस्तेमाल किया था। रिसर्च में इस बात का भी जिक्र है कि हमला करने वाली ज्यादातर बच्चे पारिवारिक समस्याओं के चलते तनाव या डिप्रेशन में थे।

युद्ध से ज्यादा लोग देश के अंदर गोलीबारी में मारे गए

पिछले 50 सालों में अमेरिका में बंदूक की वजह से 15 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। यह संख्या 250 सालों के अमेरिकी इतिहास के तमाम युद्धों में मारे गए सैनिकों की संख्या से कहीं ज्यादा है।

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अमेरिका में आबादी से ज्यादा बंदूकों की संख्या

अमेरिका में प्रति 100 लोगों पर 120 बंदूकें हैं। बंदूकों की यह संख्या नागरिकों से ज्यादा है। अमेरिका में बंदूक रखने को नागरिक स्वतंत्रता से जोड़ कर देखा जाता है। अमेरिकी संविधान में मिले अधिकारों के चलते यहां बंदूक खरीदना फल-सब्जियां खरीदने जितना आसान है। यही कारण है कि अमेरिकी घरों में बड़ी संख्या में बंदूकें पहुंच गई हैं। ये बंदूकें आसानी से बच्चों की पहुंच में आ जाती हैं।

अमेरिका में मास शूटिंग एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसमें हर साल हजारों लोगों की जान जाती है।
अमेरिका में मास शूटिंग एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसमें हर साल हजारों लोगों की जान जाती है।

गुलामी से लड़ने को रखीं बंदूकें, फिर लत लग गई

अमेरिका में गन कल्चर की जड़ें उसके इतिहास से जुड़ी हैं। ब्रिटेन की गुलामी में अमेरिकियों के हथियार रखने पर पाबंदी थी। अमेरिकी फ्रीडम स्ट्रगल में बंदूक रखना देश के प्रति वफादारी का सबूत माना जाने लगा था। 1876 में आजादी मिलने के बाद ब्रिटिश अपमान से बाहर निकलने के लिए संविधान निर्माताओं ने दूसरे संविधान संशोधन-1791 में बंदूक रखना मौलिक अधिकार घोषित कर दिया। अमेरिकी नागरिकों को बंदूक रखने की आजादी वहां के संविधान से मिली है। यही कारण है कि बराक ओबामा सहित कई प्रेसिडेंट कोशिशों के बावजूद गन कल्चर को कंट्रोल नहीं कर सके।

‘बंदूकें किसी को नहीं मारतीं, लोग एक-दूसरे को मारते हैं’

अमेरिका में मास शूटिंग के बाद जब भी गन कल्चर को कंट्रोल करने की बात होती है, एक बड़ी लॉबी उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है। नेशनल राइफल एसोसिएशन (NRA) के 50 लाख से ज्यादा मेंबर हैं। इससे जुड़े लोगों में यह नारा प्रचलित है कि ‘बंदूकें किसी को नहीं मारतीं, लोग एक-दूसरे को मारते हैं।’

NRA हर साल अरबों रुपए अमेरिकी संसद में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए खर्च करती है। दूसरी ओर लगभग 40% अमेरिकियों का भी मानना है कि सरकार को ‘बंदूक रखने के अधिकार’ में दख़लंदाजी नहीं करनी चाहिए।

बाइडेन-ओबामा लगाम लगाने के फेवर में, ट्रंप कहते थे छूट मिले

अमेरिकी राजनीति में गन कल्चर पर नेताओं की राय काफी बंटी हुई है। राष्ट्रपति जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी आम तौर पर बंदूक बिक्री को नियंत्रित करने की हिमायती है। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी बंदूक रखने के अधिकार का समर्थन करती है। 2016 में अपनी रैली में ट्रंप कह चुके हैं कि वो और उनकी पार्टी बंदूक रखने के संवैधानिक अधिकार में दखल नहीं देगें। वहीं हालिया घटना के बाद जो बाइडेन सख्त कानून के अपने इरादे को दोहरा रहे हैं।

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